अफगानिस्तान की सैन्य ताकत
हाल के समय में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर तनाव बढ़ गया है। तालिबान ने अफगान सेना से जब्त किए गए हथियारों और गोला-बारूद से अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत किया है। ग्लोबल फायर पावर 2025 के अनुसार, 145 देशों में अफगानिस्तान 118वें स्थान पर है, लेकिन तालिबान ने लगभग 2 लाख लड़ाकों वाली गोरिल्ला युद्ध शैली की सेना तैयार कर ली है। ये लड़ाके पहाड़ी इलाकों में अचानक हमलों और तेज अभियानों में कुशल हैं।
सोवियत और अमेरिकी हथियार
तालिबान के पास मुख्य रूप से पुराने सोवियत टैंक और बख्तरबंद वाहन हैं, जिन्हें 2021 में अफगान सेना से जब्त किया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अफगानिस्तान के पास लगभग 50 मुख्य युद्ध टैंक, 300 बख्तरबंद वाहन और 300 तोपें हैं। इसके अलावा, अमेरिकी सेना द्वारा छोड़े गए हथियारों और गोला-बारूद ने तालिबान की सैन्य क्षमताओं में इजाफा किया है।
सीमित वायु क्षमता
तालिबान की वायु शक्ति कमज़ोर है। अफगानिस्तान के पास लगभग 26 हलके हमलावर विमान A-29 सुपर टुकानो, 30 हेलीकॉप्टर और 15 परिवहन विमान हैं। कुल लड़ाकू विमानों की संख्या करीब 40 है। सीमित वायु रक्षा के बावजूद तालिबान ने जमीन से संचालित हमलों और गुरिल्ला युद्ध तकनीकों से विरोधियों को चुनौती दी है।
पाकिस्तान के खिलाफ तालिबान की रणनीति
तालिबान पाकिस्तान पर गुरिल्ला युद्ध कौशल और स्थानीय पश्तून आबादी के समर्थन के दम पर दबाव बना रहा है। तालिबान तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के साथ संबंधों का भी फायदा उठा रहा है। पाकिस्तान को आंतरिक सुरक्षा और सीमा संघर्ष दोनों से निपटना पड़ रहा है, जिससे तालिबान मजबूत स्थिति में है। अफगानिस्तान में दशकों से जमा हथियार भंडार और अवैध हथियारों का व्यापार तालिबान को लगातार हथियारों की आपूर्ति करता रहा है।
तालिबान की ताकत सिर्फ हथियारों पर निर्भर नहीं है, बल्कि गुरिल्ला युद्ध कौशल, स्थानीय समर्थन और सीमा पर जटिल परिस्थितियों का भी फायदा उठा रही है। अफगानिस्तान से जब्त हथियार और गोला-बारूद तालिबान को पाकिस्तान पर दबाव बनाए रखने में सक्षम बना रहे हैं।