महाराष्ट्र के नंदुरबार में आदिवासी बच्चों के लिए चल रही आश्रमशालाओं की बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल उठे हैं। CJP संस्थापक अभिजीत डिपके ने दौरे के बाद दावा किया कि कुछ स्कूलों में बच्चों को पीने के पानी और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं की परेशानी है। उन्होंने छात्राओं के रहने और सुरक्षा से जुड़े इंतजामों पर भी सवाल उठाए। इन आरोपों की स्कूल-दर-स्कूल स्वतंत्र पुष्टि अभी जरूरी है।
600 छात्राओं और सफाई का मुद्दा
CJP संस्थापक डिपके के मुताबिक एक आश्रमशाला में 600 से ज्यादा छात्राएं पढ़ रही हैं, लेकिन वहां सफाईकर्मी नहीं है। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता और अधपके खाने की शिकायत भी सामने रखी। खास तौर पर छात्राओं के लिए स्वच्छता और सुरक्षित परिसर का सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है। महाराष्ट्र सरकार के आदिवासी विकास विभाग के दस्तावेजों में भी आश्रमशालाओं में स्वच्छता, पानी, बिजली, भोजन और परिसर की व्यवस्थाओं को लेकर जिम्मेदारियां तय की गई हैं।
सुरक्षा के लिए चारदीवारी कितनी जरूरी?
छात्राओं के लिए परिसर की सुरक्षा भी इस पूरे मामले का अहम पहलू है। डिपके ने दावा किया कि जिस स्कूल का उन्होंने दौरा किया, वहां चारदीवारी नहीं होने से छात्राएं सुरक्षा को लेकर डरी हुई हैं। वहीं राज्य की ‘आदर्श आश्रमशाला’ संबंधी योजना में संरक्षण दीवार और सीसीटीवी जैसी सुविधाओं को आवश्यक भौतिक ढांचे में शामिल किया गया है। ऐसे में वास्तविक स्थिति और निर्धारित मानकों के बीच कितना अंतर है, इसकी जांच महत्वपूर्ण होगी।
नंदुरबार में पहले से पानी की योजनाएं
नंदुरबार पूरी तरह आदिवासी जिला घोषित है और यहां आदिवासी शिक्षा के लिए आश्रमशालाओं का बड़ा नेटवर्क मौजूद है। सरकारी रिकॉर्ड में आश्रमशालाओं के लिए पानी की योजनाओं का भी उल्लेख है। नंदुरबार जिला परिषद का ग्रामीण जलापूर्ति विभाग भी स्कूलों और दूसरी सार्वजनिक संस्थाओं तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाने को अपने मिशन का हिस्सा बताता है। ऐसे में किसी आश्रमशाला में पानी की समस्या सामने आती है तो सवाल सिर्फ सुविधा का नहीं, बल्कि योजनाओं के क्रियान्वयन और रखरखाव का भी बनता है।
सरकारी दावों और जमीन की हकीकत
महाराष्ट्र में फिलहाल 499 सरकारी आश्रमशालाएं संचालित होने की जानकारी आदिवासी विकास विभाग देता है। विभाग की योजना में आदर्श आश्रमशालाओं के लिए पर्याप्त शौचालय, अलग छात्रावास, पानी, बिजली, सुरक्षा दीवार और सीसीटीवी जैसी सुविधाओं का प्रावधान बताया गया है।
यही वजह है कि नंदुरबार से उठी शिकायतों की जांच केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जरूरत इस बात की है कि संबंधित स्कूलों का भौतिक सत्यापन हो, पानी-बिजली, स्वच्छता, भोजन, छात्रावास और सुरक्षा की स्थिति सार्वजनिक की जाए और जहां कमी मिले, वहां समयबद्ध सुधार हो।
क्योंकि आदिवासी बच्चों के लिए आश्रमशाला सिर्फ स्कूल नहीं, उनका घर भी है। वहां किताब और शिक्षक के साथ सुरक्षित पानी, स्वच्छ परिसर, पौष्टिक भोजन और सुरक्षित आवास भी शिक्षा का ही हिस्सा हैं।





