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Home कृषि

देश के बड़े जलाशयों में घटा जलस्तर, सिर्फ 30% पानी बचा…अब मानसून पर टिकी उम्मीदें

DigitalDesk by DigitalDesk
June 2, 2026
in कृषि, मुख्य समाचार
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water level country major reservoirs
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मानसून की सक्रियता बढ़ी तो मिल सकती है बड़ी राहत

देश में भीषण गर्मी और कई महीनों से सामान्य से कम बारिश का असर अब जल संसाधनों पर साफ दिखाई देने लगा है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश के 166 प्रमुख जलाशयों में उपलब्ध पानी का स्तर लगातार घट रहा है और वर्तमान में कुल भंडारण क्षमता का केवल 30.67 प्रतिशत पानी ही बचा है। हालांकि यह स्थिति पिछले वर्ष की समान अवधि और दीर्घकालिक औसत से थोड़ी बेहतर बताई जा रही है, लेकिन कई राज्यों में जल संकट की आशंकाएं गहराने लगी हैं।

166 प्रमुख जलाशयों में कुल क्षमता का केवल 30.67 प्रतिशत पानी शेष

दक्षिण भारत के बांधों में सबसे चिंताजनक स्थिति

कम बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें, कई राज्यों में जल संकट की आशंका

उत्तर भारत की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर, पंजाब सबसे मजबूत

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ सप्ताह देश की जल सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे। यदि दक्षिण-पश्चिम मानसून समय पर सक्रिय होकर पर्याप्त वर्षा देता है तो जलाशयों में तेजी से पानी भर सकता है। लेकिन यदि मानसून की रफ्तार धीमी रही या बारिश सामान्य से कम हुई तो पेयजल, सिंचाई और बिजली उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है।

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केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक देश के 166 बड़े जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता 183.565 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) है। इनमें वर्तमान में लगभग 56.3 BCM पानी मौजूद है। इसका अर्थ है कि देश के अधिकांश बड़े जलाशय अपनी क्षमता के एक-तिहाई स्तर पर पहुंच चुके हैं। गर्मी के मौसम में खेती, पेयजल और औद्योगिक जरूरतों के लिए लगातार पानी निकाले जाने के कारण जलाशयों का स्तर तेजी से नीचे आया है।

भारतीय मौसम विभाग के आंकड़े भी इस स्थिति की पुष्टि करते हैं। 1 मार्च से 28 मई के बीच देश के लगभग 29 प्रतिशत जिलों में सामान्य से कम या नगण्य बारिश दर्ज की गई। इससे पहले जनवरी और फरवरी के दौरान भी देश के करीब 70 प्रतिशत हिस्सों में वर्षा की कमी रही थी। लगातार कई महीनों तक कम बारिश होने से नदियों और जलाशयों में पर्याप्त जल प्रवाह नहीं हो पाया, जिसका असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

देश के विभिन्न क्षेत्रों में जल भंडारण की स्थिति अलग-अलग है, लेकिन सबसे अधिक चिंता दक्षिण भारत को लेकर जताई जा रही है। दक्षिणी क्षेत्र के 47 प्रमुख जलाशयों की कुल क्षमता 55.288 BCM है, जबकि इनमें वर्तमान में केवल 12.459 BCM पानी बचा है। यह कुल क्षमता का लगभग 22.5 प्रतिशत है, जो देश के सभी क्षेत्रों में सबसे कम है।

राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो तेलंगाना और कर्नाटक की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक दिखाई देती है। तेलंगाना के जलाशयों में मात्र 16 प्रतिशत और कर्नाटक में लगभग 16.77 प्रतिशत पानी शेष है। केरल में यह आंकड़ा करीब 20 प्रतिशत है, जबकि आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में क्रमशः 35 और 33 प्रतिशत भंडारण दर्ज किया गया है। यदि मानसून में और देरी होती है तो इन राज्यों में सिंचाई और पेयजल संकट गहरा सकता है।

पूर्वी भारत में भी स्थिति बहुत संतोषजनक नहीं है। यहां के 27 प्रमुख जलाशयों में कुल क्षमता के मुकाबले केवल 24 प्रतिशत पानी उपलब्ध है। पश्चिम बंगाल में जल भंडारण लगभग 12.5 प्रतिशत तक सिमट गया है, जबकि ओडिशा में यह 21.5 प्रतिशत है। हालांकि असम, मेघालय और त्रिपुरा में हाल की बारिश के कारण स्थिति कुछ बेहतर बनी हुई है। मेघालय और त्रिपुरा के जलाशयों में 55 से 60 प्रतिशत तक पानी मौजूद है।

उत्तर भारत अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में दिखाई दे रहा है। यहां के 11 प्रमुख जलाशयों में कुल क्षमता का लगभग 39 प्रतिशत पानी उपलब्ध है। पंजाब में सबसे अधिक 59 प्रतिशत भंडारण दर्ज किया गया है, जबकि राजस्थान में 44 प्रतिशत और हिमाचल प्रदेश में करीब 33 प्रतिशत पानी मौजूद है। विशेषज्ञों के अनुसार उत्तर भारत में हालिया पश्चिमी विक्षोभ और पर्वतीय क्षेत्रों में हुई बारिश का कुछ सकारात्मक असर देखने को मिला है।

पश्चिमी भारत में भी जलाशयों पर दबाव बढ़ रहा है। महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा समेत 53 प्रमुख जलाशयों में कुल क्षमता का लगभग 36 प्रतिशत पानी उपलब्ध है। महाराष्ट्र में यह स्तर करीब 28 प्रतिशत तक सीमित है, जो चिंता का विषय माना जा रहा है क्योंकि राज्य के कई हिस्से बड़े बांधों और जलाशयों पर निर्भर हैं।

मध्य भारत की स्थिति मिश्रित है। छत्तीसगढ़ में जलाशयों का स्तर अपेक्षाकृत बेहतर होकर 54 प्रतिशत है, जबकि मध्य प्रदेश में 36 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश में 33 प्रतिशत पानी उपलब्ध है। उत्तराखंड में जल भंडारण केवल 19 प्रतिशत दर्ज किया गया है, जो भविष्य के लिए चिंता बढ़ाने वाला संकेत माना जा रहा है।

जल विशेषज्ञों का कहना है कि देश की कृषि व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति और ऊर्जा उत्पादन काफी हद तक बड़े जलाशयों पर निर्भर करता है। यही जलाशय किसानों को सिंचाई का पानी उपलब्ध कराते हैं, शहरों और गांवों की पेयजल जरूरतें पूरी करते हैं तथा जलविद्युत परियोजनाओं को संचालित रखने में मदद करते हैं। इसलिए इनका जलस्तर देश की जल सुरक्षा का महत्वपूर्ण पैमाना माना जाता है।

फिलहाल मौसम विभाग ने उम्मीद जताई है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून आने वाले दिनों में और सक्रिय होगा। यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो दक्षिण, पश्चिम और मध्य भारत के जलाशयों में पानी का स्तर तेजी से बढ़ सकता है। लेकिन तब तक देश के कई राज्यों को जल प्रबंधन और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर विशेष ध्यान देना होगा।

देश के बड़े जलाशयों में घटता जलस्तर इस बात का संकेत है कि जल संरक्षण और बेहतर जल प्रबंधन की जरूरत पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। अब सबकी निगाहें मानसून पर टिकी हैं, जो आने वाले महीनों में देश की जल स्थिति को तय करेगा।

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Tags: #Major reservoirs in the country #Water levels plummeting #Only 30% water left #Hopes pinned on monsoon #Major reservoirs in the country
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