भारतीय शेयर बाजार में 24 सितंबर को कारोबार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के बीच निवेशकों का सेंटीमेंट दबाव में रहा। शुरुआती कारोबार में बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली।
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में रहे
30 शेयरों वाला सेंसेक्स करीब 555 अंक गिरकर 74,272.40 के स्तर पर खुला। सुबह 9:20 बजे तक इसकी गिरावट बढ़कर 643.55 अंक हो गई और इंडेक्स 74,184.70 पर कारोबार कर रहा था। इसी तरह 50 शेयरों वाला निफ्टी भी कमजोर रहा। सुबह 9:21 बजे निफ्टी 215.30 अंक यानी 0.92% नीचे 23,231.50 पर था। इसकी शुरुआती स्थिति 23,221.80 रही।
कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से भारतीय बाजार पर बढ़ा दबाव
बाजार में गिरावट की प्रमुख वजहों में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी शामिल रही। ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। भारत के लिए महंगा कच्चा तेल चिंता बढ़ाता है, क्योंकि इससे आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच अनिश्चितता ने भी तेल बाजार को प्रभावित किया।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज बढ़ोतरी ने भी निवेशकों को किया सतर्क
वैश्विक बाजारों से मिले संकेत भी भारतीय शेयर बाजार के लिए अनुकूल नहीं रहे। अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.11% तक पहुंच गई, जो लंबे समय के ऊंचे स्तरों में है। ऊंची बॉन्ड यील्ड के कारण निवेशकों की नजर अब अमेरिकी ब्याज दरों की दिशा पर भी बनी हुई है। इससे शेयर बाजारों पर अतिरिक्त दबाव देखा गया।
बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में भी बिकवाली का असर दिखाई दिया
शुरुआती कारोबार में कई प्रमुख वित्तीय शेयरों में कमजोरी रही। बजाज फाइनेंस करीब 4.75% नीचे रहा, जबकि बजाज फिनसर्व 3.49% तक गिरा। एक्सिस बैंक, इंडिगो, कोटक महिंद्रा बैंक और एचडीएफसी बैंक भी दबाव में रहे। हालांकि टेक महिंद्रा, सन फार्मा, एचसीएल टेक, आईसीआईसीआई बैंक और टीसीएस जैसे कुछ शेयरों में खरीदारी दिखाई दी।
एक्सपर्ट ने बाजार की रिकवरी को लेकर क्या संकेत दिए?
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड का 102 डॉलर से ऊपर जाना और अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड का 5.11% तक पहुंचना बाजार पर दबाव डाल रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक ये दोनों वैश्विक दबाव बने रहते हैं, बाजार में तेज रिकवरी की संभावना सीमित रह सकती है।





