Sunday, October 11, 2026
  • Contact
India News
  • मुख्य समाचार
  • राजनीति
  • संपादक की पसंद
  • शहर और राज्य
    • उत्तर प्रदेश
      • आगरा
      • कानपुर
      • लखनऊ
      • मेरठ
    • छत्तीसगढ
      • जगदलपुर
      • बिलासपुर
      • भिलाई
      • रायपुर
    • दिल्ली
    • बिहार
      • पटना
    • मध्य प्रदेश
      • इंदौर
      • ग्वालियर
      • जबलपुर
      • भोपाल
    • महाराष्ट्र
      • नागपुर
      • नासिको
      • पुणे
      • मुंबई
    • राजस्थान
      • अजमेर
      • कोटा
      • जयपुर
      • जैसलमेर
      • जोधपुर
  • स्टार्टअप
  • कृषि
  • मनोरंजन
  • बिजनेस
  • धर्म
  • ऑटो
  • सरकारी नौकरी
  • वीडियो
No Result
View All Result
India News
Home धर्म

गरबा में मुस्लिम युवाओं की नो एंट्री…मुस्लिम युवाओं को मुफ्ती-मुस्लिम कमेटी की सख्त नसीहत…. गरबा में जाना इस्लाम के लिहाज से हराम है 

DigitalDesk by DigitalDesk
October 11, 2026
in धर्म, स्पेशल
0
Mufti stern advice
0
SHARES
0
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterWhatsapp

नवरात्र के बीच भोपाल के मुफ्ती मोहम्मद गुफरान खान नदवी और मुस्लिम कमेटी का गरबा आयोजनों को लेकर आया बयान धार्मिक परंपराओं, युवाओं की पसंद और सामाजिक मेलजोल पर नई चर्चा को जन्म दे रहा है। सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में मुफ्ती ने मुस्लिम युवाओं को गरबा में शामिल होने से बचने की नसीहत दी है। उन्होंने इसे इस्लाम के लिहाज से हराम बताते हुए दूसरे समुदायों के धार्मिक आयोजनों और रस्मों से दूरी बनाए रखने की अपील की। इसी वीडियो में उन्होंने मस्जिदों के दरवाजे तक पहुंचने वाले दूसरे समुदाय के लोगों का भी जिक्र किया और उनके मस्जिद के भीतर आकर नमाज पढ़ने की कामना की। इस बयान के दो अलग-अलग पहलू हैं। एक तरफ धार्मिक मान्यताओं और अपनी आस्था के अनुरूप जीवन जीने की स्वतंत्रता है, तो दूसरी तरफ विविधता वाले समाज में आपसी संवाद, सांस्कृतिक भागीदारी और सामाजिक संबंधों का सवाल है। ऐसे में बहस केवल गरबा में मुस्लिम युवाओं की भागीदारी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि धार्मिक पहचान को सुरक्षित रखने की अपील और दूसरे समुदायों के प्रति व्यवहार के बीच संतुलन कैसे कायम किया जाए।

गरबा में जाने पर आपत्ति, धार्मिक पहचान का तर्क

मुफ्ती ने अपने बयान में मुस्लिम युवाओं को दूसरे धर्मों के धार्मिक त्योहारों, रस्मों और आयोजनों में भाग लेने से बचने की सलाह दी। उनका तर्क धार्मिक पहचान और परंपराओं के पालन से जुड़ा है। उन्होंने उन युवाओं को विशेष रूप से नसीहत दी, जो दोस्तों के साथ गरबा जैसे आयोजनों में शामिल होते हैं। गरबा नवरात्र के दौरान देवी आराधना से जुड़ा एक प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है। कई जगह इसमें पूजा-अर्चना के साथ पारंपरिक नृत्य और सामुदायिक उत्सव भी होते हैं। इसलिए कुछ धार्मिक विद्वान इसमें भागीदारी को आस्था से जुड़ा विषय मानते हैं, जबकि सामाजिक स्तर पर इसे सांस्कृतिक मेलजोल के रूप में भी देखा जाता है। यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। किसी धार्मिक विद्वान का अपने अनुयायियों को किसी आयोजन में शामिल न होने की सलाह देना उनका धार्मिक दृष्टिकोण है। लेकिन उस दृष्टिकोण को पूरे मुस्लिम समाज की एकमात्र राय मान लेना उचित नहीं होगा। धार्मिक व्याख्याओं, व्यक्तिगत परिस्थितियों और सामाजिक व्यवहार को लेकर अलग-अलग विचार हो सकते हैं।

Related posts

first day of Navratri coincides with International Girl Child Day a message from worshipping the Goddess to the rights of the daughter

नवरात्रि का पहला दिन और अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस का संयोग….देवी की आराधना से बेटी के अधिकारों तक संदेश

October 11, 2026
story about UP Chief Minister Yogi Adityanath Family will touch your heart a sister small shop

दिल छू लेगा यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के परिवार की ये कहानी…बहन की छोटी सी दुकान…एक भाई कर रहा सीमा पर देश की सेवा

October 11, 2026

मस्जिदों के दरवाजे पर दूसरे समुदाय के लोगों का जिक्र क्यों अहम?

मुफ्ती नदवी ने अपने वीडियो में मस्जिदों के प्रवेश द्वार तक पहुंचने वाले दूसरे समुदाय के लोगों का भी उल्लेख किया। उन्होंने दुआ की कि जो लोग वजू और गुसल करके मस्जिद के दरवाजे तक पहुंचे हैं, अल्लाह उन्हें नमाज पढ़ने की तौफीक दे और वे मस्जिद के भीतर आकर इबादत करें। इस टिप्पणी को उनके धार्मिक दृष्टिकोण के दूसरे पहलू के रूप में देखा जा सकता है। गरबा के संदर्भ में उन्होंने मुस्लिम युवाओं को दूसरे धर्म के धार्मिक आयोजन से दूर रहने की सलाह दी, जबकि मस्जिद के संदर्भ में दूसरे समुदाय के लोगों के भीतर आने और नमाज पढ़ने की इच्छा जताई। हालांकि, इस टिप्पणी से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए कि दूसरे समुदाय के लोगों का मस्जिद तक पहुंचना किसी व्यापक सामाजिक बदलाव का प्रमाण है। इसके लिए यह जानना जरूरी होगा कि वे लोग किस उद्देश्य से पहुंचे थे और किस संदर्भ में उनकी आवाजाही हुई। उपलब्ध जानकारी में इन परिस्थितियों का विस्तृत विवरण नहीं है। यहां व्यापक सवाल धार्मिक स्थलों के प्रति जिज्ञासा, संवाद और आपसी समझ का भी है। अलग-अलग समुदायों के धार्मिक स्थलों और परंपराओं को समझने का अवसर सामाजिक सद्भाव को बढ़ा सकता है, बशर्ते इसमें संबंधित धार्मिक स्थल के नियमों और श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान किया जाए।

धार्मिक नसीहत और सामाजिक सद्भाव के बीच संतुलन

भारत जैसे बहुधार्मिक समाज में धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक सद्भाव दोनों का महत्व है। संविधान नागरिकों को अपने धर्म का पालन करने और अपनी आस्था के अनुसार जीवन जीने का अधिकार देता है। साथ ही, सार्वजनिक जीवन में दूसरे नागरिकों के अधिकारों और धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना भी जरूरी है। किसी धार्मिक नेता को अपने अनुयायियों के सामने धार्मिक मान्यताएं रखने और उनके पालन की सलाह देने का अधिकार है। लेकिन ऐसी अपीलों की सामाजिक व्याख्या करते समय यह देखना भी जरूरी है कि उन्हें किसी पूरे समुदाय के विचार के रूप में तो प्रस्तुत नहीं किया जा रहा। गरबा में भागीदारी को लेकर मुफ्ती नदवी की राय उनके धार्मिक दृष्टिकोण को सामने रखती है। इससे व्यापक निष्कर्ष निकालने के बजाय यह समझना जरूरी है कि धार्मिक परंपराओं को लेकर लोगों की मान्यताएं अलग-अलग हो सकती हैं। सामाजिक सौहार्द का अर्थ यह नहीं कि हर व्यक्ति अपनी धार्मिक मान्यता छोड़ दे, बल्कि यह है कि अलग-अलग मान्यताओं के बावजूद आपसी सम्मान बना रहे।

सोशल मीडिया के दौर में बयान का असर

सोशल मीडिया ने धार्मिक नेताओं और सामाजिक संगठनों के बयानों को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाना आसान बना दिया है। लेकिन छोटे वीडियो या चुनिंदा अंशों के माध्यम से सामने आने वाली बातों को उनके पूरे संदर्भ में समझना भी जरूरी है। धार्मिक विषयों पर दिए गए बयान तेजी से चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं। कई बार उनका मूल उद्देश्य धार्मिक मार्गदर्शन होता है, लेकिन सार्वजनिक चर्चा में वे व्यापक सामाजिक या राजनीतिक अर्थ भी ग्रहण कर लेते हैं। ऐसे में बयान की वास्तविक सामग्री, वक्ता की मंशा और उस पर लोगों की प्रतिक्रियाओं के बीच अंतर करना जरूरी है। इस मामले में भी मुफ्ती नदवी की बातों को उनके पूरे संदर्भ में देखना चाहिए। उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहा जा सकता है कि उन्होंने मुस्लिम युवाओं को गरबा में शामिल होने से बचने की सलाह दी और मस्जिदों में दूसरे समुदाय के लोगों की आवाजाही का उल्लेख किया। लेकिन इस बयान को लेकर पूरे मुस्लिम समाज की प्रतिक्रिया या किसी व्यापक सामाजिक बदलाव का दावा करने के लिए अतिरिक्त प्रमाण जरूरी होंगे।

धार्मिक पहचान का सम्मान हो, सामाजिक रिश्तों में संवाद भी बना रहे

मुफ्ती मोहम्मद गुफरान खान नदवी का बयान धार्मिक अनुशासन, युवाओं की सामाजिक भागीदारी और विभिन्न समुदायों के बीच मेलजोल जैसे महत्वपूर्ण विषयों को सामने लाता है। गरबा में भाग लेने या उससे दूर रहने का निर्णय धार्मिक मान्यताओं, व्यक्तिगत विश्वास और परिस्थितियों से प्रभावित हो सकता है। लोकतांत्रिक समाज में धार्मिक नेताओं को अपनी मान्यताएं रखने का अधिकार है और नागरिकों को भी अपने विवेक के अनुसार निर्णय लेने की स्वतंत्रता है। किसी की आस्था का सम्मान करने के लिए दूसरे की पसंद को गलत ठहराना जरूरी नहीं है। इसी तरह, सामाजिक मेलजोल का अर्थ अपनी धार्मिक पहचान से समझौता करना भी नहीं है। असल कसौटी यही है कि धार्मिक आस्था व्यक्तिगत और सामुदायिक जीवन में अपनी जगह बनाए रखे, लेकिन अलग-अलग समुदायों के बीच संवाद और सम्मान के रास्ते बंद न हों। नवरात्र और गरबा जैसे अवसरों पर धार्मिक परंपराओं के प्रति संवेदनशीलता के साथ सामाजिक सद्भाव बनाए रखना ही विविधता वाले समाज की सबसे बड़ी ताकत है।

Tags: Mufti stern advice to Muslim youth regarding Garba it is Haram according to Islam
LIVE India News

लाइव इंडिया न्यूज 2016 से आप तक खबरें पंहुचा रहा है। लाइव इंडिया वेबसाइट का मकसद ब्रेकिंग, नेशनल, इंटरनेशनल, राजनीति, बिजनेस और अर्थतंत्र से जुड़े हर अपडेट्स सही समय पर देना है। देश के हिंदी भाषी राज्यों से रोजमर्रा की खबरों से लेकर राजनीति नेशनल व इंटरनेशनल मुद्दों से जुडी खबरें और उनके पीछे छुपे सवालों को बेधड़क सामने लाना, देश-विदेश के राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक मुद्दों का विश्लेषण बेबाकी से करना हमारा मकसद है।

Vihan Limelite Event & Entertainment Pvt Ltd
Regd Office Flat No 1
Mig 3 E 6
Arera Colony Bhopal

Branch Office
Main Road. Tikraparaa
Raipur CG

Director Deepti Chaurasia
Mobile No 7725016291

Email id - liveindianewsandviews@gmail.com

Currently Playing

मोदी-योगी की सवा घंटे की मुलाकात, यूपी में चुनावी गणित और संगठन की अगली चाल

Modi Yogi 75 minute meeting

मोदी-योगी की सवा घंटे की मुलाकात, यूपी में चुनावी गणित और संगठन की अगली चाल

उत्तर प्रदेश
अजीत अगरकर के बाद कौन बनेगा टीम इंडिया का नया चीफ सेलेक्टर?

अजीत अगरकर के बाद कौन बनेगा टीम इंडिया का नया चीफ सेलेक्टर?

मनोरंजन
हलफनामे में 3.82 करोड़ की संपत्ति, रोल्स रॉयस की कीमत 13 करोड़, मैथिली ठाकुर पर क्यों उठे सवाल?

हलफनामे में 3.82 करोड़ की संपत्ति, रोल्स रॉयस की कीमत 13 करोड़, मैथिली ठाकुर पर क्यों उठे सवाल?

स्पेशल

RSS feed: Unknown Feed Unknown Feed

  • Contact

© Copyright 2022,LIVE INDIA NEWS. All Rights Reserved | Email: Info@liveindia.news

No Result
View All Result
  • Home
  • मुख्य समाचार
  • शहर और राज्य
  • राजनीति
  • बिजनेस
  • संपादक की पसंद
  • मनोरंजन
  • स्टार्टअप
  • धर्म
  • कृषि

© Copyright 2022,LIVE INDIA NEWS. All Rights Reserved | Email: Info@liveindia.news

Go to mobile version