पश्चिमी यूपी में 15 हजार क्षमता वाला डिटेंशन सेंटर मॉडल तैयार, सुरक्षा के लिए बायोमेट्रिक और CCTV सिस्टम से लैस

A model detention centre with a capacity of 15000 people is ready in western Uttar Pradesh

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पश्चिमी यूपी में 15 हजार क्षमता वाला डिटेंशन सेंटर मॉडल तैयार, सुरक्षा के लिए बायोमेट्रिक और CCTV सिस्टम से लैस

लखनऊ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अवैध घुसपैठियों और रोहिंग्या शरणार्थियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर डिटेंशन सेंटर स्थापित करने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। इस कड़ी में 15 हजार लोगों की क्षमता वाले डिटेंशन सेंटर का पहला मॉडल अब सामने आ गया है। यह मॉडल सिर्फ एक संरचनात्मक खाका भर नहीं, बल्कि भविष्य में बनने वाले सभी डिटेंशन सेंटरों की दिशा और दशा तय करने वाला मानक दस्तावेज माना जा रहा है।

गृह विभाग को भेजे गए इस विस्तृत मॉडल में सुरक्षा, तकनीक और प्रशासनिक नियंत्रण के तीन प्रमुख स्तंभों पर खास जोर दिया गया है। पश्चिमी यूपी के मंडलायुक्त ने इसे राज्य सरकार के सामने प्रस्तुत किया है और आगे की समीक्षा के लिए गृह विभाग को भेजा गया है। मॉडल की स्वीकृति के बाद राज्य के 17 नगर निकायों में ऐसे ही सेंटर विकसित करने की तैयारी है।

15 हजार लोगों की क्षमता, अत्याधुनिक तकनीक होगी आधार

प्रस्तुत मॉडल के अनुसार, प्रस्तावित डिटेंशन सेंटर की क्षमता 15 हजार लोगों की होगी, जो देश में बनाए जा रहे सबसे बड़े डिटेंशन परिसरों में से एक होगा। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, बढ़ती अवैध घुसपैठ, विशेषकर रोहिंग्या शरणार्थियों की संख्या को देखते हुए बड़े आकार और सुरक्षित ढांचे की आवश्यकता महसूस की गई थी। सेंटर का संपूर्ण संचालन अत्याधुनिक तकनीक के आधार पर चलेगा। इसमें बायोमेट्रिक सिस्टम, हाई-रिजॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे, फेस रिकॉग्निशन और थंब इंप्रेशन आधारित प्रवेश व्यवस्था जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल की गई हैं। मॉडल के अनुसार, कोई भी व्यक्ति बिना डिटेंशन सेंटर के कंट्रोल रूम से जारी किए गए “ग्रीन सिग्नल” के भीतर प्रवेश नहीं कर सकेगा। इस व्यवस्था को त्रिस्तरीय सुरक्षा कवच के रूप में विकसित किया गया है—पहला स्तर परिसर की बाहरी सुरक्षा, दूसरा भवन परिसर की निगरानी और तीसरा स्तर आंतरिक सुरक्षा संचालन को नियंत्रित करेगा।

केंद्रीय सुरक्षा बल की मांग, 50 जवान होंगे तैनात

मंडलायुक्त ने सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए डिटेंशन सेंटर में केंद्रीय सुरक्षा बल की स्थायी तैनाती की सिफारिश की है। मॉडल में 50 जवानों की एक स्थायी कंपनी की तैनाती का प्रस्ताव है, जो चौबीसों घंटे सुरक्षा की निगरानी करेगी। इसके अलावा स्थानीय पुलिस और खुफिया इकाइयों को भी निगरानी और समन्वय के लिए जोड़ा जाएगा। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पैमाने पर कैदियों या निरुद्ध व्यक्तियों को रखने वाली संरचनाओं में आंतरिक अनुशासन और बाहरी सुरक्षा दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए, डिटेंशन सेंटर में तकनीक और मानव संसाधन का संयुक्त मॉडल सुरक्षा प्रबंधन को मजबूत करेगा।

महिला और पुरुष अलग-अलग, लेकिन एक ही परिसर

डेमो मॉडल में पुरुष और महिलाओं को एक ही परिसर में रखने की योजना दिखाई गई है, लेकिन दोनों के लिए पूरी तरह अलग सुरक्षा व्यवस्था और अलग रहने की सुविधा का प्रावधान रखा गया है। महिलाओं के लिए अलग ब्लॉक, मेडिकेयर यूनिट, किचन और मनोरंजन सुविधा की योजना बनाई गई है। मंडलायुक्त के अनुसार, डिटेंशन सेंटर सिर्फ हिरासत के लिए नहीं होगा, बल्कि वहां रहने वाले लोगों की बुनियादी जरूरतें भी ध्यान में रखी जाएंगी। इसके तहत स्वास्थ्य केंद्र, भोजन की सुविधा, स्वच्छता प्रबंधन और बच्चों के लिए बेसिक सुविधा केंद्र बनाए जाएंगे।

17 नगर निकायों में डिटेंशन सेंटर की योजना

गृह विभाग द्वारा मॉडल की विस्तृत समीक्षा के बाद इसे अंतिम मंजूरी दिए जाने की संभावना है। इसके बाद प्रदेश के 17 बड़े नगर निकायों में इसी तरह के सेंटर स्थापित करने की योजना है। जहां घुसपैठियों की संख्या अधिक होगी, वहां एक से अधिक सेंटर भी बनाए जा सकते हैं। योगी सरकार ने हाल के महीनों में अवैध घुसपैठ और रोहिंग्या गतिविधियों को लेकर चिंता जताई है। कई जिलों में पुलिस और खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद माना जा रहा है कि यह सेंटर प्रवासियों की पहचान, उनकी निगरानी और उन्हें नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यह पहल प्रदेश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ा कदम साबित होगी। इस सेंटर के निर्माण से अवैध प्रवासियों की पहचान और उनकी निगरानी स्पष्ट रूप से संभव हो सकेगी। विशेषज्ञों की राय में, ऐसे डिटेंशन सेंटर राज्य की सुरक्षा रणनीति को आधुनिक रूप देंगे। हाई-टेक निगरानी प्रणाली, केंद्रीकृत कंट्रोल रूम और केंद्रीय सुरक्षा बल की तैनाती से यह सेंटर किसी भी आपात स्थिति में तेज और प्रभावी प्रतिक्रिया देने में सक्षम होंगे। अधिकारियों का कहना है कि यह मॉडल आने वाले वर्षों में पूरे प्रदेश के लिए एक मानक बनेगा और अवैध घुसपैठ पर रोक लगाने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

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