पेट्रोल डीजल के दाम: क्रूड ऑयल के दाम में उतार-चढ़ाव, राहत अब भी दूर
मध्य प्रदेश में पेट्रोल की कीमतों का छह महीने का रुझान बता रहा है कि मामूली गिरावट के बावजूद आम आदमी को महंगे ईंधन से राहत नहीं मिली है। अप्रैल में पेट्रोल लगभग 107 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर था, लेकिन मई से कीमतों में तेज उछाल आया। जून और जुलाई में दाम 116 रुपये के आसपास पहुंच गए। अगस्त में भी कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव दर्ज हुआ, जबकि सितंबर और अक्टूबर में पेट्रोल के दाम अपेक्षाकृत स्थिर दिखाई दिए।
28 अक्टूबर 2026 को मध्य प्रदेश में पेट्रोल की कीमत 114.85 रुपये प्रति लीटर रही। इस दिन कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ। अक्टूबर में अब तक पेट्रोल का अधिकतम भाव 116.03 रुपये और न्यूनतम भाव 114.64 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया। यानी कीमतों में कुछ नरमी जरूर आई है, लेकिन पेट्रोल अब भी आम उपभोक्ता की जेब पर भारी पड़ रहा है।
अप्रैल से अक्टूबर तक कीमतों का पूरा गणित
अप्रैल 2026 में पेट्रोल की कीमत 1 अप्रैल को 107.78 रुपये प्रति लीटर थी और महीने के अंत में 107.75 रुपये रही। इस दौरान कीमत 6 अप्रैल को घटकर 106.54 रुपये तक पहुंची। महीने का रुझान मामूली गिरावट का रहा।
लेकिन मई में तस्वीर बदल गई। महीने की शुरुआत 107.38 रुपये प्रति लीटर से हुई और 31 मई तक कीमत बढ़कर 115.39 रुपये हो गई। मई में अधिकतम भाव 115.64 रुपये दर्ज किया गया। एक महीने के भीतर लगभग आठ रुपये की बढ़ोतरी ने ईंधन की महंगाई को फिर चर्चा में ला दिया।
जून में पेट्रोल 115.39 रुपये से बढ़कर महीने के अंत तक 116.03 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया। जुलाई में भी कीमतों का अधिकतम स्तर 116.03 रुपये रहा। इन दोनों महीनों में पेट्रोल लगातार महंगे स्तर पर बना रहा।
अगस्त में आंकड़ों के अनुसार, महीने की शुरुआत में पेट्रोल 101.63 रुपये प्रति लीटर था और 31 अगस्त तक बढ़कर 114.82 रुपये हो गया। सितंबर में कीमत 1 तारीख को 114.94 रुपये थी और महीने के अंत में मामूली गिरावट के साथ 114.85 रुपये दर्ज की गई।
अक्टूबर में भी यही स्थिति बनी हुई है। कीमतों में सीमित उतार-चढ़ाव है, लेकिन उपभोक्ता को बड़ी राहत नहीं मिली है।
आम आदमी की जेब पर कितना असर?
पेट्रोल की कीमत में बढ़ोतरी का असर केवल वाहन चलाने वालों तक सीमित नहीं रहता। इससे माल ढुलाई, परिवहन सेवाओं और रोजमर्रा की वस्तुओं की लागत पर भी दबाव पड़ सकता है। हालांकि, पेट्रोल की कीमतों में बदलाव का महंगाई पर वास्तविक असर दूसरे कारकों पर भी निर्भर करता है।
आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में पेट्रोल का न्यूनतम भाव 106.54 रुपये था, जबकि 28 अक्टूबर को कीमत 114.85 रुपये प्रति लीटर रही। यानी दोनों स्तरों के बीच 8.31 रुपये प्रति लीटर का अंतर है। एक आम उपभोक्ता के लिए यह मामूली अंतर नहीं है।
उदाहरण के तौर पर, 40 लीटर पेट्रोल भरवाने पर अप्रैल के न्यूनतम भाव की तुलना में अब करीब 332 रुपये अधिक खर्च होंगे। यह तुलना अलग-अलग तारीखों की कीमतों पर आधारित है, इसलिए इसे वास्तविक मासिक खर्च में हुई वृद्धि नहीं माना जाना चाहिए।
क्या आने वाले दिनों में मिलेगी राहत?
पेट्रोल की कीमतों का आगे का रुख अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की विनिमय दर, केंद्र और राज्य के करों तथा तेल विपणन कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति पर निर्भर करेगा। केवल मौजूदा कीमतों के स्थिर रहने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि निकट भविष्य में पेट्रोल सस्ता हो जाएगा।
यहां एक महत्वपूर्ण बात भी ध्यान देने वाली है। जुलाई और अगस्त के दिए गए आंकड़ों में कुछ असामान्य उतार-चढ़ाव हैं। जुलाई में 30 तारीख को 101.63 रुपये और अगले ही दिन 116.03 रुपये का भाव बताया गया है। अगस्त में भी शुरुआत में 101.63 रुपये से कुछ ही दिनों में 116 रुपये से अधिक कीमत दर्ज होने का उल्लेख है। इन बदलावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। इसलिए इन महीनों के आंकड़ों को अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले सत्यापित किया जाना चाहिए।
मध्य प्रदेश में पेट्रोल की कीमतें फिलहाल 115 रुपये प्रति लीटर के आसपास बनी हुई हैं। मई में आई तेज बढ़ोतरी के बाद उपभोक्ताओं को अब तक कोई बड़ी राहत नहीं मिली है। सितंबर और अक्टूबर की स्थिरता ने कीमतों में तेजी को जरूर थामा है, लेकिन पेट्रोल को सस्ता करने वाली कोई निर्णायक तस्वीर अभी सामने नहीं आती। आम आदमी की निगाह अब इस बात पर है कि आने वाले दिनों में कीमतों में वास्तविक कटौती होती है या महंगे ईंधन का बोझ इसी तरह बना रहता है।





