धनतेरस के साथ ही पांच दिवसीय दीपावली पर्व की शुरुआत हो जाती है। हिंदू धर्म में धनतेरस का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन लोग भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर की पूजा करते हैं। इसके साथ ही घर में दीपक जलाकर सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर 13 दीपक जलाने का विशेष विधान है। मान्यता है कि अलग-अलग स्थानों पर 13 दीपक जलाने से घर में सकारात्मकता आती है और मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।
हिंदू धर्म में 11, 21, 51, 101 और 108 जैसी संख्याओं को शुभ माना जाता है। इसी तरह धनतेरस पर 13 दीपक जलाने की परंपरा भी विशेष मानी जाती है। पंचांग के अनुसार, महीने की 13वीं तिथि को त्रयोदशी कहा जाता है। धनतेरस कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाई जाती है। इसी कारण इस दिन 13 दीपक जलाने का धार्मिक महत्व बताया गया है। इस साल धनतेरस 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। आइए जानते हैं कि इस दिन 13 दीपक किन-किन स्थानों पर जलाने की मान्यता है।
घर के मुख्य द्वार पर जलाएं पहला दीपक
धनतेरस पर पहला दीपक सूर्यास्त के बाद घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर जलाने की परंपरा है। इसे यम दीपक कहा जाता है। मान्यता है कि सरसों के तेल का यह दीपक जलाने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।
मां लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि के सामने
दूसरा दीपक माता लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि के सामने जलाना चाहिए। भगवान धन्वंतरि को आरोग्य का देवता माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यहां दीपक जलाने से घर में धन-धान्य और अच्छे स्वास्थ्य की कामना पूरी होती है।
तुलसी के पौधे के पास
तीसरा दीपक तुलसी के पौधे के पास जलाने की परंपरा है। तुलसी को माता लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। इस स्थान पर दीपक जलाकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
घर के मुख्य द्वार के ठीक सामने
चौथा दीपक घर के मुख्य द्वार के बाहर जलाया जाता है। मान्यता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है।
घर की छत या खुले स्थान पर
पांचवां दीपक छत या घर के किसी खुले स्थान पर जलाया जाता है। इसे आकाशदीप कहा जाता है। धार्मिक परंपरा में इसे आकाश को समर्पित दीपक माना गया है।
पीपल के पेड़ के नीचे
छठा दीपक पीपल के पेड़ के नीचे जलाने की मान्यता है। इसे पितरों को समर्पित माना जाता है। मान्यता के अनुसार, ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
मंदिर में जलाएं सातवां दीपक
सातवां दीपक किसी मंदिर में जलाना चाहिए। मान्यता है कि मंदिर में दीपदान करने से देवी-देवताओं का आशीर्वाद मिलता है और जीवन में सकारात्मकता आती है।
कचरे या गोबर एकत्रित होने वाले स्थान पर
आठवां दीपक कचरे के पास जलाने की परंपरा बताई गई है। गांवों में इसे गोबर एकत्रित होने वाली जगह पर जलाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इससे नकारात्मकता दूर होती है।
शौचालय या बाथरूम के बाहर
नौवां दीपक शौचालय या बाथरूम के बाहर जलाने का विधान बताया गया है। मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
बालकनी या गैलरी में
दसवां दीपक घर की बालकनी में जलाया जाता है। यदि घर में बालकनी नहीं है तो इसे गैलरी में भी रखा जा सकता है।
मुख्य खिड़की के पास
ग्यारहवां दीपक घर की किसी प्रमुख खिड़की के पास रखा जाता है, जहां से घर में रोशनी आती हो। इस स्थान पर दीपक जलाने की भी परंपरा बताई गई है।
घर के पिछले हिस्से में
बारहवां दीपक घर के पिछले हिस्से में जलाया जाता है। इसे ऐसी जगह रखने की मान्यता है, जहां लोगों का आना-जाना कम हो या अंधेरा रहता हो।
रसोईघर में जलाएं तेरहवां दीपक
तेरहवां दीपक रसोईघर में जलाया जाता है। इसे उस स्थान पर भी रखा जा सकता है, जहां पानी की टंकी हो। इस तरह धनतेरस पर 13 अलग-अलग स्थानों पर दीपक जलाने की परंपरा बताई गई है।
धनतेरस पर दीपदान का शुभ मुहूर्त
पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, धनतेरस पर पूजा और दीपदान के लिए प्रदोष काल को उत्तम माना जाता है। इस साल 6 नवंबर को दीपदान का प्रदोष मुहूर्त शाम 5:33 बजे से रात 8:09 बजे तक रहेगा। वहीं, यम दीपदान का समय शाम 5:33 बजे से शाम 6:51 बजे तक बताया गया है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। इसकी पूर्ण सत्यता या सटीकता का दावा नहीं किया जाता। किसी भी धार्मिक विधि या मुहूर्त के लिए संबंधित क्षेत्र के जानकार विशेषज्ञ से सलाह लें।





