आडवाणी दिल्ली के अपोलो अस्पताल में भर्ती, जानें अब कैसा है बीजेपी वरिष्ठ नेता का स्वास्थ्य
देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को रूटीन चेकअप के लिए दिल्ली स्थित अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है। लालकृष्ण आडवाणी फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में हैं। उनका स्वास्थ्य स्थिर बताया जा रहा है। बता दें पिछले दो सप्ताह से उनकी तबीयत बिगड़ी हुई है। लालकृष्ण आडवाणी को इस साल अगस्त 2024 में भी अपोलो अस्पताल में एडमिट कराया गया था। उस समय वे न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. विनीत सूरी के ऑब्जर्वेशन में थे। स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद उन्हें डिस्चार्ज किया गया था।
लालकृष्ण आडवाणी को किया अस्पताल में भर्ती
रूटीन चेकअप के लिए अपोलो अस्पताल में भर्ती
डॉक्टरों की निगरानी में हैं आडवाणी
स्थिर बताया जा रहा है उनका स्वास्थ्य
पिछले दो सप्ताह पहले भी उनकी बिगड़ी थी तबीयत
अगस्त 2024 में भी किया था अपोलो अस्पताल में भर्ती
लाल कृष्ण आडवाणी का सियासी सफर
लाल कृष्ण आडवाणी का जन्म 8 नवंबर 1927 को कराची में हुआ था। वे 14 साल की उम्र में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आरएसएस से जुड़ गए थे। साल 1947 में भारत विभाजन के बाद आडवाणी और उनका परिवार भारत आकर बस गया। साल 1951 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा स्थापित भारतीय जनसंघ में आडवाणी शामिल हो गए। लाल कृष्ण आडवाणी ने साल 1970 में राज्यसभा में इंट्री ली थी। दो साल बाद वे बीजेपी के अध्यक्ष चुने गए थे। साल 1975 के आपातकाल के दौर में लालकृष्ण आडवाणी और उनके साथ अटल बिहारी वाजपेयी को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया था।
1977 में बने थे मोरारजी देसाई सरकार में मंत्री
साल 1977 में देश में मोरारजी देसाई के नेतृत्व में जनता पार्टी ने सरकार बनाई थी। उस समय आडवाणीने सूचना एवं प्रसारण मंत्री की जिम्मेदारी को संभाला था। साल 1980 में आडवाण ने बीजेपी की स्थापना में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद 1984 में हुए आम चुनाव में बीजेपी मात्र दो सीट से 1990 के दशक में राष्ट्रीय राजनीतिक ताकत बनाने में आडवाणी का खास योगदान रहा है। बीजेपी ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की पैरवी करते आडवाणी के नेतृत्व में ही राम जन्मभूमि आंदोलन को आगे बढ़ाया, बीजेपी की राजनीतिक किस्मत को इस आंदोलन ने काफी हद तक चमकाया था।
बीजेपी के लौह पुरुष कहे जाते हैं लालकृष्ण आडवाणी
बीजेपी में लालकृष्ण आडवाणी की शख्सीयत ‘लौह पुरुष’ के समान है। जिनका पार्टी हमेशा ही आभार मानती है। बीजेपी को लोकसभा की दो सीट से 120 सीट तक पहुंचाने में आडवाणी की खास योगदान रहा।उन्होंने आम आदमी की सहानुभूति प्राप्त करने वाले एजेंडे हिंदुत्व को पूरी ताकत से उठाया। इसका प्रभाव यह रहा कि बीजेपी केन्द्र की सत्ता तक पहुंची। आज बीजेपी अपने आप को विश्व की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करती है। बता दें आडवाणी ने ही हिंदुत्व का झंडा बुलंद करते हुए ना सिर्फ बीजेपी को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा दिलाया, बल्कि साल 1989 के आम चुनाव में 89 सीट और इसके बाद 1991 के आम चुनाव में लोकसभा की 120 सीट के साथ बीजेपी देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी बनी। इसके बाद हुए अगले आम चुनाव 1996 में पहली बार बीजेपी ने देश में कोई गैर कांग्रेसी सरकार बनाई थी।