रामपुर में कथित पाकिस्तानी मूल की शिक्षिका पर कार्रवाई, डीएम बोले—जांच जारी, आगे की प्रक्रिया चल रही
रामपुर (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में कथित पाकिस्तानी मूल की एक महिला शिक्षिका के खिलाफ दर्ज मामले को लेकर प्रशासन ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) अजय कुमार द्विवेदी ने कहा है कि इस प्रकरण में सभी कानूनी प्रक्रियाएं जारी हैं और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। डीएम ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार के बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा की गई जांच में संबंधित शिक्षिका की पहचान पाकिस्तानी मूल की पाई गई है, जिसके आधार पर उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने कहा, “शिक्षा विभाग की जांच में यह सामने आया है कि संबंधित महिला पाकिस्तानी मूल की है। इसी आधार पर उसके खिलाफ केस दर्ज किया गया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन इस पूरे मामले को गंभीरता से ले रहा है और कानून के तहत जो भी आवश्यक कदम होंगे, वह उठाए जाएंगे।
33 साल से शिक्षक के रूप में कार्यरत थी महिला
मामला एक ऐसी महिला से जुड़ा है, जो कथित तौर पर पिछले 33 वर्षों से रामपुर में शिक्षक के रूप में कार्यरत थी। आरोप है कि उसने अपनी पाकिस्तानी नागरिकता की जानकारी छिपाकर सरकारी सेवा प्राप्त की। इस मामले में मंगलवार को अजीमनगर थाना में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 318(4), 338, 336(3) और 340(2) के तहत केस दर्ज किया गया है।
यह शिकायत बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) की ओर से दर्ज कराई गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि महिला ने अपनी वास्तविक नागरिकता छिपाकर 22 जनवरी 1992 को शिक्षक पद पर नियुक्ति हासिल की थी। शिकायत के अनुसार, यह मामला कई दशक पुराना है, लेकिन अब जांच के बाद सामने आया है।
शिकायत में क्या कहा गया
शिकायत के मुताबिक, फरजाना पुत्री अख्तर अली, जो रामपुर शहर के आतिशबाज मोहल्ले की निवासी बताई गई है, की शादी 17 जून 1979 को पाकिस्तान के सिबगत अली से हुई थी। शादी के बाद फरजाना पाकिस्तान चली गई, जहां उसने पाकिस्तानी नागरिकता प्राप्त कर ली। पाकिस्तान में रहते हुए उसने दो बेटियों को जन्म भी दिया।
शिकायत में आगे कहा गया है कि शादी के करीब तीन साल बाद फरजाना का अपने पति से तलाक हो गया। इसके बाद वह अपनी दोनों बेटियों के साथ भारत लौट आई और रामपुर में रहने लगी। आरोप है कि भारत लौटने के बाद उसका वीजा समाप्त हो चुका था, इसके बावजूद वह यहां अवैध रूप से रह रही थी।
1983 में दर्ज हुआ था पहला मामला
प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 1983 में लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) ने फरजाना के खिलाफ सिटी कोतवाली थाने में मामला दर्ज कराया था। आरोप था कि वह वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी भारत में रह रही है। इसके बावजूद, कथित तौर पर उसने अपनी पाकिस्तानी नागरिकता छिपाए रखी और आगे चलकर सरकारी नौकरी हासिल कर ली।
1992 में बनी शिक्षिका
जांच में सामने आया है कि फरजाना ने 22 जनवरी 1992 को बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक के रूप में नियुक्ति पाई। आरोप है कि इस दौरान उसने यह तथ्य छिपाया कि वह पाकिस्तानी नागरिक रह चुकी है और भारत में उसकी नागरिकता की स्थिति स्पष्ट नहीं थी। यह मामला अब सामने आने के बाद प्रशासन और शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
एलआईयू जांच के बाद हुई बर्खास्तगी
लोकल इंटेलिजेंस यूनिट द्वारा की गई विस्तृत जांच के बाद संबंधित शिक्षिका को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। जांच रिपोर्ट में उसके दस्तावेजों, नागरिकता से जुड़े तथ्यों और पुराने रिकॉर्ड की समीक्षा की गई, जिसके बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि उसने अपनी पहचान और नागरिकता से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई थी।
इसके बाद राज्य सरकार के निर्देश पर बेसिक शिक्षा अधिकारी ने अजीमनगर थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू की।
प्रशासन और पुलिस की अगली कार्रवाई
डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने कहा कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या नियुक्ति के समय दस्तावेजों की सही तरीके से जांच हुई थी या नहीं, और क्या इस पूरे प्रकरण में किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत रही है।
प्रशासन का कहना है कि यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति या अधिकारी की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं, पुलिस आरोपी महिला से जुड़े पुराने रिकॉर्ड, वीजा दस्तावेजों और नागरिकता से संबंधित कागजातों की भी गहनता से जांच कर रही है।
संवेदनशील मामला, कानून के दायरे में कार्रवाई
रामपुर का यह मामला नागरिकता, राष्ट्रीय सुरक्षा और सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता से जुड़ा होने के कारण बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। प्रशासन ने साफ किया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और तथ्यों के आधार पर ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
फिलहाल, मामला जांच के अधीन है और पुलिस व प्रशासनिक एजेंसियां सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए आगे की कार्रवाई कर रही हैं। जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों से बचें और जांच पूरी होने तक संयम बनाए रखें।





