Thursday, November 5, 2026
  • Contact
India News
  • मुख्य समाचार
  • राजनीति
  • संपादक की पसंद
  • शहर और राज्य
    • उत्तर प्रदेश
      • आगरा
      • कानपुर
      • लखनऊ
      • मेरठ
    • छत्तीसगढ
      • जगदलपुर
      • बिलासपुर
      • भिलाई
      • रायपुर
    • दिल्ली
    • बिहार
      • पटना
    • मध्य प्रदेश
      • इंदौर
      • ग्वालियर
      • जबलपुर
      • भोपाल
    • महाराष्ट्र
      • नागपुर
      • नासिको
      • पुणे
      • मुंबई
    • राजस्थान
      • अजमेर
      • कोटा
      • जयपुर
      • जैसलमेर
      • जोधपुर
  • स्टार्टअप
  • कृषि
  • मनोरंजन
  • बिजनेस
  • धर्म
  • ऑटो
  • सरकारी नौकरी
  • वीडियो
No Result
View All Result
India News
Home मुख्य समाचार

15 अगस्त 1947:कहां थे आजादी के दिन गांधी, नेहरू, जिन्ना और फैज? ..बेहद दर्दनाक था तस्वीर का दूसरा पहलू

DigitalDesk by DigitalDesk
August 15, 2026
in मुख्य समाचार, राजनीति
0
15 august 1947
0
SHARES
0
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterWhatsapp

15 अगस्त 1947… भारत के इतिहास का वो दिन, जब करीब दो सौ साल की ब्रिटिश हुकूमत का अंत हुआ और देश ने आजादी की पहली सुबह देखी। दिल्ली में संसद भवन रोशनी से जगमगा रहा था। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू आजादी का ऐतिहासिक भाषण दे रहे थे। सत्ता हस्तांतरण की औपचारिकताएं पूरी हो रही थीं। एक नए राष्ट्र का जन्म हो रहा था। लेकिन इसी तस्वीर का दूसरा पहलू बेहद दर्दनाक था। महात्मा गांधी दिल्ली में नहीं थे। वे सत्ता के केंद्र से दूर, बंगाल के नोआखाली में सांप्रदायिक हिंसा से जूझ रहे थे। उनका लक्ष्य आजादी का जश्न मनाना नहीं, बल्कि हिंदू-मुस्लिम हिंसा के बीच इंसानियत को बचाना था।

आजादी आई, मगर देश बंट चुका था
दिल्ली में जश्न, नोआखाली में गांधी
नेहरू ने पढ़ा नियति से वादा
जिन्ना के सामने नए पाकिस्तान की चुनौती
फैज ने लिखी दर्दभरी आजादी
आजादी के साथ विभाजन का दर्द

Related posts

om-birla-piece-of-advice-in-response-to-rahul-gandhi-challenge-for-a-debate

बागी सांसदों की सदस्यता पर फैसला या फिर सियासी इंतजार? राहुल गांधी के बहस के चैलेंज पर ओम बिरला की नसीहत!

November 5, 2026
Gold Silver Price: धनतेरस से पहले सोना-चांदी में फिर उछाल, एक दिन में ₹4,800 महंगा हुआ सोना और चांदी ₹9,000 चढ़ी; देखें 5 नवंबर के शहरवार भाव

Gold Silver Price: धनतेरस से पहले सोना-चांदी में फिर उछाल, एक दिन में ₹4,800 महंगा हुआ सोना और चांदी ₹9,000 चढ़ी; देखें 5 नवंबर के शहरवार भाव

November 5, 2026

दूसरी तरफ पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना एक नए देश की कमान संभाल रहे थे। और श्रीनगर में मौजूद कवि फैज अहमद फैज आजादी की उस सुबह को देखकर खुश होने के साथ-साथ उसकी अधूरी तस्वीर भी महसूस कर रहे थे। यानी 15 अगस्त 1947 की कहानी सिर्फ जश्न की नहीं थी। यह आजादी, विभाजन, हिंसा, उम्मीद और अधूरे सपनों की एक साथ चलती कहानी थी।

पृष्ठभूमि—आजादी तक कैसे पहुंचा भारत?

20 फरवरी 1947 को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली ने भारत से ब्रिटिश सत्ता समाप्त करने की घोषणा की। इसके बाद वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने 3 जून को सत्ता हस्तांतरण की योजना सामने रखी।लेकिन ब्रिटिश सत्ता के हस्तांतरण के साथ भारत का विभाजन भी तय हो चुका था। सिर्फ जमीन का बंटवारा नहीं हुआ—सेना, प्रशासन, पुलिस, रेलवे, डाक व्यवस्था और सरकारी संपत्तियों तक का विभाजन करना पड़ा। माउंटबेटन के सामने समय बेहद कम था। भारत को आजादी देने की प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जा रहा था और इसी जल्दबाजी के बीच उपमहाद्वीप सबसे बड़े मानवीय संकटों में से एक की तरफ बढ़ रहा था।

दिल्ली में नेहरू और आजादी का जश्न

दिल्ली में 14 और 15 अगस्त की मध्यरात्रि ऐतिहासिक थी। जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा में अपना प्रसिद्ध भाषण दिया, जिसे बाद में ‘Tryst with Destiny’ यानी ‘नियति से साक्षात्कार’ के नाम से जाना गया। उनका संदेश था कि लंबे संघर्ष के बाद भारत एक नई शुरुआत कर रहा है। लेकिन आजादी की औपचारिकता के पीछे प्रशासनिक और राजनीतिक जिम्मेदारियों का भारी बोझ भी था।
माउंटबेटन स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर-जनरल बने। सत्ता हस्तांतरण के साथ नई सरकार को देश चलाने की तत्काल चुनौती सामने थी।
और इसी दौर में एक दिलचस्प प्रसंग भी सामने आता है—मंत्रिपरिषद के नामों से जुड़ा एक लिफाफा माउंटबेटन तक पहुंचा, लेकिन कथित तौर पर उसमें सूची मौजूद नहीं थी। आजादी की ऐतिहासिक हलचल के बीच प्रशासनिक अव्यवस्था की यह घटना उस समय के दबाव को दिखाती है।

गांधी दिल्ली में क्यों नहीं थे?

15 अगस्त को महात्मा गांधी सत्ता के केंद्र दिल्ली में नहीं थे। वे बंगाल के नोआखाली में सांप्रदायिक हिंसा से प्रभावित इलाकों में घूम रहे थे। उनका मानना था कि जब देश के लोग एक-दूसरे के खून के प्यासे हों, तब उनके लिए आजादी का उत्सव मनाना अर्थहीन है। गांधी गांव-गांव जाते, लोगों से मिलते, प्रार्थना करते और हिंदू-मुसलमानों से हिंसा छोड़ने की अपील करते। उनकी राजनीति उस समय सत्ता से बिल्कुल अलग दिखाई दे रही थी। एक जगह जब ग्रामीण भय के कारण गांधी की शांति अपील के लिए बाहर नहीं आए, तो उन्होंने बच्चों को अपने पास बुलाया और उनके साथ गेंद खेली। इसके बाद उन्होंने गांव के लोगों को बच्चों की निर्भीकता से सीखने की बात कही। यह घटना गांधी के संघर्ष का प्रतीक बन गई—वे राजनीतिक भाषणों के बजाय डरे हुए समाज में भरोसा पैदा करने की कोशिश कर रहे थे।

दिल्ली लौटे तो हिंसा का सवाल

गांधी जब दिल्ली लौटे तो उन्होंने अपनी सहयोगी सुभद्रा जोशी से सांप्रदायिक हिंसा के बारे में पूछा। उनके लिए सबसे बड़ा सवाल था—आजादी के बावजूद कितने निर्दोष लोग मारे गए? जब उन्हें दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों की मौत की जानकारी मिली, तो उन्होंने यह भी पूछा कि शांति कायम करने वाले कांग्रेस कार्यकर्ताओं में कितने लोग हिंसा में मारे गए।
जब जवाब मिला कि ऐसे किसी कार्यकर्ता की मौत नहीं हुई, तो गांधी निराश हुए। उनकी चिंता यह थी कि अगर शांति कार्यकर्ता हिंसा रोकने के लिए पर्याप्त जोखिम नहीं उठा रहे थे, तो वे किस अर्थ में जनता को अहिंसा और साहस का संदेश दे रहे थे? यह प्रसंग गांधी के लिए आजादी की असली कसौटी को सामने रखता है—राजनीतिक स्वतंत्रता के साथ सामाजिक और मानवीय सुरक्षा।

जिन्ना के लिए 15 अगस्त कैसी थी?

भारत से अलग पाकिस्तान का निर्माण हो चुका था। 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान में सत्ता हस्तांतरण की औपचारिकताएं हुईं और मोहम्मद अली जिन्ना उसके गवर्नर-जनरल बने। कानूनी तौर पर इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट में 15 अगस्त से भारत और पाकिस्तान के दो स्वतंत्र डोमिनियन बनने की बात कही गई थी। लेकिन सत्ता हस्तांतरण के कार्यक्रम और माउंटबेटन की यात्रा को देखते हुए पाकिस्तान में 14 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया गया।

जिन्ना के सामने नए राष्ट्र के निर्माण की चुनौती थी। लेकिन पाकिस्तान के जन्म के साथ ही विभाजन की हिंसा, शरणार्थी संकट और प्रशासनिक पुनर्गठन की भारी समस्या भी सामने थी। यानी जिन्ना के लिए भी आजादी सिर्फ उत्सव नहीं थी—यह एक नए राष्ट्र को खड़ा करने की कठिन शुरुआत थी।

फैज की नजर में कैसी थी आजादी?

15 अगस्त 1947 को कवि फैज अहमद फैज श्रीनगर में थे । आजादी के तुरंत बाद लिखी उनकी प्रसिद्ध कविता ‘सुब्ह-ए-आजादी’ ने इस ऐतिहासिक क्षण को एक अलग दृष्टि से देखा। फैज ने आजादी को उस सपने की पूरी मंजिल नहीं माना, जिसकी कल्पना स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान की गई थी। उनकी कविता में आजादी की सुबह के साथ विभाजन और हिंसा का दर्द दिखाई देता है। यही वजह है कि उनकी पंक्तियां उस समय के लाखों लोगों की मनःस्थिति को व्यक्त करती हैं—आजादी मिल गई थी, लेकिन जिस इंसानी और न्यायपूर्ण समाज का सपना देखा गया था, वह अभी दूर था।

एक दिन, चार अलग-अलग तस्वीरें

15 अगस्त 1947 को अगर इन चार व्यक्तित्वों की तस्वीर को एक साथ देखें तो इतिहास की पूरी जटिलता सामने आती है। नेहरू—एक स्वतंत्र राष्ट्र के निर्माण की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। गांधी—आजादी के उत्सव से दूर, सांप्रदायिक हिंसा रोकने में लगे थे। जिन्ना—एक नए देश की नींव रख रहे थे। फैज—आजादी के साथ जुड़े अधूरे सपनों और विभाजन की पीड़ा को शब्द दे रहे थे। चारों की भूमिका अलग थी, लेकिन चारों के सामने एक साझा सवाल था—अब इस आजादी को किस तरह का भविष्य दिया जाए?

राजनीतिक और सामाजिक असर

15 अगस्त 1947 के अनुभव ने भारतीय राजनीति की दिशा पर गहरा प्रभाव डाला। भारत के सामने लोकतंत्र, संविधान, शरणार्थियों के पुनर्वास, सांप्रदायिक सद्भाव और आर्थिक पुनर्निर्माण जैसी चुनौतियां थीं। विभाजन ने लाखों लोगों को विस्थापित किया। परिवार टूटे, संपत्तियां छूटीं और हिंसा ने समाज के भीतर गहरे जख्म छोड़े। इसलिए भारतीय स्वतंत्रता की कहानी को केवल ब्रिटिश सत्ता से मुक्ति के रूप में देखना अधूरा होगा। यह उस समाज की कहानी भी है जिसने स्वतंत्रता के साथ विभाजन का असहनीय मूल्य चुकाया।

आज के लिए क्या संदेश?

15 अगस्त 1947 की सबसे बड़ी सीख शायद यही है कि राजनीतिक आजादी अपने आप सामाजिक शांति की गारंटी नहीं देती। गांधी की नोआखाली यात्रा बताती है कि राष्ट्र निर्माण केवल सत्ता हासिल करने से नहीं होता। नेहरू का भाषण बताता है कि स्वतंत्रता के साथ संस्थाओं और लोकतंत्र की जिम्मेदारी आती है। जिन्ना का पाकिस्तान बताता है कि नया राष्ट्र बनाना कितना कठिन राजनीतिक और प्रशासनिक कार्य था। और फैज की कविता याद दिलाती है कि हर ऐतिहासिक विजय के भीतर कुछ अधूरे सपने भी रह जाते हैं। 15 अगस्त 1947 को दिल्ली में तिरंगा फहरा रहा था… संसद में आजादी की आवाज गूंज रही थी… एक नए भारत का जन्म हो रहा था। लेकिन उसी वक्त नोआखाली की गलियों में गांधी शांति तलाश रहे थे। कहीं जिन्ना नए पाकिस्तान की जिम्मेदारी संभाल रहे थे… तो कहीं फैज उस आजादी की सुबह को देख रहे थे, जो उनके सपनों की पूरी सुबह नहीं थी। यही 15 अगस्त 1947 की सबसे बड़ी सच्चाई है—आजादी एक उत्सव थी, लेकिन उसके साथ विभाजन का दर्द भी था। और शायद इसी वजह से उस दिन को याद करना सिर्फ तिरंगा फहराना नहीं… बल्कि यह समझना भी है कि आजादी हासिल करने से बड़ा काम है—उसे इंसाफ, शांति, लोकतंत्र और इंसानियत के साथ बचाए रखना।

Tags: #15 august 1947#15 August 1947 Where were Gandhi Nehru Jinnah and Faiz on the day of independence
LIVE India News

लाइव इंडिया न्यूज 2016 से आप तक खबरें पंहुचा रहा है। लाइव इंडिया वेबसाइट का मकसद ब्रेकिंग, नेशनल, इंटरनेशनल, राजनीति, बिजनेस और अर्थतंत्र से जुड़े हर अपडेट्स सही समय पर देना है। देश के हिंदी भाषी राज्यों से रोजमर्रा की खबरों से लेकर राजनीति नेशनल व इंटरनेशनल मुद्दों से जुडी खबरें और उनके पीछे छुपे सवालों को बेधड़क सामने लाना, देश-विदेश के राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक मुद्दों का विश्लेषण बेबाकी से करना हमारा मकसद है।

Vihan Limelite Event & Entertainment Pvt Ltd
Regd Office Flat No 1
Mig 3 E 6
Arera Colony Bhopal

Branch Office
Main Road. Tikraparaa
Raipur CG

Director Deepti Chaurasia
Mobile No 7725016291

Email id - liveindianewsandviews@gmail.com

Currently Playing

बागी सांसदों की सदस्यता पर फैसला या फिर सियासी इंतजार? राहुल गांधी के बहस के चैलेंज पर ओम बिरला की नसीहत!

om-birla-piece-of-advice-in-response-to-rahul-gandhi-challenge-for-a-debate

बागी सांसदों की सदस्यता पर फैसला या फिर सियासी इंतजार? राहुल गांधी के बहस के चैलेंज पर ओम बिरला की नसीहत!

दिल्ली
Karwa Chauth: ट्रेडिशन से फैशन तक करवाचौथ का सफर, अब पारंपरिक करवा की जगह ले रहे आकर्षक डिजाइनर करवा

Karwa Chauth: ट्रेडिशन से फैशन तक करवाचौथ का सफर, अब पारंपरिक करवा की जगह ले रहे आकर्षक डिजाइनर करवा

धर्म
Modi Yogi 75 minute meeting

मोदी-योगी की सवा घंटे की मुलाकात, यूपी में चुनावी गणित और संगठन की अगली चाल

उत्तर प्रदेश

RSS feed: Unknown Feed Unknown Feed

  • Contact

© Copyright 2022,LIVE INDIA NEWS. All Rights Reserved | Email: Info@liveindia.news

No Result
View All Result
  • Home
  • मुख्य समाचार
  • शहर और राज्य
  • राजनीति
  • बिजनेस
  • संपादक की पसंद
  • मनोरंजन
  • स्टार्टअप
  • धर्म
  • कृषि

© Copyright 2022,LIVE INDIA NEWS. All Rights Reserved | Email: Info@liveindia.news

Go to mobile version