जम्मू-कश्मीर में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के सामने भर्ती प्रक्रिया में देरी का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में रखे गए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2023-24 से 2025-26 और 1 अप्रैल 2026 से शुरू हुई अवधि के दौरान JKPSC और JKSSB ने कुल 15,964 पदों के लिए भर्तियां निकालीं। इन पदों के लिए 21,12,121 आवेदन प्राप्त हुए और दोनों भर्ती एजेंसियों ने आवेदन शुल्क के तौर पर करीब ₹113.91 करोड़ जुटाए। PDP विधायक वहीद उर रहमान पारा ने विधानसभा में भर्ती प्रक्रिया की स्थिति पर सवाल उठाते हुए लंबित परीक्षाओं और युवाओं के इंतजार का मुद्दा उठाया। India Today
हजारों पदों के लिए लाखों उम्मीदवारों की लगी कतार
सरकारी आंकड़ों के अनुसार JKPSC ने इस अवधि में 4,961 पदों के लिए 245 भर्ती परीक्षाएं आयोजित कीं। आयोग को इन पदों के लिए 2,76,065 आवेदन मिले, जिनमें से 1,85,808 उम्मीदवार परीक्षाओं में शामिल हुए। दूसरी ओर JKSSB ने 11,003 पदों के लिए 124 परीक्षाएं कराईं और उसे 18,36,056 आवेदन प्राप्त हुए। यानी दोनों एजेंसियों की भर्तियों में सरकारी नौकरी पाने के लिए युवाओं के बीच प्रतिस्पर्धा काफी ज्यादा रही।
भर्ती फीस के रूप में जमा हुए करीब 114 करोड़ रुपये
नौकरी के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों से दोनों एजेंसियों ने बड़ी रकम फीस के रूप में जमा की। JKPSC को आवेदन शुल्क से ₹24.42 करोड़, जबकि JKSSB को ₹89.49 करोड़ मिले। दोनों को मिलाकर यह रकम ₹113.91 करोड़ बैठती है। सरकार की ओर से विधानसभा में यह भी बताया गया कि लंबित और रद्द परीक्षाओं से जुड़ी फीस के रूप में ₹28.76 लाख जमा हुए हैं। परीक्षा स्थगित होने पर स्वतः फीस वापस नहीं करने की बात भी सरकार ने स्पष्ट की है।
38 JKPSC परीक्षाएं लंबित, युवाओं के इंतजार पर उठे सवाल
भर्ती प्रक्रिया में सबसे बड़ा सवाल 38 लंबित JKPSC परीक्षाओं को लेकर है। सरकारी जवाब के अनुसार इनमें दो परीक्षाएं 2023-24 की, 32 परीक्षाएं 2025-26 की और चार परीक्षाएं 1 अप्रैल 2026 से शुरू हुई अवधि की हैं। इसी मुद्दे को लेकर विधायक वहीद उर रहमान पारा ने भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा तथा मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से हस्तक्षेप करने की अपील की। उन्होंने JKPSC के चेयरमैन पद के खाली होने का मुद्दा भी उठाया।
सरकार ने फीस वापसी और भर्ती प्रक्रिया को लेकर क्या बताया?
सरकार के मुताबिक, JKPSC राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र यानी NIC की तकनीकी मदद से ऐसा ऑनलाइन सिस्टम तैयार कर रहा है, जिसके जरिए पद वापस लिए जाने या एक ही उम्मीदवार से एक से अधिक भुगतान होने जैसी स्थितियों में फीस वापसी की प्रक्रिया की जा सके। हालांकि केवल परीक्षा स्थगित होने की स्थिति में उम्मीदवार को स्वतः फीस लौटाने का प्रावधान नहीं है, क्योंकि भर्ती प्रक्रिया आगे जारी रहने की संभावना रहती है। आंकड़ों के मुताबिक इस अवधि में दोनों एजेंसियों की परीक्षाओं में 11.24 लाख से ज्यादा उम्मीदवार शामिल हुए, जिससे जम्मू-कश्मीर में सरकारी नौकरियों के लिए युवाओं के बीच प्रतिस्पर्धा का अंदाजा लगाया जा सकता है।





