भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को कारोबार शुरू होने के बाद जोरदार तेजी देखने को मिली। सुबह 10:50 बजे तक 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,119.43 अंक यानी 1.54 प्रतिशत चढ़कर 73,901.32 पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 50 में 319.20 अंकों यानी 1.41 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई और यह 22,942.05 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में इस तेजी के पीछे आईटी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, रुपये में मजबूती और साप्ताहिक एक्सपायरी के दौरान ट्रेडिंग गतिविधियों को अहम कारण माना जा रहा है। हालांकि, ये आंकड़े सुबह 10:50 बजे तक के हैं, इसलिए इन्हें बाजार के अंतिम बंद स्तर के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
आईटी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी से बाजार में लौटा निवेशकों का भरोसा
शेयर बाजार में तेजी का एक प्रमुख कारण आईटी सेक्टर के शेयरों में लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में दिखाई दी मजबूती रही। टीसीएस, इंफोसिस, एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा जैसे शेयरों में खरीदारी से बाजार की धारणा को सहारा मिला। कंपनियों के कमाई संबंधी आंकड़ों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में आई गिरावट के बाद निवेशकों की रणनीति में बदलाव की उम्मीद भी जताई जा रही है। बाजार रणनीतिकार वीके विजयकुमार के मुताबिक, AI शेयरों में करेक्शन भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक साबित हो सकता है। यदि विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों में अपनी बिकवाली कम करते हैं, तो बाजार को अतिरिक्त मजबूती मिल सकती है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारतीय अर्थव्यवस्था को मिल सकती है राहत
अंतरराष्ट्रीय बाजार में गुरुवार को कच्चे तेल के दाम एक डॉलर से ज्यादा नीचे आए। ब्रेंट क्रूड का वायदा भाव 1.76 डॉलर यानी 1.75 प्रतिशत गिरकर 104 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी WTI क्रूड 1.02 डॉलर यानी 1.07 प्रतिशत फिसलकर 94.07 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है, इसलिए तेल सस्ता होने से आयात बिल, परिवहन लागत और कंपनियों के खर्च पर दबाव कम हो सकता है। हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही से जुड़े जोखिम अभी भी बने हुए हैं। तेल की कीमतों में आगे उतार-चढ़ाव बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकता है।
डॉलर कमजोर होने के बीच रुपये में मजबूती से बाजार को मिला सहारा
विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये ने भी मजबूती दिखाई। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.2 प्रतिशत मजबूत होकर 94.92 प्रति डॉलर पर खुला, जबकि पिछला बंद स्तर 95.15 था। डॉलर में कमजोरी आने से रुपये को सहारा मिला। रुपये की मजबूती से आयात करने वाली कंपनियों को राहत मिल सकती है और विदेशी भुगतान की लागत पर दबाव कम हो सकता है। हालांकि, मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। रुपये की अगली चाल वैश्विक डॉलर की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी।
सेंसेक्स की साप्ताहिक एक्सपायरी से कारोबार में बढ़ सकती है हलचल
15 अक्टूबर को सेंसेक्स की साप्ताहिक एक्सपायरी भी बाजार की गतिविधियों को प्रभावित कर रही है। एक्सपायरी के दौरान ट्रेडर अपने फ्यूचर्स और ऑप्शंस सौदों को बंद करते हैं या अगली अवधि के लिए आगे बढ़ाते हैं। इस दौरान शॉर्ट कवरिंग होने पर सूचकांकों में तेजी आ सकती है, जबकि मुनाफावसूली या नई बिकवाली से बाजार पर दबाव बन सकता है। इसलिए शुरुआती तेजी को पूरे दिन की दिशा का पक्का संकेत नहीं माना जा सकता। निवेशकों को कारोबार के दौरान होने वाले बदलावों पर नजर रखनी चाहिए।
5. आगे बाजार की दिशा किन संकेतों पर निर्भर करेगी और निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
बाजार में आई तेजी के बावजूद निवेशकों की नजर आईटी कंपनियों के प्रदर्शन, बैंकिंग और वित्तीय कंपनियों के तिमाही नतीजों, विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री तथा कच्चे तेल की कीमतों पर बनी रहेगी। बाजार रणनीतिकारों को उम्मीद है कि मजबूत कॉरपोरेट नतीजे बाजार को समर्थन दे सकते हैं। वहीं, लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स यानी LTCG टैक्स में संभावित बदलाव को लेकर भी चर्चा है, लेकिन किसी नए फैसले को तय मानना सही नहीं होगा। निवेशकों को केवल एक दिन की तेजी देखकर जल्दबाजी में खरीदारी करने के बजाय अपनी जोखिम क्षमता और निवेश अवधि के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।





