भारत-चीन आर्थिक एवं सांस्कृतिक संवर्धन परिषद के महासचिव मोहम्मद साकिब ने हाल ही में
शिन्हुआ समाचार एजेंसी को दिए एक लिखित साक्षात्कार में कहा कि भारत और चीन प्राचीन
सभ्यताएं होने के साथ-साथ उभरती महाशक्तियां भी हैं। ऐसे में दोनों देशों की साझा जिम्मेदारी है
कि वे सहयोग के जरिए विकास को बढ़ावा दें।
साकिब के मुताबिक, अनिश्चितताओं से भरी मौजूदा दुनिया में विकास भारत और चीन को जोड़ने
वाला सबसे बड़ा साझा आधार है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की सभ्यताओं ने हजारों वर्षों से एशिया
के ऐतिहासिक विकास को प्रभावित किया है और भारत-चीन सहयोग भी दोनों देशों के साझा
इतिहास का हिस्सा रहा है।
उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे भारत और चीन आधुनिकीकरण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, दोनों देशों के
पारंपरिक संबंधों को नया और समकालीन अर्थ मिल रहा है। ऐसे में विकास दोनों देशों के अतीत और
भविष्य को जोड़ने वाला एक सेतु बन रहा है। उनके अनुसार, भारत और चीन का विकास एक-दूसरे
के लिए खतरा नहीं, बल्कि बहुध्रुवीय विश्व को आकार देने के लिए सहयोग का अवसर है।
वहीं, चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की हालिया भारत यात्रा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी
मुलाकात पर साकिब ने कहा कि यह बैठक दोनों पक्षों की संबंधों को स्थिर करने और साझा हितों पर
ध्यान देने की इच्छा को दर्शाती है। उन्होंने इसे सहयोग के विस्तार का सकारात्मक संकेत बताते हुए
भारत-चीन संबंधों के पुनरुत्थान का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बताया।
साकिब ने कहा कि चीन विनिर्माण और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में मजबूत है, जबकि भारत का सेवा
क्षेत्र और नवाचार का पारिस्थितिकी तंत्र काफी जीवंत है। ऐसे में दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं में
काफी हद तक पूरकता है। उन्होंने नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल प्लेटफॉर्म और हरित वित्त जैसे क्षेत्रों
में सहयोग की व्यापक संभावनाओं पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि विकास केवल अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मतलब लोगों में
निवेश करना भी है। इसके लिए उन्होंने युवा और छात्र आदान-प्रदान, सांस्कृतिक गतिविधियों तथा
संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं को बढ़ावा देने का सुझाव दिया।
साकिब के मुताबिक, भारत-चीन सहयोग का महत्व सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है।
वैश्विक दक्षिण के दो महत्वपूर्ण देशों के रूप में दोनों देश अरबों लोगों की अधिक न्यायसंगत व्यापार
व्यवस्था, बेहतर वैश्विक जलवायु शासन और समावेशी विकास की साझा आकांक्षाओं का
प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत और चीन ब्रिक्स, शांगहाई सहयोग संगठन, जी-20
और संयुक्त राष्ट्र जैसे बहुपक्षीय मंचों पर अपना समन्वय और मजबूत कर सकते हैं।
इसके अलावा, उन्होंने कहा कि अधिक स्थिर और सहयोगपूर्ण भारत-चीन संबंध न केवल दोनों देशों
के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि वैश्विक दक्षिण में विश्वास बढ़ाने और अधिक न्यायसंगत
अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बढ़ावा देने में भी अहम भूमिका निभा सकते हैं।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)





