भारत ने ब्रिक्रस की मेहमान नवाजी चौथी बार करी लेकिन ब्रिक्स के मेहमान रवाना होते तक देश की सियासत में नई बहस फिर शुरू हो गई,बहस रही खाने के लेकर ।ब्रिक्स समिट में परोसा गया डिनर मेहमानों को कैसा लगा ये सवाल तो किसी ने नहीं किया ,लेकिन खाने में क्या था इसे लेकर सियासत तेज हो गई।
डिनर मैन्यू पर उठे सवाल
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ब्रिक्स में आए मेहमानों के डिनर मैन्यू पर सवाल खड़े किए है। राहुल गांधी ने कहा कि देश के 80 प्रतिशत लोग मांसाहारी है तो ब्रिक्स में खाना केवल शाकाहारी क्यों परोसा गया। हांलाकि राहुल गांधी ने अपनी इस पोस्ट के साछ छोले भूटूरे की फोटो लगाई औऱ ये भी लिखा कि उनको अपनी बहन के हाथ के छोले भटूरे बड़े पसंद है।लेकिन सवाल ये कि – मैन्यू पर इतनी सियासत क्यों
इससे पहले भी होती रही है सियासत
भारत में पहले मुद्दों पर राजनीति होती थी । विचारधाराओं का झगड़ा था लेकिन बदलती राजनीति आज ऐसी है कि राजनीति के लिए किसी भी बात को मुद्दा बना लिया जाता है।ये पहला मौका नहीं है कि देश में खाने के मैन्यू को लेकर सियासत हुई हो हांलाकि विदेशी मेहमानों के खाने को लेकर सियासत पहली बार हुई। बिहार विधानसभा चुनावों के समय से खाना देश को लेकर भी सियासत है। हांलाकि सनातन की सियासत तो पहले से मौजूद थी अब खाने की सियासत भी है।
कहां से शुरू हुई खाने की सियासत
पिछळे साल बिहार चुनावों में तेजस्वी यादव ने चॉपर पर मछळी खाते तस्वीर सोशळ मीडिया पोस्ट पर डाली उसी समय से मंगलावर को मछली खाई जैसी ट्रोलिंग उनको विपक्ष से मिली। उस के बाद पश्चिम बंगाल में चुनाव आए। इन चुनावों का नजारा अलग अलग था इसमें बीजेपी के नेता भी लाल गमछा गले में डालकर मछळी खाते नजर आए।
फिर बारी आई पंडित धीरेन्द्र शास्त्री की जिन्होंने पश्चिम बंगाल जाकर बोला कि नौरात्रि पर मछली का सेवन न करे। फिर क्या था बंगाल में ही जनता ने उनको आडे हाथों लिया। मामले की गंभीरता को समझते हुए खुद कालीघाट जाकर काली मंदिर में माछेर भात आया। इसके बाद बारी आई ब्रिक्स की । ब्रिक्स में शाकाहार मेन्यू को लेकर विपक्ष ने बवाल काटा क्यों समझ नहीं आया। ज
बकि मेहमानों को शाकाहार के साथ सात नल्ली निहारी जैसे मांसाहारी व्यंजन भी परोसे गए थे। मैन्यू पर सियासत क्यों
दरअसल हम सब बचपने से पढ़ते सुनते औऱ देखते आए हैं कि भारत विविधताओं का देश है। यहां पग पग पानी और बोली बदलती है तो खान पान भी बदलना स्वाभाविक है। ऐसे में अगर पश्चिम बंगाल और बिहार की बात करें तो वहां मछली एक अच्छा मांसाहार खाना होता है। ऐसे ही देशके दूसरे इलाके में अगर नार्थ इंडिया की बात करें तो वहां शाकाहार खाना बेहतर माना जाता है। किसी भी जगह के पर्यावरण के हिसाब से ज्यादातर खाने को तय किया जाता है। ऐसे में मैन्यू पर भला सियासत क्यों चैक कर लेना सर





