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3 नवंबर 2026 को देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। तेल कंपनियों ने सुबह 6 बजे नए भाव जारी किए और देश के ज्यादातर शहरों में कीमतें पहले की तरह स्थिर बनी हुई हैं। लेकिन आज पेट्रोल-डीजल के बाजार में सबसे बड़ा सवाल कीमतों का स्थिर रहना नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट का है।
दरअसल, ब्रेंट क्रूड जो एक समय 117 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, अब गिरकर करीब 104.54 डॉलर पर आ गया है। यानी कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 12 डॉलर से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। सामान्य तौर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का फायदा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत के रूप में मिलना चाहिए। लेकिन भारतीय उपभोक्ताओं को फिलहाल इसका सीधा लाभ मिलता दिखाई नहीं दे रहा।
भोपाल और मध्य प्रदेश में क्या है स्थिति?
मध्य प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें देश के कई दूसरे राज्यों के मुकाबले अब भी ऊंचे स्तर पर हैं।
भोपाल में पेट्रोल की कीमत अलग-अलग उपलब्ध दरों में 114.36 से 114.54 रुपये प्रति लीटर बताई गई है। वहीं डीजल की कीमत को लेकर भी अलग-अलग स्रोतों में 99.48 से 99.64 रुपये प्रति लीटर का अंतर दिखाई दे रहा है।
मध्य प्रदेश में पेट्रोल का औसत भाव करीब 115.38 रुपये और डीजल का औसत भाव 100.51 रुपये प्रति लीटर के आसपास बताया जा रहा है।
यानी मध्य प्रदेश में वाहन चालकों को ईंधन के लिए अब भी बड़ी रकम खर्च करनी पड़ रही है।
देश के बड़े शहरों में पेट्रोल-डीजल के भाव
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दिल्ली में पेट्रोल 102.12 और डीजल 95.20 रुपये।
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मुंबई में पेट्रोल 111.21 और डीजल 97.83 रुपये।
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कोलकाता में पेट्रोल 113.51 और डीजल 99.82 रुपये।
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चेन्नई में पेट्रोल 107.76 और डीजल 99.55 रुपये।
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बेंगलुरु में पेट्रोल 111.68 और डीजल 99.56 रुपये।
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हैदराबाद में पेट्रोल 116.15 और डीजल 104.23 रुपये।
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लखनऊ में पेट्रोल 101.89 और डीजल 95.36 रुपये।
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पटना में पेट्रोल 113.37 और डीजल 99.36 रुपये।
इन आंकड़ों से साफ है कि अलग-अलग राज्यों में ईंधन की कीमतों का अंतर काफी बड़ा है।
कच्चा तेल सस्ता, फिर पेट्रोल महंगा क्यों?
इसका जवाब केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार में नहीं, बल्कि देश के भीतर लागू कर व्यवस्था में भी छिपा है।
भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और आयात लागत पेट्रोल-डीजल की कीमतों को प्रभावित करती है।
लेकिन खुदरा कीमत तय करने में केंद्र का उत्पाद शुल्क, राज्य सरकारों का मूल्य वर्धित कर यानी वैट और डीलर कमीशन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद पेट्रोल पंप पर कीमतों में तत्काल गिरावट जरूरी नहीं है।
आम आदमी को राहत कब मिलेगी?
पेट्रोल-डीजल की कीमतें केवल वाहन चालकों का बजट नहीं बिगाड़तीं, बल्कि इनका सीधा असर महंगाई पर भी पड़ता है।
डीजल महंगा होने से माल ढुलाई की लागत बढ़ती है। इसका असर सब्जियों, खाद्यान्न, दूध और रोजमर्रा की जरूरतों की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है।
दूसरी तरफ कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट सरकार और तेल कंपनियों के लिए राहत का अवसर पैदा करती है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें लंबे समय तक नीचे बनी रहती हैं और आयात लागत में कमी आती है, तो भविष्य में उपभोक्ताओं को राहत देने की गुंजाइश बन सकती है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 117 डॉलर से गिरकर 104.54 डॉलर पर आ चुका है, तो भारतीय उपभोक्ताओं को इसका फायदा कब मिलेगा?
फिलहाल 3 नवंबर को पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर हैं। लेकिन आम आदमी की निगाहें अब तेल कंपनियों और सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं। क्योंकि कच्चे तेल की गिरावट का असली फायदा तभी माना जाएगा, जब इसका असर पेट्रोल पंप पर दिखाई देगा।
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