Tuesday, November 3, 2026
  • Contact
India News
  • मुख्य समाचार
  • राजनीति
  • संपादक की पसंद
  • शहर और राज्य
    • उत्तर प्रदेश
      • आगरा
      • कानपुर
      • लखनऊ
      • मेरठ
    • छत्तीसगढ
      • जगदलपुर
      • बिलासपुर
      • भिलाई
      • रायपुर
    • दिल्ली
    • बिहार
      • पटना
    • मध्य प्रदेश
      • इंदौर
      • ग्वालियर
      • जबलपुर
      • भोपाल
    • महाराष्ट्र
      • नागपुर
      • नासिको
      • पुणे
      • मुंबई
    • राजस्थान
      • अजमेर
      • कोटा
      • जयपुर
      • जैसलमेर
      • जोधपुर
  • स्टार्टअप
  • कृषि
  • मनोरंजन
  • बिजनेस
  • धर्म
  • ऑटो
  • सरकारी नौकरी
  • वीडियो
No Result
View All Result
India News
Home मुख्य समाचार

खेत से फैक्ट्री तक किसान, खेती को नौकरी नहीं कारोबार बनाने की तैयारी…मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की नई पहल

DigitalDesk by DigitalDesk
September 10, 2026
in मुख्य समाचार
0
New Initiative by Chief Minister Dr. Mohan Yadav
0
SHARES
0
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterWhatsapp

Related posts

अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने सीपीसी द्वारा सख्ती के साथ पार्टी का समग्र तौर पर प्रबंधन करने की प्रशंसा की

अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने सीपीसी द्वारा सख्ती के साथ पार्टी का समग्र तौर पर प्रबंधन करने की प्रशंसा की

November 2, 2026
terror mafia Madhya Pradesh officials have lost their lives for taking action against the illegal sand and liquor trade

मध्यप्रदेश में माफिया का आतंक: रेत और शराब के अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई करने वाले कितने अफसरों ने गंवाई जान?

November 2, 2026

खेत से फैक्ट्री तक किसान, खेती को नौकरी नहीं कारोबार बनाने की तैयारी

मध्य प्रदेश में किसान कल्याण वर्ष के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कृषि को लेकर सरकार की दिशा साफ कर दी है। सरकार की कोशिश अब सिर्फ किसान की फसल बढ़ाने तक सीमित नहीं दिखती। फोकस खेती को ऐसी गतिविधि बनाने पर है, जिससे किसान की उत्पादन क्षमता के साथ कमाई के रास्ते भी बढ़ें। निवाड़ी के बलराम कृषि महोत्सव में नई दिल्ली से वर्चुअल जुड़े मुख्यमंत्री ने किसानों को उन्नत तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज, आधुनिक कृषि यंत्र और वैज्ञानिक पद्धतियां अपनाने पर जोर दिया। लेकिन उनके संबोधन की सबसे महत्वपूर्ण लाइन वह रही, जिसमें कृषि को केवल जीविकोपार्जन का साधन न मानकर लाभ का व्यवसाय बनाने की बात कही गई। यही लाइन मध्य प्रदेश की कृषि नीति के बदलते फोकस को समझने की कुंजी है।

अब सिर्फ गेहूं-धान नहीं, कमाई के कई रास्ते

किसान की आय बढ़ाने का पुराना मॉडल ज्यादा उत्पादन पर केंद्रित रहा है। लेकिन उत्पादन बढ़ने के बावजूद अगर लागत बढ़ती रहे और किसान एक ही फसल पर निर्भर रहे तो आमदनी का जोखिम बना रहता है। मुख्यमंत्री ने किसानों को दुग्ध उत्पादन, श्रीअन्न, मत्स्य पालन और उद्यानिकी जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने की अपील की है। यानी संदेश साफ है। एक खेत। एक फसल। एक आमदनी। इस मॉडल से आगे निकलकर किसान की कमाई के कई स्रोत तैयार करने की कोशिश हो रही है। खेती के साथ डेयरी। खेती के साथ पशुपालन। खेती के साथ मत्स्य पालन। खेती के साथ उद्यानिकी। यानी किसान को सिर्फ फसल उत्पादक नहीं बल्कि बहुआयामी ग्रामीण उद्यमी बनाने का मॉडल।

बीज से ज्यादा महत्वपूर्ण है तकनीक का बदलाव

कृषि में सिर्फ अच्छा बीज किसान की आय नहीं बढ़ाता। खेत की तैयारी, सिंचाई, मशीनरी, मौसम की जानकारी, उत्पादन लागत, फसल का चुनाव और बाजार तक पहुंच भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इसीलिए सरकार का जोर उन्नत बीज के साथ आधुनिक कृषि यंत्र और वैज्ञानिक पद्धतियों पर है। यहां बलराम कृषि महोत्सव की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसे आयोजन किसान और कृषि वैज्ञानिक के बीच सीधे संवाद का मंच बन सकते हैं। यानी खेत में परंपरा रहेगी, लेकिन उसके साथ तकनीक का इस्तेमाल बढ़ेगा। इसका सीधा लक्ष्य है कम लागत। ज्यादा उत्पादन। बेहतर गुणवत्ता। ज्यादा आमदनी।

प्राकृतिक खेती और आधुनिक खेती, दोनों साथ

कृषि में एक दिलचस्प संतुलन बनाने की कोशिश भी दिखाई देती है। एक तरफ आधुनिक कृषि यंत्र और नई तकनीक की बात है। दूसरी तरफ प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने की बात कही गई है। यानी मॉडल सिर्फ मशीन आधारित खेती का नहीं है। लक्ष्य ऐसी खेती का है जिसमें लागत कम हो, मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहे और उत्पाद की गुणवत्ता बेहतर हो। अगर किसान प्राकृतिक खेती को बाजार की मांग और बेहतर मूल्य से जोड़ पाता है, तो यह सिर्फ खेती की तकनीक का बदलाव नहीं बल्कि खेती की अर्थव्यवस्था का बदलाव बन सकता है।

सिर्फ फसल नहीं, पूरा ग्रामीण अर्थतंत्र बदलने का संकेत

मुख्यमंत्री के संबोधन में कृषि के साथ पशुपालन, पर्यटन और दूसरी रोजगारपरक गतिविधियों का जिक्र भी महत्वपूर्ण है। इसका मतलब यह है कि गांव की अर्थव्यवस्था को केवल खेत तक सीमित रखने के बजाय उससे जुड़े दूसरे क्षेत्रों को भी सक्रिय करने की कोशिश हो रही है। गांव में खेती होगी। उसी गांव में डेयरी बढ़ेगी। पशुपालन बढ़ेगा। मत्स्य पालन होगा। कृषि आधारित छोटे व्यवसाय विकसित होंगे। पर्यटन की संभावना वाले क्षेत्रों में नए अवसर बन सकते हैं। यानी किसान की आय सिर्फ मंडी में बिकने वाली फसल से नहीं, पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ सकती है।

ढाई करोड़ किसानों तक सब्सिडी वाला बीज, ब्याजमुक्त ऋण में बदलाव

सरकार ने किसान कल्याण वर्ष के तहत कई फैसलों का उल्लेख किया है। मुख्यमंत्री के अनुसार प्रदेश में ढाई करोड़ किसानों को सब्सिडी पर बीज उपलब्ध कराया गया है। इसके अलावा शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण की सुविधा जारी है। खरीफ और रबी फसलों के लिए ऋण चुकाने की छह-छह महीने की अवधि को बढ़ाकर एक वर्ष किए जाने की जानकारी भी मुख्यमंत्री ने दी। इसका महत्व इसलिए है क्योंकि किसान के लिए खेती की शुरुआत में पूंजी और फसल बेचने तक का समय दोनों अहम होते हैं। अगर किसान को सस्ता ऋण, गुणवत्तापूर्ण बीज और तकनीक मिलती है, तो उत्पादन लागत और वित्तीय दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है।

सम्मानित किसानों में दिखा सरकार का कृषि मॉडल

निवाड़ी में सम्मानित किसानों की सूची भी अपने आप में इस नए कृषि मॉडल की तस्वीर पेश करती है। किसी ने संरक्षित खेती अपनाई। किसी ने औषधीय खेती। किसी ने कस्टम हायरिंग सेंटर बनाया। किसी ने कृषि यंत्र अनुदान का लाभ लिया। कोई डेयरी से जुड़ा। किसी ने प्राकृतिक खेती अपनाई और किसी ने मत्स्य बीज उत्पादन को व्यवसाय बनाया। यानी मंच पर सम्मानित किसान सिर्फ सफल किसान नहीं थे। वे अलग-अलग कृषि व्यवसाय मॉडल के उदाहरण भी थे। यही प्रयोग अगर बड़े पैमाने पर सफल होता है तो मध्य प्रदेश में खेती की तस्वीर धीरे-धीरे बदल सकती है।

खेत से फैक्ट्री तक, यही है सबसे बड़ा बदलाव

मुख्यमंत्री का यह कहना कि सरकार “फील्ड से लेकर फैक्ट्री तक किसानों के साथ खड़ी है”, इस पूरी रणनीति का सबसे बड़ा संकेत देता है । खेती की असली कमाई सिर्फ खेत में उत्पादन से नहीं होती। मूल्यवर्धन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और बाजार तक पहुंच भी किसान की आय में बड़ा फर्क डाल सकते हैं। अगर खेत में पैदा होने वाला उत्पाद गांव या जिले में ही आगे प्रसंस्कृत होने लगे तो किसान सिर्फ कच्चा माल बेचने वाला नहीं रहेगा। वह कृषि मूल्य श्रृंखला का हिस्सा बनेगा। यानी लक्ष्य सिर्फ “अधिक उपज” नहीं। लक्ष्य है “उपज से अधिक मूल्य”।

मोहन सरकार का कृषि संदेश, किसान को लाभ का कारोबारी बनाना

इस पूरे अभियान को अगर एक वाक्य में समेटें तो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की कृषि रणनीति का संदेश यही दिखाई देता है। किसान को सिर्फ उत्पादन करने वाला नहीं, कमाई का मॉडल बनाने वाला बनाना। उन्नत बीज से खेत मजबूत होगा। आधुनिक मशीन से लागत और समय घट सकता है। वैज्ञानिक तकनीक से उत्पादन बेहतर हो सकता है। प्राकृतिक खेती से गुणवत्ता और लागत पर काम हो सकता है। डेयरी, मत्स्य, उद्यानिकी और पशुपालन से आय के नए रास्ते खुल सकते हैं। और जब इन सबको बाजार और प्रसंस्करण से जोड़ा जाएगा तो खेती सिर्फ जीविका नहीं रहेगी। खेती कारोबार बनेगी। किसान उत्पादक से उद्यमी बनेगा। और गांव सिर्फ खेती की जगह नहीं, ग्रामीण अर्थव्यवस्था का केंद्र बन सकता है। यही बलराम कृषि महोत्सव के मंच से निकला सबसे बड़ा संदेश है। (प्रकाश कुमार पांडेय)

Tags: #New Initiative by Chief Minister Dr. Mohan Yadav #From Farm to Factory #Farmers' Agriculture #Gearing up to transform farming into a business venture
LIVE India News

लाइव इंडिया न्यूज 2016 से आप तक खबरें पंहुचा रहा है। लाइव इंडिया वेबसाइट का मकसद ब्रेकिंग, नेशनल, इंटरनेशनल, राजनीति, बिजनेस और अर्थतंत्र से जुड़े हर अपडेट्स सही समय पर देना है। देश के हिंदी भाषी राज्यों से रोजमर्रा की खबरों से लेकर राजनीति नेशनल व इंटरनेशनल मुद्दों से जुडी खबरें और उनके पीछे छुपे सवालों को बेधड़क सामने लाना, देश-विदेश के राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक मुद्दों का विश्लेषण बेबाकी से करना हमारा मकसद है।

Vihan Limelite Event & Entertainment Pvt Ltd
Regd Office Flat No 1
Mig 3 E 6
Arera Colony Bhopal

Branch Office
Main Road. Tikraparaa
Raipur CG

Director Deepti Chaurasia
Mobile No 7725016291

Email id - liveindianewsandviews@gmail.com

Currently Playing

Karwa Chauth: ट्रेडिशन से फैशन तक करवाचौथ का सफर, अब पारंपरिक करवा की जगह ले रहे आकर्षक डिजाइनर करवा

Karwa Chauth: ट्रेडिशन से फैशन तक करवाचौथ का सफर, अब पारंपरिक करवा की जगह ले रहे आकर्षक डिजाइनर करवा

Karwa Chauth: ट्रेडिशन से फैशन तक करवाचौथ का सफर, अब पारंपरिक करवा की जगह ले रहे आकर्षक डिजाइनर करवा

धर्म
Modi Yogi 75 minute meeting

मोदी-योगी की सवा घंटे की मुलाकात, यूपी में चुनावी गणित और संगठन की अगली चाल

उत्तर प्रदेश
अजीत अगरकर के बाद कौन बनेगा टीम इंडिया का नया चीफ सेलेक्टर?

अजीत अगरकर के बाद कौन बनेगा टीम इंडिया का नया चीफ सेलेक्टर?

मनोरंजन

RSS feed: Unknown Feed Unknown Feed

  • Contact

© Copyright 2022,LIVE INDIA NEWS. All Rights Reserved | Email: Info@liveindia.news

No Result
View All Result
  • Home
  • मुख्य समाचार
  • शहर और राज्य
  • राजनीति
  • बिजनेस
  • संपादक की पसंद
  • मनोरंजन
  • स्टार्टअप
  • धर्म
  • कृषि

© Copyright 2022,LIVE INDIA NEWS. All Rights Reserved | Email: Info@liveindia.news

Go to mobile version