भारतीय जनता पार्टी BJP की सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत एक बार फिर अपने बयान को लेकर विवादों में हैं। हाल ही में जंतर-मंतर और अन्य शहरों में हुए छात्र प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने Gen Z प्रदर्शनकारियों के लिए कई आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। उनके बयानों के बाद राजनीतिक दलों और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। समर्थक जहां इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बता रहे हैं, वहीं आलोचकों ने इसे युवा पीढ़ी का अपमान बताया है।
‘जेनरेशन गटर’ कहकर साधा निशाना
दरअसल सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत की ओर से सोशल मीडिया पर प्रदर्शनकारियों की भाषा, पोस्टर और सोशल मीडिया पोस्ट की आलोचना की गई थी। इतना ही नहीं उन्हें “उल्टी लाने वाला” तक बता दिया था। इसके बाद भी वे नहीं रुकीं और उन्होंने Gen Z के लिए “जेनरेशन गटर” जैसे गंदे शब्दों का भी इस्तेमाल किया।
उन्होंने लिखा कि यह पीढ़ी पढ़ाई-लिखाई में अच्छी नहीं है, समाज को कुछ देने की क्षमता नहीं रखती और “घर भी नहीं संभाल सकती।” कुछ प्रदर्शनकारी महिलाओं पर भी भी रनौत ने निशाना साधा और उनकी परवरिश के साथ जीवनशैली पर भी सवाल उठाए थे। ऐसे में कंगना की इन टिप्पणियों के बाद यह बयान व्यापक चर्चा का विषय बन गए।
छात्र आंदोलनों की भाषा को लेकर छिड़ी नई बहस
दिल्ली के जंतर-मंतर सहित कई शहरों में हाल के छात्र प्रदर्शनों के दौरान पोस्टर, नारे और सोशल मीडिया कंटेंट को लेकर पहले से ही बहस चल रही थी। कई लोगों ने प्रदर्शनकारियों की रचनात्मक अभिव्यक्ति की सराहना की, जबकि कुछ ने इस्तेमाल की गई भाषा और मीम्स को अनुचित बताया।
इसी बहस के बीच कंगना रनौत की प्रतिक्रिया ने विवाद को और बढ़ा दिया। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर दो धाराएं बन गईं—एक पक्ष ने प्रदर्शनकारियों की भाषा पर सवाल उठाए, जबकि दूसरे पक्ष ने सांसद द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा को अस्वीकार्य बताया।
विपक्ष ने साधा निशाना, माफी की मांग
कंगना रनौत के बयान पर विपक्षी नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस नेता भाई जगताप ने सवाल उठाया कि छात्र आंदोलनों के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई पर कंगना ने संवेदना क्यों नहीं जताई। उन्होंने कहा कि एक महिला सांसद होने के नाते उन्हें छात्रों के साथ हुए व्यवहार पर भी प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी।
वहीं वारिस पठान ने कंगना की भाषा की आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें पूरी Gen Z से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जनप्रतिनिधियों की भाषा सार्वजनिक जीवन की गरिमा के अनुरूप होनी चाहिए।
पहले भी आंदोलनों पर मुखर रही हैं कंगना
यह पहला मौका नहीं है जब कंगना रनौत ने छात्र या जन आंदोलनों पर तीखी प्रतिक्रिया दी हो। इससे पहले भी वे विभिन्न विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक आंदोलनों पर खुलकर अपनी राय रखती रही हैं। उन्होंने कई बार सोशल मीडिया के माध्यम से प्रदर्शन के तरीकों और सरकार पर दबाव बनाने की रणनीतियों की आलोचना की है।
हालिया विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों की अभिव्यक्ति की सीमा क्या होनी चाहिए और राजनीतिक असहमति के बीच भाषा की मर्यादा कैसे बनी रहनी चाहिए। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सोशल मीडिया तक राजनीतिक बहस का केंद्र बना रह सकता है।




