पाकिस्तान में इस समय राजनीतिक, प्रशासनिक और सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दे एक साथ चर्चा में हैं। देश की मौजूदा चार प्रांतों वाली व्यवस्था को बदलकर नए प्रांत या प्रशासनिक इकाइयां बनाने की बहस तेज हुई है। सितंबर में पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसान इकबाल ने 12 से 15 नए प्रांत बनाने की जरूरत की बात कही थी, जबकि सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि इस मुद्दे पर संसद में चर्चा होगी और किसी बदलाव के लिए राजनीतिक सहमति जरूरी होगी। इसलिए अभी इसे पाकिस्तान के विभाजन का तय फैसला नहीं माना जा सकता।
पाकिस्तान में नए प्रांत बनाने की चर्चा ने क्यों बढ़ाया राजनीतिक तनाव?
नए प्रांतों का मुद्दा अचानक नहीं उठा है, लेकिन इस बार इसे लेकर राजनीतिक बहस काफी तेज हुई है। अहसान इकबाल ने प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए 12 से 15 प्रांतों का सुझाव दिया है। दूसरी तरफ सिंध में इस प्रस्ताव का विरोध हुआ है और प्रांतीय विधानसभा ने प्रदेश को बांटने के सुझावों के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया। विपक्षी नेताओं ने भी कहा है कि इतनी बड़ी संवैधानिक व्यवस्था में बदलाव के लिए जनता और प्रांतों की सहमति जरूरी होगी।
असीम मुनीर के नाम पर भी चल रही है नई प्रांतों की बहस
पाकिस्तान की राजनीति में सैन्य नेतृत्व की भूमिका को लेकर पहले से चर्चा होती रही है। कुछ रिपोर्टों और विश्लेषणों में नए प्रांतों की बहस को सेना प्रमुख असीम मुनीर की भूमिका से जोड़कर देखा गया है, लेकिन उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में यह स्थापित नहीं है कि असीम मुनीर ने खुद पंजाब और सिंध को तोड़कर 12 से 15 प्रांत बनाने का कोई औपचारिक प्लान घोषित किया है। उपलब्ध रिपोर्टों में 12-15 प्रांतों का प्रस्ताव योजना मंत्री अहसान इकबाल से जुड़ा है।
मरियम नवाज के बयान से पंजाब और दूसरे प्रांतों के बीच विवाद बढ़ा
पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने सितंबर में कहा था कि पंजाब को पड़ोसी देशों की तुलना में पाकिस्तान के पड़ोसी प्रांतों से ज्यादा सुरक्षा खतरा है। उन्होंने खास तौर पर आतंकवादियों के पंजाब में प्रवेश का जिक्र किया। इस बयान पर खैबर पख्तूनख्वा में तीखी प्रतिक्रिया हुई और वहां की विधानसभा ने उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग वाला प्रस्ताव भी पारित किया। इससे पाकिस्तान के भीतर प्रांतीय राजनीति और सुरक्षा को लेकर तनाव सामने आया।
बलूचिस्तान और PoK में जारी असंतोष ने बढ़ाई इस्लामाबाद की चुनौती
बलूचिस्तान में अलगाववादी हिंसा लगातार पाकिस्तान के लिए सुरक्षा चुनौती बनी हुई है। 29 सितंबर को बलूच लिबरेशन फ्रंट ने एक सैन्य काफिले पर हमले का दावा किया, हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में भी लंबे समय से विरोध प्रदर्शन जारी हैं। हालिया प्रदर्शनों में LoC की तारबंदी हटाने और पुंछ-मेंढर के पुराने रास्ते खोलने की मांग उठी है। कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा भारत से जुड़ने की मांग किए जाने की रिपोर्ट भी सामने आई है।
क्या सच में पाकिस्तान के टुकड़े होंगे, या यह सिर्फ राजनीतिक बहस है?
फिलहाल पाकिस्तान के टूटने की कोई आधिकारिक प्रक्रिया शुरू होने की पुष्टि नहीं है। नए प्रांतों को लेकर बहस जरूर गंभीर हुई है, लेकिन इसके लिए संवैधानिक प्रक्रिया और व्यापक राजनीतिक सहमति की जरूरत होगी। साथ ही बलूचिस्तान की हिंसा, PoK में विरोध और पंजाब-खैबर पख्तूनख्वा के बीच राजनीतिक टकराव इस्लामाबाद के सामने अलग-अलग चुनौतियां खड़ी करते हैं। ऐसे में पाकिस्तान के भविष्य को लेकर कई सवाल जरूर उठ रहे हैं, लेकिन अभी यह कहना कि देश निश्चित रूप से कई हिस्सों में बंटने वाला है, उपलब्ध तथ्यों से साबित नहीं होता।





