राजपाल यादव चेक बाउंस केस: 2010 से 2026 तक की पूरी टाइमलाइन, जेल से कर्ज तक की कहानी
हिंदी सिनेमा के चर्चित अभिनेता राजपाल यादव इन दिनों अपनी फिल्मों नहीं, बल्कि एक पुराने चेक बाउंस मामले को लेकर सुर्खियों में हैं। 2010 में फिल्म निर्माण के लिए लिया गया कर्ज 2026 में उन्हें तिहाड़ जेल तक ले गया। आइए जानते हैं इस पूरे मामले की क्रमवार टाइमलाइन और आगे की कानूनी स्थिति।
2010: फिल्म के लिए 5 करोड़ का लोन
कहानी की शुरुआत साल 2010 से होती है। राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ बनाने के लिए दिल्ली स्थित कंपनी मुरली प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया। फिल्म 2012 में रिलीज हुई। लगभग 11 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर महज 38 लाख रुपये की कमाई की और बुरी तरह फ्लॉप हो गई। फिल्म की असफलता के बाद कर्ज चुकाना मुश्किल हो गया और आर्थिक संकट गहराने लगा।
2018: चेक बाउंस, केस दर्ज
कर्ज चुकाने के लिए राजपाल यादव ने कंपनी को 7 चेक दिए। लेकिन सभी चेक बाउंस हो गए। इसके बाद कंपनी ने कानूनी कार्रवाई शुरू की। मामला Negotiable Instruments Act की धारा 138 के तहत दर्ज हुआ, जो चेक अनादरण (Dishonour) से जुड़ा आपराधिक प्रावधान है। अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी को दोषी करार दिया और 6 महीने की जेल की सजा सुनाई।
2019: सेशंस कोर्ट में अपील, राहत नहीं
राजपाल यादव ने 2019 में सेशंस कोर्ट में सजा के खिलाफ अपील की। लेकिन अदालत ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। यानी दोषसिद्धि और 6 महीने की सजा यथावत रही।
2024: दिल्ली हाईकोर्ट से अस्थायी राहत
जून 2024 में दिल्ली हाईकोर्ट ने राजपाल यादव को अस्थायी राहत दी। सजा पर रोक लगाते हुए अदालत ने कहा कि अभिनेता को यह दिखाना होगा कि वे बकाया राशि चुकाने के लिए गंभीर हैं। कोर्ट ने दोनों पक्षों को समझौते की संभावना तलाशने की सलाह दी और केस को मेडिएशन सेंटर भेज दिया। राजपाल यादव ने अदालत को आश्वस्त किया कि वे 2.5 करोड़ रुपये का भुगतान करेंगे—
- 40 लाख रुपये पहली किश्त
- 2.10 करोड़ रुपये दूसरी किश्त
लेकिन तय समय सीमा बीतने के बावजूद कोई भी किश्त जमा नहीं हुई। इसी बीच ब्याज और दंड जोड़कर कर्ज बढ़कर लगभग 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
2025: वादे और देरी
अक्टूबर 2025 में राजपाल यादव ने 75 लाख रुपये जमा किए। इसके बाद दिसंबर 2025 में 40 लाख रुपये देने का वादा किया, लेकिन भुगतान नहीं कर सके। अदालत ने टिप्पणी की कि आरोपी गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं और बार-बार समय मांगकर आदेशों का पालन नहीं कर रहे।
फरवरी 2026: आखिरी मौका भी खत्म
फरवरी 2026 में अदालत ने एक सप्ताह की और मोहलत मांगने वाली याचिका खारिज कर दी। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि “सेलिब्रिटी होने से अलग नियम नहीं बन सकते।” कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बार-बार किए गए वादों का उल्लंघन न्यायिक प्रक्रिया के प्रति अनादर है। इसके बाद राजपाल यादव को 4 फरवरी 2026 को दोपहर 4 बजे तक आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया गया।
5 फरवरी 2026: तिहाड़ जेल में सरेंडर
5 फरवरी 2026 को राजपाल यादव ने तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत द्वारा सुनाई गई 6 महीने की सजा अब प्रभावी हो गई। सरेंडर के बाद उन्होंने कहा, “मेरे पास पैसे नहीं हैं। कोई और उपाय नहीं दिखता। मुझे इस मुसीबत का सामना खुद ही करना पड़ेगा।” सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या 6 महीने की सजा काट लेने के बाद राजपाल यादव को 9 करोड़ रुपये का कर्ज नहीं चुकाना पड़ेगा? क्या मामला खत्म हो जाएगा? कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इसका जवाब है—नहीं।
क्रिमिनल सजा और सिविल देनदारी अलग
धारा 138 के तहत दो तरह की जिम्मेदारियां होती हैं—
- क्रिमिनल सजा – जेल या जुर्माना
- सिविल देनदारी – मूलधन, ब्याज और हर्जाना
जेल की सजा काट लेने से सिविल देनदारी खत्म नहीं होती। यानी 9 करोड़ रुपये की बकाया राशि चुकानी ही पड़ेगी या फिर कानूनी समझौता करना होगा।
क्या जेल से बाहर आ सकते हैं?
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि चेक बाउंस का मामला compoundable श्रेणी में आता है। यानी यदि दोनों पक्ष आपसी सहमति से समझौता कर लें और पूरी राशि चुका दी जाए, तो सजा निलंबित या समाप्त हो सकती है। हालांकि, अदालत की अवमानना या आदेशों का उल्लंघन अलग मुद्दा हो सकता है। इस मामले में हाईकोर्ट द्वारा दिए गए समय का पालन न करने के कारण स्थिति और जटिल हुई।2010 में लिया गया 5 करोड़ रुपये का लोन 16 साल बाद 9 करोड़ की देनदारी और जेल की सजा तक पहुंच गया। यह मामला बताता है कि वित्तीय अनुशासन और कानूनी दायित्वों की अनदेखी कितनी भारी पड़ सकती है। राजपाल यादव के लिए अब एक ही रास्ता बचता है—या तो बकाया राशि चुकाएं या कंपनी के साथ अंतिम समझौता करें। जेल की सजा काट लेना इस कर्ज से मुक्ति नहीं दिलाएगा।