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मध्यप्रदेश सरकार का फोकस सिर्फ दूध उत्पादन बढ़ाने पर नहीं…मोहन सरकार चाहती है डेयरी सेक्टर बने आधुनिक और मजबूत .. दूध से बदलेगी एमपी की तस्वीर!

DigitalDesk by DigitalDesk
October 29, 2026
in भोपाल, मध्य प्रदेश, स्पेशल
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Madhya Pradesh government focus
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मध्यप्रदेश में दुग्ध उत्पादन को नई रफ्तार देने की तैयारी है। भोपाल में गोपालक सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। केंद्रीय सहकारिता एवं गृहमंत्री अमित शाह मौजूद है…इस सम्मेलन में प्रदेश के 35 हजार से ज्यादा गोपालक ही नहीं दुग्ध सहकारी समितियों से जुड़े सदस्य भी शामिल हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने मध्यप्रदेश को देश की मिल्क कैपिटल बनाने का लक्ष्य रखा है। सम्मेलन में दुग्ध उत्पादकों को बोनस से लेकर डेयरी क्षेत्र की कई बड़ी परियोजनाओं की सौगात दी जा रही हैं। सहकारी मॉडल के जरिए दूध उत्पादकों को संगठित बाजार से जोड़ने की कोशिश। यानी मध्यप्रदेश की डेयरी कहानी अब सिर्फ कितना दूध पैदा होता है तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि सवाल यह है कि उस दूध से कितनी बड़ी ग्रामीण अर्थव्यवस्था तैयार की जा सकती है। एमपी के पास दूध की ताकत है, अब मोहन सरकार इस ताकत को डेयरी कारोबार की बड़ी ताकत में बदलने की कोशिश कर रही है।

मध्यप्रदेश सरकार का फोकस अब सिर्फ दूध उत्पादन बढ़ाने पर नहीं, बल्कि पूरे डेयरी सेक्टर को आधुनिक और मजबूत बनाने पर है।  पंजीकृत गौशालाओं में संरक्षित गोवंश के रखरखाव और भरण-पोषण के लिए जुलाई और अगस्त 2026 की अनुदान राशि डीबीटी के जरिए जारी की। यानी सरकार का फोकस किसान, गोपालक और गौशालाओं से लेकर डेयरी उद्योग तक पूरे तंत्र को जोड़ने पर है। डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर को भी बड़ा विस्तार दिया जा रहा है। उज्जैन में करीब 255 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 3 लाख लीटर प्रतिदिन प्रसंस्करण क्षमता वाले अत्याधुनिक डेयरी प्लांट का डिजिटल भूमिपूजन किया गया। भोपाल में 40 हजार लीटर उत्पादन क्षमता वाले फर्मेंटेड प्रोडक्ट डेयरी प्लांट का शुभारंभ किया गया। इसके साथ ही सहकारी क्षेत्र की पहली राज्य स्तरीय अत्याधुनिक डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला और शिवपुरी के मिनी डेयरी संयंत्र की शुरुआत की गई।

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मध्यप्रदेश में हर दिन करीब 5.5 करोड़ लीटर दूध का उत्पादन होता है। दुग्ध उत्पादन के मामले में प्रदेश देश में उत्तर प्रदेश और राजस्थान के बाद तीसरे स्थान पर है। लेकिन सरकार का लक्ष्य मौजूदा स्थिति पर रुकना नहीं बल्कि उत्पादन, संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन की पूरी श्रृंखला को मजबूत करके मध्यप्रदेश को देश के प्रमुख डेयरी केंद्रों में बदलना है।
सहकारी दुग्ध संघों के जरिए प्रदेश में रोजाना करीब 12 से 12.5 लाख किलोग्राम दूध का संग्रहण हो रहा है। अब चुनौती है इस संग्रहण को और बढ़ाने की। इसके लिए अत्याधुनिक प्लांट, परीक्षण प्रयोगशालाएं, प्रसंस्करण क्षमता और डेयरी उत्पादों की नई श्रृंखला तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। भोपाल का गोपालक सम्मेलन सिर्फ एक सरकारी आयोजन नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के डेयरी सेक्टर के अगले चरण की दिशा तय करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। सवाल अब यही है कि क्या बढ़ता दूध उत्पादन, मजबूत सहकारी नेटवर्क और आधुनिक डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर मध्यप्रदेश को देश के बड़े मिल्क हब में बदल पाएगा? यानी लक्ष्य बड़ा है, दूध उत्पादन से लेकर उसकी प्रोसेसिंग और बाजार तक पूरी व्यवस्था को मजबूत करने का। अब नजर इस बात पर होगी कि इस अभियान से प्रदेश के गोपालकों की आमदनी और डेयरी सेक्टर की क्षमता में कितना विस्तार होता है।

मध्यप्रदेश को मिल्क कैपिटल बनाने का रोडमैप

मिल्क कैपिटल बनने की राह में एमपी

मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने मध्यप्रदेश को देश की मिल्क कैपिटल बनाने का लक्ष्य सामने रखा है। इसके लिए केवल दूध उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होगा। दूध का संग्रहण, प्रसंस्करण, गुणवत्ता जांच, पैकेजिंग और बाजार तक पहुंच का पूरा ढांचा मजबूत करना होगा। मध्यप्रदेश में रोजाना करीब 5.5 करोड़ लीटर दूध का उत्पादन बताया जा रहा है। दुग्ध उत्पादन में प्रदेश देश में उत्तर प्रदेश और राजस्थान के बाद तीसरे स्थान पर है। इसका मतलब है कि प्रदेश के पास पहले से बड़ा दुग्ध आधार मौजूद है। अब चुनौती इस उत्पादन को संगठित डेयरी अर्थव्यवस्था में बदलने की है।

डेयरी सेक्टर में सबसे अहम कड़ी है दूध का संग्रहण और प्रसंस्करण।

सहकारी दुग्ध संघों के जरिए रोजाना करीब 12 से 12.5 लाख किलोग्राम दूध का संग्रहण हो रहा है। नए प्लांट और प्रसंस्करण सुविधाएं बढ़ने से दूध को सिर्फ कच्चे उत्पाद के रूप में बेचने के बजाय उससे दही, पनीर, घी, चीज और दूसरे मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने की क्षमता बढ़ सकती है। यही डेयरी अर्थव्यवस्था की अगली बड़ी सीढ़ी है।

उज्जैन का प्लांट क्यों महत्वपूर्ण है?

उज्जैन में करीब 255 करोड़ रुपये की लागत से 3 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला डेयरी प्लांट तैयार किया जाना है। इस तरह की बड़ी प्रसंस्करण क्षमता का मतलब है कि ज्यादा मात्रा में दूध को संगठित तरीके से प्रोसेस किया जा सकेगा। इससे डेयरी नेटवर्क को बड़े बाजार से जोड़ने की क्षमता भी बढ़ेगी।

भोपाल में क्या बदलाव हुआ?

भोपाल में 40 हजार लीटर क्षमता वाले फर्मेंटेड प्रोडक्ट डेयरी प्लांट का शुभारंभ किया गया है। इसके अलावा राज्य स्तरीय अत्याधुनिक डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला भी शुरू की गई है। यह प्रयोगशाला सिर्फ तकनीकी सुविधा नहीं है। डेयरी क्षेत्र में गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा का भरोसा बढ़ाने के लिए ऐसी परीक्षण व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है।

गोपालकों को इसका फायदा कैसे मिलेगा?

पिछले दिनों गोपालक सम्मेलन में 101 करोड़ रुपये की अनुदान और बोनस राशि वितरित की जा रही है। लेकिन लंबे समय का फायदा तभी होगा जब दूध की नियमित खरीद, उचित भुगतान, पशु स्वास्थ्य, नस्ल सुधार, चारा, तकनीक और बाजार की व्यवस्था साथ-साथ मजबूत हो। यानी बोनस तत्काल राहत दे सकता है, लेकिन डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर और सहकारी नेटवर्क गोपालकों की आय के लिए दीर्घकालिक आधार तैयार कर सकते हैं।

सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

मध्यप्रदेश के सामने चुनौती सिर्फ उत्पादन बढ़ाने की नहीं है। दूध उत्पादन के साथ दूध की गुणवत्ता, शीत श्रृंखला, संग्रहण केंद्र, प्रसंस्करण क्षमता, बाजार और मूल्यवर्धित उत्पादों का विस्तार भी जरूरी है। अगर इन सभी कड़ियों के बीच बेहतर तालमेल बनता है, तभी “मिल्क कैपिटल” का लक्ष्य एक बड़े डेयरी नेटवर्क में बदल सकता है। सहकारी मॉडल के जरिए दूध उत्पादकों को संगठित बाजार से जोड़ने की कोशिश। यानी मध्यप्रदेश की डेयरी कहानी अब सिर्फ कितना दूध पैदा होता है तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि सवाल यह है कि उस दूध से कितनी बड़ी ग्रामीण अर्थव्यवस्था तैयार की जा सकती है। एमपी के पास दूध की ताकत है, अब सरकार इस ताकत को डेयरी कारोबार की बड़ी ताकत में बदलने की कोशिश कर रही है।

Tags: #Madhya Pradesh government focus #increasing milk production #Mohan administration #dairy sector to become modern and robust
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