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Crude oil: कच्चा तेल सस्ता, फिर भी पेट्रोल-डीजल महंगा! तेल कंपनियों का मुनाफा बढ़ा, जनता को राहत का इंतजार

DigitalDesk by DigitalDesk
July 8, 2026
in बिजनेस, मुख्य समाचार
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Crude oil: कच्चा तेल सस्ता, फिर भी पेट्रोल-डीजल महंगा! तेल कंपनियों का मुनाफा बढ़ा, जनता को राहत का इंतजार
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Crude oil: कच्चा तेल सस्ता, फिर भी पेट्रोल-डीजल महंगा! तेल कंपनियों का मुनाफा बढ़ा, जनता को राहत का इंतजार

क्रूड ऑयल 68.69 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा, फिर भी ईंधन की कीमतों में कटौती नहीं। तेल कंपनियों का मुनाफा 70 फीसदी तक बढ़ा, उठने लगे सवाल।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। ब्रेंट क्रूड का भाव घटकर करीब 68.69 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है, जो पिछले छह महीनों का निचला स्तर माना जा रहा है। इसके बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई कमी नहीं की गई है। ऐसे में आम उपभोक्ताओं के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि जब कच्चा तेल सस्ता हो गया है, तो ईंधन की कीमतों में राहत क्यों नहीं मिल रही?
जानकारों का कहना है कि तेल कंपनियां इस समय पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर अच्छा-खासा मार्जिन कमा रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा समय में कंपनियां पेट्रोल पर लगभग 10.5 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 11 रुपये प्रति लीटर तक का लाभ कमा रही हैं। यही वजह है कि पिछले 36 दिनों से तेल विपणन कंपनियां लगातार मुनाफे में चल रही हैं।
70 फीसदी तक बढ़ा कंपनियों का मुनाफा
सरकारी तेल कंपनियों के ताजा वित्तीय आंकड़े भी इस दावे को मजबूती देते हैं। वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में तीनों प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों ने पिछले साल की तुलना में कहीं अधिक मुनाफा दर्ज किया है।
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) का मुनाफा बढ़कर 15,176 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष यह 8,398 करोड़ रुपये था। यानी लगभग 80.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी।
भारत पेट्रोलियम (BPCL) ने 3,214 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया, जो पिछले वर्ष के 2,509 करोड़ रुपये से करीब 28.1 प्रतिशत अधिक है।
हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) का मुनाफा 3,413 करोड़ रुपये से बढ़कर 6,060 करोड़ रुपये हो गया, यानी लगभग 77.6 प्रतिशत की वृद्धि।
तीनों कंपनियों का कुल मुनाफा 14,320 करोड़ रुपये से बढ़कर 24,450 करोड़ रुपये पहुंच गया है। यानी कुल मिलाकर लगभग 70.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
पहले भी नहीं मिली थी पूरी राहत
पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें हमेशा कच्चे तेल के अनुरूप नहीं घटीं। वर्ष 2018 में जब कच्चा तेल करीब 80 डॉलर प्रति बैरल था, तब दिल्ली में पेट्रोल की कीमत लगभग 72 रुपये प्रति लीटर थी।
इसके बाद 2020 में कोरोना महामारी के दौरान कच्चे तेल का भाव गिरकर 43 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, लेकिन पेट्रोल की कीमतों में वैसी कमी देखने को नहीं मिली।
वहीं 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान कच्चा तेल 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। उस समय पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। हालांकि बाद में जब कच्चा तेल फिर से नीचे आया, तब कीमतों में उसी अनुपात में कमी नहीं की गई।
तेल कंपनियों का क्या है तर्क?
तेल कंपनियों का कहना रहा है कि जब कच्चे तेल की कीमतें बहुत अधिक थीं, तब उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा था। इसलिए अब जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें कम हैं, तो वे पहले हुए घाटे की भरपाई कर रही हैं। कंपनियों का यह भी कहना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें केवल कच्चे तेल पर निर्भर नहीं होतीं, बल्कि इसमें रिफाइनिंग लागत, परिवहन खर्च, डीलर कमीशन, केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स सहित कई अन्य घटक शामिल होते हैं।
जनता की बढ़ी उम्मीदें
दूसरी ओर आम उपभोक्ताओं का मानना है कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लगातार सस्ता हो रहा है और तेल कंपनियां रिकॉर्ड मुनाफा कमा रही हैं, तो इसका लाभ सीधे जनता तक पहुंचना चाहिए। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी आने से परिवहन लागत घटेगी, जिसका असर खाद्य पदार्थों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ेगा।
सरकार पर बढ़ा दबाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी स्तर पर बनी रहती हैं, तो सरकार और तेल कंपनियों पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती का दबाव और बढ़ सकता है। हालांकि फिलहाल कीमतों में कमी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और तेल कंपनियों के बढ़ते मुनाफे के बीच पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता ने एक बार फिर बहस छेड़ दी है। आम लोगों की नजर अब सरकार और तेल कंपनियों के अगले फैसले पर टिकी है कि क्या उन्हें ईंधन की बढ़ती लागत से राहत मिलेगी या फिर मुनाफे का यह दौर इसी तरह जारी रहेगा।

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Tags: #Crude oil prices
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