मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निरस्त होने के बाद चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। इस फैसले ने न सिर्फ कांग्रेस की रणनीति को झटका दिया है, बल्कि भाजपा के लिए भी राज्यसभा की तीनों सीटों पर जीत का रास्ता आसान कर दिया है। नामांकन खारिज होने के बाद प्रदेश की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
नामांकन पत्र में जानकारी को लेकर उठे सवाल, फिर दर्ज हुई औपचारिक आपत्ति
राज्यसभा चुनाव के लिए दाखिल नामांकन पत्र की जांच के दौरान मीनाक्षी नटराजन द्वारा एक लंबित आपराधिक मामले की जानकारी नहीं देने का मुद्दा सामने आया। भाजपा की ओर से इस संबंध में निर्वाचन अधिकारी के समक्ष लिखित आपत्ति प्रस्तुत की गई। आपत्ति में दावा किया गया कि तेलंगाना के हैदराबाद में दर्ज एक मामले का उल्लेख नामांकन दस्तावेजों में नहीं किया गया था।
तेलंगाना में दर्ज प्रकरण बना विवाद की मुख्य वजह
जानकारी के अनुसार संबंधित मामला हैदराबाद की एक अदालत में विचाराधीन है, जिसमें मीनाक्षी नटराजन का नाम आरोपी के रूप में दर्ज बताया गया है। भाजपा नेताओं ने इसी आधार पर नामांकन को चुनौती दी। दस्तावेजों और आपत्तियों की समीक्षा के बाद निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान नामांकन को अमान्य घोषित कर दिया गया।
क्रॉस वोटिंग के डर से कांग्रेस ने विधायकों को भेजा था बेंगलुरु
भाजपा द्वारा तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारने के बाद कांग्रेस पहले से ही सतर्क नजर आ रही थी। पार्टी को क्रॉस वोटिंग की आशंका थी, जिसके चलते अपने विधायकों को विशेष विमान से बेंगलुरु भेजा गया। कांग्रेस नेतृत्व राज्यसभा चुनाव तक विधायकों को एकजुट रखने की रणनीति पर काम कर रहा था, लेकिन नामांकन निरस्त होने की खबर ने पूरा परिदृश्य बदल दिया।
राज्यसभा चुनाव का गणित पूरी तरह बदल गया
नामांकन प्रक्रिया के दौरान मुकाबला रोचक माना जा रहा था। राजनीतिक विश्लेषकों का आकलन था कि तीसरी सीट पर चुनाव होने की स्थिति में वोटों का गणित महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। भाजपा को अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता थी, जबकि कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखने में जुटी हुई थी। लेकिन अब स्थिति पहले जैसी नहीं रही।
तीनों सीटों पर भाजपा की निर्विरोध जीत की चर्चा तेज
कांग्रेस उम्मीदवार के नामांकन निरस्त होने के बाद राज्यसभा की तीनों सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत की संभावना मजबूत हो गई है। राजनीतिक गलियारों में इसे भाजपा के लिए बड़ी रणनीतिक सफलता माना जा रहा है। वहीं कांग्रेस के सामने अब कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर चुनौती खड़ी हो गई है।





