सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बड़ी गिरावट के साथ खुले, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव साफ नजर आया। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और वैश्विक बाजारों की कमजोरी का असर सीधे भारतीय बाजार पर दिखाई दे रहा है।
ईरान-इजरायल संघर्ष ने निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह ईरान और इजरायल के बीच बढ़ा सैन्य तनाव माना जा रहा है। मिसाइल हमलों की खबरों के बाद दुनियाभर के निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू कर दी। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला, जहां शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स 821 अंक टूटकर 73,421 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 286 अंक फिसलकर 23,080 के स्तर पर खुला।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का संकेत
मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। घरेलू बाजार में क्रूड ऑयल 8,600 रुपये प्रति बैरल के पार निकल गया। वहीं WTI क्रूड 92.50 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 95.28 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में महंगे तेल का असर महंगाई और व्यापार घाटे पर पड़ सकता है।
एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली ने बढ़ाया दबाव
भारतीय बाजार खुलने से पहले ही एशियाई बाजारों में गिरावट का माहौल बन चुका था। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 8% से ज्यादा लुढ़क गया, जबकि जापान का निक्केई करीब 2,780 अंक टूट गया। हांगकांग का हैंगसेंग भी लाल निशान में कारोबार करता दिखा। एशियाई बाजारों की इस कमजोरी ने भारतीय निवेशकों का मनोबल और कमजोर कर दिया।
अमेरिकी बाजारों से भी नहीं मिला कोई सकारात्मक संकेत
अमेरिकी शेयर बाजारों में भी दबाव बना हुआ है। रोजगार आंकड़े उम्मीद से बेहतर आने के बाद अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना कमजोर पड़ गई है। इसके चलते डॉव जोन्स, एसएंडपी 500 और नैस्डैक फ्यूचर्स में गिरावट देखी गई। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 4.5% के ऊपर पहुंचने से निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है।
मिडकैप-स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली, रुपया भी दबाव में
सिर्फ बड़े शेयर ही नहीं बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी 1.5% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। विदेशी निवेशकों की सतर्कता का असर रुपये पर भी पड़ा और भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले 94.95 के स्तर पर बंद हुई। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक वैश्विक तनाव कम नहीं होता, बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।





