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दतिया विधानसभा उपचुनाव के रिजल्ट से ठीक पहले मध्यप्रदेश कांग्रेस में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को पार्टी विरोधी गतिविधियों और चुनाव में कथित भीतरघात के आरोपों के चलते पार्टी से निष्कासित कर दिया। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब उपचुनाव का परिणाम आने में कुछ ही घंटे शेष हैं। इस फैसले ने दतिया की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है और चुनावी नतीजों से पहले कांग्रेस की अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है।
भीतरघात के आरोपों पर संगठन की सख्ती
राजेंद्र भारती का पलटवार
निष्कासन से कुछ नहीं होता, 2028 का चुनाव भी लड़ूंगा
कांग्रेस की यह कार्रवाई पार्टी प्रत्याशी कुंवर घनश्याम सिंह की शिकायत के बाद हुई है। चुनाव प्रचार के दौरान घनश्याम सिंह ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया था कि पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता उनके पक्ष में काम करने के बजाय विरोधियों को लाभ पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने इसे खुला भीतरघात बताते हुए प्रदेश नेतृत्व से कार्रवाई की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद कांग्रेस संगठन ने मामले की समीक्षा की और रविवार रात राजेंद्र भारती के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक चुनाव अभियान के दौरान लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ स्थानीय नेता अधिकृत प्रत्याशी के पक्ष में पूरी सक्रियता नहीं दिखा रहे थे। कांग्रेस नेतृत्व ने इसे संगठनात्मक अनुशासन का मामला मानते हुए सख्त कदम उठाया। माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व आगामी चुनावों से पहले स्पष्ट संदेश देना चाहता है कि अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ काम करने वाले नेताओं के प्रति किसी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी।
हालांकि, कांग्रेस के इस फैसले के बाद पूर्व विधायक राजेंद्र भारती ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने निष्कासन को “एकतरफा कार्रवाई” बताते हुए कहा कि उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया। भारती ने दावा किया कि वे वर्षों से कांग्रेस के लिए संघर्ष करते रहे हैं और पार्टी के कठिन समय में भी संगठन के साथ खड़े रहे।
राजेंद्र भारती ने अपने बयान में कांग्रेस प्रत्याशी कुंवर घनश्याम सिंह पर ही गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि घनश्याम सिंह की पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा से सांठगांठ है और उन्हीं के कहने पर उनके खिलाफ शिकायत की गई। हालांकि, इस आरोप के समर्थन में उन्होंने कोई सार्वजनिक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने जो निर्णय लिया है, वह उसका अधिकार है, लेकिन इससे उनकी राजनीतिक यात्रा समाप्त नहीं होगी।
पूर्व विधायक ने कहा, “निष्कासन से कुछ नहीं होता। राजनीति कोई छीन नहीं सकता। हम जनता की राजनीति करते हैं और 2028 का विधानसभा चुनाव भी लड़ेंगे।” उन्होंने यह भी दावा किया कि कांग्रेस ने उन्हें उनके परिवार के किसी सदस्य—पत्नी या बेटे—को टिकट देने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया क्योंकि वे व्यक्तिगत लाभ की राजनीति नहीं करना चाहते थे। इस दावे पर कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजेंद्र भारती ने यह भी याद दिलाया कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने दतिया सीट से तत्कालीन गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को हराया था। उनके अनुसार, उन्होंने कांग्रेस के लिए हमेशा संघर्ष किया और जनता का समर्थन उनके साथ है। उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में भी वे चुनाव लड़ेंगे और जनता का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।
दूसरी ओर, कांग्रेस संगठन इस कार्रवाई को अनुशासन कायम रखने की दिशा में आवश्यक कदम बता रहा है। पार्टी नेताओं का मानना है कि चुनाव के दौरान अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ काम करने की शिकायतें यदि सही पाई जाती हैं, तो संगठन को सख्त निर्णय लेना ही पड़ता है। राजनीतिक विश्लेषकों का भी कहना है कि मतगणना से पहले लिया गया यह फैसला केवल दतिया तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश भर के नेताओं को अनुशासन का संदेश देने की कोशिश भी माना जा सकता है।
दतिया उपचुनाव पहले से ही प्रदेश की सबसे चर्चित राजनीतिक लड़ाइयों में शामिल रहा है। यह चुनाव केवल एक विधानसभा सीट का नहीं, बल्कि भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। ऐसे में मतगणना से पहले कांग्रेस के भीतर सामने आया यह विवाद राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब सबकी निगाहें 3 अगस्त को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं। एक ओर कांग्रेस को उम्मीद है कि उसका प्रत्याशी बेहतर प्रदर्शन करेगा, वहीं दूसरी ओर पार्टी के भीतर उभरी यह कलह परिणामों के बाद भी राजनीतिक चर्चा का विषय बनी रह सकती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव परिणाम कांग्रेस के पक्ष में आते हैं या नहीं, और यदि परिणाम अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहे तो भीतरघात के आरोपों और संगठनात्मक कार्रवाई पर बहस और तेज हो सकती है। फिलहाल, दतिया उपचुनाव के नतीजों से पहले कांग्रेस की यह कार्रवाई मध्यप्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा घटनाक्रम बन गई है।





