प्रेरणादायक कहानी | संघर्ष, धैर्य और सफलता
कहते हैं, मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है… पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के उत्तम कुमार तिवारी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। कभी आईआईटी में दाखिले का सपना टूटा, कभी नौकरी के लिए संघर्ष करना पड़ा, कभी समाज के ताने सुनने पड़े… और फिर एक-दो नहीं, बल्कि 13 बार अलग-अलग परीक्षाओं में असफलता का सामना करना पड़ा। लेकिन उत्तम ने हार मानने के बजाय हर नाकामी से सबक लिया। आखिरकार, उनकी मेहनत रंग लाई और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 24वीं रैंक हासिल कर वे उपजिलाधिकारी यानी एसडीएम बने। यह कहानी सिर्फ एक परीक्षा में सफल होने की नहीं, बल्कि बार-बार गिरकर फिर उठ खड़े होने के जज्बे की है।
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13 बार असफल, फिर भी नहीं मानी हार
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पिता की जमा-पूंजी से शुरू हुआ सपना
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10 हजार की नौकरी, लोगों के ताने
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छह बार पीसीएस मुख्य परीक्षा में प्रयास
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पांच बार साक्षात्कार में मिली निराशा
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यूपी पीसीएस में 24वीं रैंक
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संघर्ष से एसडीएम बनने तक का सफर
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असफलता अंत नहीं, नई शुरुआत है
सपनों की शुरुआत और पहला झटका
प्रतापगढ़ के एक साधारण परिवार में जन्मे उत्तम कुमार तिवारी के पिता सिविल कोर्ट में लिपिक थे। बेटे के बेहतर भविष्य के लिए पिता ने अपनी जमा-पूंजी में से करीब 42 हजार रुपये उसकी आईआईटी की तैयारी पर खर्च किए। लेकिन हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने के बाद अंग्रेजी माध्यम के माहौल में खुद को ढालना उनके लिए चुनौती बन गया। आईआईटी में दाखिले का सपना पूरा नहीं हुआ, मगर उन्होंने अपने सपनों को मरने नहीं दिया।
दस हजार की नौकरी और समाज के ताने
इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद भी उत्तम को मनचाही नौकरी नहीं मिली। आखिरकार, उन्होंने एक कॉलेज में महज दस हजार रुपये महीने की नौकरी शुरू की। जिस पढ़ाई पर परिवार ने अपनी जमा-पूंजी लगा दी थी, उसके बाद इतनी कम तनख्वाह पर काम करने को लेकर उन्हें ताने भी सुनने पड़े। लेकिन उत्तम ने दूसरों की बातों को अपनी मंजिल के रास्ते की दीवार नहीं बनने दिया। नौकरी के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी।
13 असफलताएं, लेकिन हौसला बरकरार
उत्तम के संघर्ष का सबसे कठिन दौर वह था, जब लगातार प्रयासों के बावजूद सफलता उनसे दूर रही। उन्होंने पांच बार एसएसबी साक्षात्कार दिया, तीन बार संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में प्रयास किया और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की पीसीएस परीक्षा में भी कई बार असफलता का सामना किया। छह बार मुख्य परीक्षा लिखने और पांच बार साक्षात्कार में सफलता से चूकने के बाद भी उन्होंने तैयारी नहीं छोड़ी। हर असफलता ने उन्हें अपनी कमियों को पहचानने और खुद को बेहतर बनाने का मौका दिया।
आखिरकार मेहनत लाई रंग
लंबे संघर्ष और लगातार प्रयासों के बाद उत्तम कुमार तिवारी ने उत्तर प्रदेश पीसीएस परीक्षा में 24वीं रैंक हासिल की और उपजिलाधिकारी के पद पर चयनित हुए। आज वे उत्तर प्रदेश के जालौन जिले की उरई सदर तहसील में एसडीएम के रूप में कार्यरत हैं। कभी जिनके सामने भाषा की चुनौती थी, नौकरी का संकट था और समाज के ताने थे, आज उनकी कहानी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए प्रेरणा का उदाहरण बन गई है।
उत्तम कुमार तिवारी की कहानी हमें एक बड़ी सीख देती है… असफलता आपकी पहचान नहीं है, बल्कि असफलता के बाद आप क्या करते हैं, यही आपकी पहचान बनती है। तेरह बार नाकामी, बार-बार टूटती उम्मीदें और समाज के ताने भी उनके हौसले को नहीं डिगा सके। याद रखिए, सफलता का रास्ता हमेशा सीधा नहीं होता… कभी-कभी मंजिल तक पहुंचने के लिए कई बार गिरना और फिर उठना पड़ता है। इसलिए अगर आप भी किसी परीक्षा में असफल हुए हैं, तो अपने सपनों को अलविदा मत कहिए। हो सकता है, आपकी अगली कोशिश ही आपकी जिंदगी की सबसे बड़ी सफलता बन जाए।





