बुंदेलखंड की मिट्टी से निकली एक आवाज आज देशभर में गूंज रही है। सागर के जन्म से दृष्टिबाधित लोकगायक सुनील लोधी कभी ट्रेनों और गांवों में तंबूरा लेकर भजन गाया करते थे। लेकिन उनकी आवाज जब फिल्म हनुमान अंश के भजन “मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डाल दई” में सुनाई दी, तो देखते ही देखते सुनील देशभर में चर्चा में आ गए।
उनकी कहानी यहीं नहीं रुकी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सुनील से मुलाकात कर उन्हें एक लाख रुपये की सम्मान निधि देने की घोषणा की। साथ ही संगीत की पढ़ाई और आंखों के इलाज में सरकारी मदद का भरोसा भी दिया।
अब फिल्म निर्माता अनुप्रिया नागर ने भी सुनील की मदद के लिए कदम बढ़ाया है। मुंबई के नेत्र विशेषज्ञ से उनकी जांच के लिए अपॉइंटमेंट कराया गया है। उम्मीद है कि विशेषज्ञ जांच के बाद उनके इलाज की संभावनाएं सामने आएंगी।
सुनील खुद अपनी इस अचानक बदली जिंदगी का श्रेय भगवान हनुमान की कृपा को देते हैं। उनकी कहानी संघर्ष, प्रतिभा और आस्था के उस संगम की कहानी है, जहां एक तंबूरे से निकली आवाज ने उन्हें देशभर तक पहुंचा दिया। कहते हैं, जब हुनर को मौका मिलता है तो हालात बदलने लगते हैं। सुनील लोधी की कहानी इसका एक भावुक उदाहरण बनकर सामने आई है। “जिस आवाज ने हनुमान का भरोसा गाया, अब उसी आवाज के लिए दुनिया रोशनी की उम्मीद कर रही है।”





