एक तरफ नशे की गिरफ्त से जिंदगी बचाने का दावा, दूसरी तरफ उसी नशा मुक्ति केंद्र में एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत। मौत की खबर फैली तो केंद्र में ऐसा हड़कंप मचा कि दर्जनों मरीज परिसर छोड़कर भाग निकले। किसी ने मुख्य द्वार का रास्ता पकड़ा तो कोई दीवार और गेट फांदकर फरार हो गया। इंदौर की इस घटना ने नशा मुक्ति केंद्रों की सुरक्षा, निगरानी और मरीजों के साथ किए जा रहे व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इंदौर के रावजी बाजार थाना क्षेत्र में अग्रसेन चौराहे के पास संचालित पहचान नशा मुक्ति केंद्र में 24 वर्षीय सचिन लोधी की मौत के बाद अफरा-तफरी फैल गई। शुरुआती जानकारी में 70 से अधिक मरीजों के भागने की बात सामने आई, लेकिन उपस्थिति रजिस्टर की जांच के बाद पुलिस ने करीब 45 मरीजों के फरार होने की पुष्टि की। इस घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें मरीज केंद्र का गेट पार करते दिखाई दे रहे हैं।
वॉशरूम में मिला युवक का शव
जानकारी के मुताबिक, सचिन सुबह नहाने की बात कहकर वॉशरूम गया था। काफी देर तक बाहर नहीं आने पर सुरक्षा गार्ड को संदेह हुआ। करीब एक घंटे बाद दरवाजा तोड़कर देखा गया तो सचिन फंदे पर लटका मिला। उसे तत्काल नीचे उतारकर एमवाय अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
सचिन की मौत के बाद केंद्र में मौजूद मरीजों के बीच घबराहट फैल गई। देखते ही देखते वहां भगदड़ जैसी स्थिति बन गई और बड़ी संख्या में मरीज केंद्र छोड़कर निकल गए।
परिजनों ने प्रबंधन पर लगाए गंभीर आरोप
मृतक के जीजा केशव लोधी के मुताबिक, सचिन को करीब एक महीने तीन दिन पहले केंद्र में भर्ती कराया गया था। घटना वाले दिन ही परिजनों ने केंद्र में पैसे जमा किए थे। लेकिन कुछ ही देर बाद उन्हें सचिन की मौत की सूचना मिली।
परिजनों का सवाल है कि आखिर एक घंटे तक युवक वॉशरूम में बंद रहा तो किसी की नजर उस पर क्यों नहीं पड़ी? मरीजों की नियमित निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी? क्या केंद्र में पर्याप्त सुरक्षाकर्मी मौजूद थे? इन सवालों के जवाब अब जांच के दायरे में हैं।
70 से 45 तक कैसे पहुंची फरार मरीजों की संख्या?
घटना के तत्काल बाद 70 से अधिक मरीजों के भागने की सूचना सामने आई थी। लेकिन पुलिस ने केंद्र के उपस्थिति रजिस्टर की जांच के बाद करीब 45 मरीजों के फरार होने की पुष्टि की है।
कई मरीजों के अपने घर पहुंचने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस केंद्र संचालकों से मरीजों के पते और अन्य जानकारियां जुटा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि सभी मरीज सुरक्षित हैं या नहीं।
यहां एक बड़ा सवाल यह भी है कि जिन लोगों को नशे की लत से बाहर निकालने और उनका उपचार करने के लिए केंद्र में रखा गया था, वे एक साथ इतनी बड़ी संख्या में आखिर कैसे बाहर निकल गए?
नशा मुक्ति केंद्र या लापरवाही का ठिकाना?
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे गंभीर पहलू यही है कि नशे की लत से जूझ रहे लोगों को उपचार के साथ सुरक्षित वातावरण और निरंतर देखभाल की जरूरत होती है। ऐसे केंद्रों में चिकित्सकीय निगरानी, प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता, आपातकालीन व्यवस्था और मरीजों की नियमित देखरेख बेहद महत्वपूर्ण है।
लेकिन इंदौर की घटना ने इन व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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एक युवक की मौत के बाद केंद्र में अफरा-तफरी क्यों मची?
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मरीजों की निगरानी के लिए क्या पर्याप्त कर्मचारी थे?
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एक साथ 45 मरीज केंद्र से कैसे फरार हो गए?
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क्या केंद्र में आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था मौजूद थी?
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मरीजों को भर्ती करने से लेकर उनकी देखभाल तक कौन निगरानी करता है?
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क्या केंद्र के संचालन और उपचार संबंधी व्यवस्थाओं की नियमित जांच होती थी?
पुलिस जांच में सामने आएंगे अहम तथ्य
रावजी बाजार थाना पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। केंद्र के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। पुलिस युवक की मौत के कारणों, केंद्र की सुरक्षा व्यवस्था और मरीजों के फरार होने की परिस्थितियों की जांच कर रही है। परिजनों की ओर से लगाए गए लापरवाही के आरोपों की भी जांच जरूरी है।
सबसे बड़ा सवाल: जिंदगी बचाने वाले केंद्र में जिंदगी सुरक्षित क्यों नहीं?
इंदौर की यह घटना सिर्फ एक युवक की मौत और दर्जनों मरीजों के भागने तक सीमित नहीं है। यह उन तमाम नशा मुक्ति केंद्रों की कार्यप्रणाली पर सवाल है, जहां परिवार अपने बच्चों और अपनों को बेहतर जिंदगी की उम्मीद में भर्ती कराते हैं।
परिवार भरोसा करता है कि उसका अपना व्यक्ति यहां सुरक्षित रहेगा, उसका इलाज होगा और वह नशे की गिरफ्त से बाहर निकलकर सामान्य जीवन में लौटेगा। लेकिन जब ऐसे ही केंद्र में एक युवक की मौत हो जाए और उसके बाद दर्जनों मरीज फरार हो जाएं, तो उस भरोसे पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
नशे की लत एक बीमारी है, उसका उपचार संवेदनशीलता और जिम्मेदारी मांगता है। नशा मुक्ति केंद्रों को सिर्फ मरीजों को भर्ती करने की जगह नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी बचाने और उन्हें नया जीवन देने वाली व्यवस्था बनना होगा। अब देखना होगा कि सचिन की मौत की जांच में क्या सामने आता है और क्या इस घटना के बाद नशा मुक्ति केंद्रों की निगरानी व्यवस्था को लेकर कोई ठोस कार्रवाई होती है।





