वो शख्स जो शायद ही कभी सत्ता की राजनीति से बाहर रहा
महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार ने कैसे जमाई अटूट धाक
महाराष्ट्र की राजनीति में अगर किसी एक नेता को लगातार सत्ता के केंद्र में बने रहने का प्रतीक माना जाए, तो वह नाम अजित पवार का है। दशकों तक सक्रिय राजनीति में रहने वाले अजित पवार को लेकर यह कहा जाता रहा है कि वे ऐसे नेता हैं जिन्हें सत्ता से बाहर करना आसान नहीं रहा। उपमुख्यमंत्री पद पर कई बार पहुंचने वाले अजित पवार भले ही मुख्यमंत्री न बन पाए हों, लेकिन सत्ता की धुरी में उनकी मौजूदगी हमेशा बनी रही।
राजनीति में शुरुआती एंट्री
अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को हुआ। उन्हें राजनीति विरासत में मिली, लेकिन उन्होंने अपनी अलग पहचान मेहनत और रणनीति से बनाई। महज 23 साल की उम्र में वे एक कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्री के बोर्ड में शामिल हो गए। यही वह दौर था जब उन्होंने ग्रामीण राजनीति और सहकारिता की ताकत को नज़दीक से समझा।
इसके बाद 1991 में वे पुणे सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष बने और करीब 16 साल तक इस पद पर बने रहे। सहकारिता क्षेत्र में उनकी पकड़ ने उन्हें पश्चिमी महाराष्ट्र में एक मजबूत नेता के रूप में स्थापित कर दिया।
सांसद से विधायक तक का सफर
1991 में ही अजित पवार ने बारामती लोकसभा सीट से जीत दर्ज कर संसद में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने राज्य की राजनीति पर फोकस किया और 1995 में बारामती विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा।
यह सीट आगे चलकर उनकी पहचान बन गई। वे लगातार सात बार बारामती से विधायक चुने गए और यह रिकॉर्ड अपने आप में उनकी राजनीतिक पकड़ को दर्शाता है।
उपमुख्यमंत्री पद पर रिकॉर्ड
अजित पवार महाराष्ट्र के उन गिने-चुने नेताओं में शामिल हैं जो कई बार उपमुख्यमंत्री बने। अलग-अलग राजनीतिक हालात, गठबंधन और सत्ता समीकरणों में उन्होंने खुद को प्रासंगिक बनाए रखा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अजित पवार की सबसे बड़ी ताकत उनकी ग्राउंड पॉलिटिक्स, प्रशासनिक समझ और निर्णय लेने की क्षमता रही।
मंत्रालयों में प्रभाव
अजित पवार ने राज्य सरकार में कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली।
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1999 में विलासराव देशमुख सरकार में उन्हें सिंचाई मंत्रालय मिला
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बाद में वे ग्रामीण विकास मंत्री भी रहे
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2004 में एनसीपी-कांग्रेस सरकार बनने पर उन्हें जल संसाधन मंत्रालय सौंपा गया
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2009 से 2014 के बीच पृथ्वीराज चव्हाण सरकार में भी वे कई महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री रहे
सिंचाई और जल संसाधन जैसे विभागों ने उन्हें महाराष्ट्र की ग्रामीण राजनीति में और मजबूत किया।
बारामती: राजनीतिक गढ़
बारामती केवल एक विधानसभा सीट नहीं, बल्कि अजित पवार की राजनीतिक प्रयोगशाला रही है। यहां से उन्होंने बार-बार जीत दर्ज कर यह साबित किया कि उनका जनाधार केवल परिवार या नाम पर नहीं, बल्कि संगठन और पकड़ पर आधारित है।
2025 के विधानसभा चुनाव में भी बारामती सीट चर्चा के केंद्र में रही, जहां मुकाबला बेहद दिलचस्प माना गया।
सत्ता में रहने की कला
अजित पवार को लेकर अक्सर कहा जाता है कि वे राजनीतिक परिस्थितियों के हिसाब से खुद को ढालने में माहिर हैं। बदलते गठबंधन, टूटते-बनते समीकरणों के बीच भी वे सत्ता के करीब बने रहे। यही वजह है कि उन्हें महाराष्ट्र की राजनीति का सबसे चतुर रणनीतिकार भी कहा जाता है।
मुख्यमंत्री की कुर्सी से दूरी
इतना लंबा राजनीतिक अनुभव, कई बार उपमुख्यमंत्री पद—इसके बावजूद अजित पवार कभी मुख्यमंत्री नहीं बन पाए। यह उनके राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा अधूरा अध्याय माना जाता है। हालांकि उनके समर्थक मानते हैं कि सत्ता में उनकी भूमिका किसी मुख्यमंत्री से कम नहीं रही। अजित पवार का राजनीतिक सफर बताता है कि वे केवल एक नेता नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की सत्ता संरचना का स्थायी स्तंभ रहे हैं। सहकारिता से लेकर मंत्रालयों तक, बारामती से लेकर मुंबई तक—उनकी मौजूदगी ने राज्य की राजनीति को लंबे समय तक प्रभावित किया है।
अजित पवार का एक विमान हादसे में निधन
महाराष्ट्र के NCP नेता और राज्य के डिप्टी सीएम अजित पवार का एक विमान हादसे में निधन हो गया। विमान हादसा बुधवार सुबह महाराष्ट्र के बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के वक्त हुआ है। लैंडिंग का प्रयास करते वक्त विमान क्रैश हो गया। हादसे में अजित पवार के साथ विमान में सवार पांच लोगों की मौत हो गई। महाराष्ट्र के एनसीपी नेता और उपमुख्यमंत्री अजित पवार को ले जा रहा एक निजी चार्टर्ड विमान बुधवार सुबह महाराष्ट्र के बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग की कोशिश के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसा उस समय हुआ जब विमान रनवे के पास उतर रहा था। दुर्घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार विमान एयरपोर्ट के पास ताऊपट्टी क्षेत्र में गिरा और टकराते ही उसमें भीषण आग लग गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, विमान खेत में गिरने के बाद पूरी तरह आग की चपेट में आ गया और कुछ ही मिनटों में जलकर खाक हो गया।





