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नहीं थम रहा सुप्रीम कोर्ट और सरकार के बीच का टकराव, कानून मंत्री ने शेयर किया जज का पुराना वीडियो

नवंबर 2022 का यूट्यूब वीडियो

DigitalDesk by DigitalDesk
January 22, 2023
in मुख्य समाचार, स्पेशल
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न्यायपालिका और कार्यपालिका में जजों की नियुक्ति पर रार क्यों…कॉलेजियम व्यवस्था पर क्या है आपत्ति?
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नई दिल्ली। कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार बनाम सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम विवाद में दिल्ली हाईकोर्ट के एक पूर्व जज का बयान शेयर किया है। हाईकोर्ट के जज आर एस सोढ़ी ने एक यू-ट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने संविधान को हाइजैक कर लिया है। सुप्रीम कोर्ट में जनता का चुना हुआ प्रतिनिधित्व हो तो जनता को ही न्याय मिलता है।

  • कानून मंत्री ने एक इंटरव्यू का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है
  • रिजिजू ने सोढ़ी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि यह एक जज की नेक आवाज है
  • उन्होंने कहा कि देश के ज्यादा लोगों की यही समझदार राय है,  सुप्रीम कोर्ट में जनता का प्रतिनिधि होना चाहिए
  • रिजिजू बोले- सिर्फ वही लोग संविधान के प्रावधानों और लोगों के मत को नहीं मानते हैं, जो खुद को संविधान से ऊपर मानते हैं।

नवंबर 2022 का है वीडियो

जज ने कहा कि जब हमारा संविधान बना था तो इसमें एक सिस्टम था, एक पूरा चैप्टर था कि जज कैसे अपॉइंट होते हैं। जो लोग कहते हैं कि यह प्रणाली असंवैधानिक है, वो संविधान में संशोधन की बात कर सकते हैं। यह संशोधन तो पार्लियामेंट ही करेगा, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने संविधान को ही हाइजैक कर लिया है। उन्होंने कहा कि हम खुद को अपॉइंट करेंगे और इसमें सरकार का कोई हाथ नहीं होगा।

हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट पर भी दी राय

जस्टिस सोड़ी ने कहा कि हाईकोर्ट सुप्रीम कोर्ट के अंतर्गत नहीं आता है। ये हर राज्य की स्वतंत्र संस्था है। हाईकोर्ट के जज को सुप्रीम कोर्ट के जज अपॉइंट करते हैं। और सुप्रीम कोर्ट के जज खुद को अपॉइंट कर रहे हैं। ऐसे में हाईकोर्ट के जज जो खुद को राज्य में स्वतंत्र मान बैठे थे, ये सुप्रीम कोर्ट की तरफ देखना शुरू कर देते हैं। सुप्रीम कोर्ट का जिसे जहां भेजने का मन करता है, वहां ट्रांसफर कर देता है। ऐसी कार्यप्रणाली से हाईकोर्ट सुप्रीम कोर्ट के अधीन हो जाता है, जो हमारे संविधान ने कभी कहा ही नहीं।

रिजिजू ने बताए लोकतंत्र के मायने

कानून मंत्री रिजिजू ने कहा- भारतीय लोकतंत्र की असली खूबसूरती इसकी सफलता है। जनता अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से स्वयं शासन करती है। चुने हुए प्रतिनिधि लोगों के हितों का प्रतिनिधित्व करते हैं और कानून बनाते हैं। हमारी न्यायपालिका स्वतंत्र है, लेकिन हमारा संविधान सर्वोच्च है।

समझिए पूरा मामला क्या है

जजों की नियुक्ति को लेकर केंद्र और न्यायपालिका में टकराव काफी समय से चल रहा है। इसके बीच सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने बड़ा कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अपने वेबसाइट पर 3 लेटर जारी कर वकील सौरभ कृपाल, सोमशेखर सुंदरेशन और आर जॉन सत्यन की पदोन्नति पर आपत्तियों का खंडन किया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की ओर से तीनों वकीलों को जज बनाने की मंजूरी न देने के फैसले को गलत बताया। कोर्ट ने कहा कि सरकारी योजनाओं की आलोचना किसी वकील का प्रमोशन रोकने का आधार नहीं है।

दरअसल, केंद्र ने सुंदरेशन के नाम पर आपत्ति जताने की वजह सरकार की नीतियों का अलोचना करना बताया था। केंद्र ने कहा कि ये कई मुद्दों पर अपना रुख जताते हैं। वहीं, कृपाल के विदेशी समलैंगिक पार्टनर को लेकर रॉ की आपत्तियों का जिक्र करते हुए उनके नाम पर मंजूरी देने से इनकार कर दिया था। सत्येन के ह्वॉट्सएप मैसेज पर केंद्र को आपत्ति है।

वैसे, असल मसला तो यह है कि केंद्र सरकार कॉलेजियम व्यवस्था को पसंद नहीं करती। वह कम से कम अपना एक प्रतिनिधि चाहती है। उधर, सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि कॉलेजिमय व्यवस्था बिल्कुल ठीक है।

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