भोपाल के भेल दशहरा मैदान में हुआ राज्यस्तरीय गौ-पालक सम्मेलन सिर्फ पशुपालकों को आर्थिक सहायता देने का कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि इसके जरिए केंद्र और मध्यप्रदेश सरकार ने डेयरी अर्थव्यवस्था, ग्रामीण समृद्धि, सहकारिता और नशामुक्ति को एक बड़े रोडमैप से जोड़ने की कोशिश की। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने जहां दूध उत्पादन बढ़ाकर गौपालकों की आय बढ़ाने पर जोर दिया, वहीं 2029 के अंत तक देश को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य भी सामने रखा।
दूध उत्पादन पर सबसे बड़ा दांव
सम्मेलन का सबसे बड़ा फोकस मध्यप्रदेश में दूध उत्पादन को बढ़ाने पर रहा। शाह ने प्रदेश के गौपालकों से प्रतिदिन 50 लाख लीटर दूध उत्पादन का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ने की अपील की। सरकार का दावा है कि नस्ल सुधार, नई प्रजनन तकनीक, बेहतर पशु आहार और डेयरी प्रसंस्करण के जरिए दूध उत्पादन को मौजूदा स्तर से कई गुना बढ़ाने की तैयारी है।
यानी सरकार की सोच केवल गाय पालने तक सीमित नहीं है। दूध से दही, मक्खन, पनीर जैसे उत्पाद तैयार कर पशुधन को बाजार से जोड़ने और गौपालक की आय बढ़ाने पर जोर है।
सहकारिता से बिचौलियों पर वार
अमित शाह ने सहकारी समितियों को गौपालकों की आर्थिक मजबूती का माध्यम बताया। उनका कहना है कि निजी बिचौलियों के बजाय सहकारी व्यवस्था से जुड़ने पर दूध उत्पादकों को बेहतर कीमत मिल सकती है।
इसी दिशा में उज्जैन में 255 करोड़ रुपए का मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट, भोपाल में डेयरी प्लांट और अत्याधुनिक गुणवत्ता प्रयोगशाला जैसी परियोजनाएं महत्वपूर्ण हैं। सम्मेलन में भोपाल और इंदौर दुग्ध संघों से जुड़े पशुपालकों को लाभांश और प्रदेश की गौशालाओं को सहायता राशि का वितरण भी किया गया।
गांव की अर्थव्यवस्था का नया मॉडल
इस पूरी पहल का एक और महत्वपूर्ण पहलू है—गोबर से बायोगैस और दूसरे उत्पाद, चारा प्रबंधन, नस्ल सुधार और डेयरी प्रसंस्करण। यानी पशुपालन को केवल दूध उत्पादन नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के एक पूरे चक्र के रूप में विकसित करने की कोशिश है।
अगर सहकारी समितियां, प्रसंस्करण इकाइयां और बाजार एक साथ मजबूत होते हैं, तो इसका सीधा संबंध ग्रामीण परिवारों की आय और रोजगार से बन सकता है। खास तौर पर महिलाओं की भागीदारी को लेकर भी सरकार का जोर दिखाई दिया।
नशामुक्ति का 2029 टारगेट
सम्मेलन में अमित शाह ने डेयरी से आगे बढ़कर नशामुक्ति का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने 2029 के अंत तक देश को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य बताया और मध्यप्रदेश को 31 दिसंबर 2029 तक नशामुक्त बनाने के संकल्प की अपील की।
यहां संदेश स्पष्ट है कि सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था और युवाओं के भविष्य को एक साथ जोड़कर देख रही है। अब इस लक्ष्य की असली परीक्षा उसके लिए तैयार होने वाले माइक्रो प्लान, नशे की आपूर्ति पर कार्रवाई और पुनर्वास जैसे उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन में होगी।
CM यादव के तीन बड़े ऐलान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी सम्मेलन को प्रदेश के पशुपालक परिवारों से जोड़ते हुए कई घोषणाएं कीं। हर ब्लॉक के वृंदावन ग्राम में उत्कृष्ट गौपालकों की प्रतियोगिता, विजेताओं को एक लाख और 50 हजार रुपए के पुरस्कार, 168 नई गौ-एम्बुलेंस और उन्नत नस्ल के पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए बड़े पशुपालक मेले आयोजित करने की घोषणा की गई। कुल मिलाकर, भोपाल का यह सम्मेलन मध्यप्रदेश में डेयरी सेक्टर को गांव की समृद्धि का इंजन बनाने की कोशिश का संकेत देता है। 50 लाख लीटर प्रतिदिन दूध उत्पादन का लक्ष्य कितना हासिल होता है, यह आने वाले वर्षों में सामने आएगा, लेकिन सरकार ने पशुपालन को अब कृषि के साथ-साथ ग्रामीण आय के बड़े आधार के रूप में पेश किया है।





