देश में लगातार बढ़ रही ईंधन कीमतों ने आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी तेल कंपनियों द्वारा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी किए जाने के बाद अब सीएनजी के दाम भी बढ़ गए हैं। बीते कुछ दिनों में यह चौथी बार है जब ईंधन महंगा हुआ है। सोमवार को पेट्रोल 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ, जबकि मंगलवार को सीएनजी के दामों में भी करीब 2 रुपये तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
पेट्रोल-डीजल और CNG महंगी
अब हर घर का बजट बिगड़ने का खतरा
खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा के खर्च पर दबाव
यह बढ़ोतरी केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहने वाली, बल्कि इसका असर धीरे-धीरे हर घर की रसोई, ट्रांसपोर्ट, खेती, ऑनलाइन डिलीवरी और हवाई यात्रा तक दिखाई दे सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईंधन कीमतों में तेजी जारी रही तो आने वाले समय में महंगाई और तेज हो सकती है।
ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर सबसे बड़ा असर
डीजल की कीमत बढ़ने का सबसे सीधा असर ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर पड़ता है। देश में अधिकतर ट्रक, बसें और मालवाहक वाहन डीजल पर चलते हैं। ऐसे में डीजल महंगा होने से सामान ढुलाई की लागत बढ़ जाती है। ट्रक और ट्रांसपोर्ट संगठनों ने संकेत दिए हैं कि वे जल्द ही भाड़ा ब ढ़ाने का फैसला कर सकते हैं। ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से डीजल, टोल टैक्स, टायर और मेंटेनेंस खर्च लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन भाड़े में उसी अनुपात में वृद्धि नहीं हुई। अब ट्रांसपोर्ट कंपनियां अतिरिक्त खर्च ग्राहकों पर डाल सकती हैं। अगर ट्रकों का किराया बढ़ता है, तो इसका असर देशभर में सामानों की कीमतों पर दिखाई देगा। बाजार तक पहुंचने वाला लगभग हर उत्पाद ट्रांसपोर्ट नेटवर्क पर निर्भर करता है, इसलिए महंगाई का दायरा और व्यापक हो सकता है।
फल-सब्जियां और किराना हो सकते हैं महंगे
सब्जियां, फल और अन्य ताजा खाद्य पदार्थ रोजाना ट्रकों और छोटे मालवाहक वाहनों से मंडियों तक पहुंचते हैं। डीजल महंगा होने से इनकी ढुलाई लागत बढ़ेगी। इसका असर सीधे बाजार में मिलने वाले टमाटर, आलू, प्याज, हरी सब्जियों और फलों की कीमतों पर पड़ सकता है। इसके अलावा आटा, चावल, दाल, खाद्य तेल, चीनी, चाय और पैकेज्ड फूड जैसे रोजमर्रा के सामान भी महंगे हो सकते हैं। सप्लाई चेन की लागत बढ़ने से कंपनियां धीरे-धीरे कीमतों में इजाफा कर सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में खाद्य महंगाई और तेज हो सकती है, क्योंकि ईंधन कीमतों का असर सबसे पहले परिवहन आधारित वस्तुओं पर दिखाई देता है।
दूध और डेयरी उत्पादों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं
डेयरी उद्योग भी बड़े स्तर पर ईंधन पर निर्भर है। गांवों से दूध संग्रह करने वाली गाड़ियां, कोल्ड स्टोरेज और सप्लाई सिस्टम डीजल से चलते हैं। ऐसे में परिवहन लागत बढ़ने से दूध कंपनियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
इसका असर दूध, दही, पनीर, मक्खन और चीज जैसे उत्पादों की कीमतों पर देखने को मिल सकता है। डेयरी सेक्टर के जानकारों का कहना है कि यदि डीजल लंबे समय तक महंगा बना रहा तो कंपनियां कीमतें बढ़ाने को मजबूर हो सकती हैं।
FMCG कंपनियों पर बढ़ेगा दबाव
रोजमर्रा के इस्तेमाल की वस्तुएं बनाने वाली एफएमसीजी कंपनियां भी इस बढ़ती महंगाई से अछूती नहीं रहेंगी। साबुन, शैंपू, बिस्किट, तेल, पैकेज्ड फूड और घरेलू उत्पादों की पैकेजिंग और डिलीवरी महंगी हो सकती है।
कई बड़ी कंपनियां पहले ही कुछ उत्पादों की कीमतें बढ़ा चुकी हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कंपनियां या तो कीमतें बढ़ाएंगी या फिर पैकेट का आकार छोटा कर सकती हैं। यानी ग्राहक को कम मात्रा में सामान उसी कीमत पर मिल सकता है।
ओला-उबर और ऑनलाइन फूड डिलीवरी भी होगी महंगी
सीएनजी और पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने से कैब और ऑटो चालकों की लागत बढ़ गई है। ऐसे में आने वाले समय में ओला-उबर जैसी सेवाओं का किराया बढ़ सकता है।
डिलीवरी कंपनियों पर भी इसका असर पड़ेगा। यदि ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ती है तो ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनियां प्लेटफॉर्म फीस, डिलीवरी चार्ज और न्यूनतम ऑर्डर राशि बढ़ा सकती हैं। इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो नियमित रूप से ऑनलाइन खाना ऑर्डर करते हैं।
गिग वर्कर्स और डिलीवरी एजेंटों का कहना है कि ईंधन महंगा होने के बावजूद उनकी कमाई में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हुई है। कई यूनियनों ने न्यूनतम सर्विस रेट तय करने की मांग भी उठाई है।
हवाई यात्रा भी हो सकती है महंगी
कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का असर एविएशन सेक्टर पर भी पड़ता है। एविएशन टरबाइन फ्यूल यानी एटीएफ महंगा होने से एयरलाइंस कंपनियों की लागत बढ़ जाती है।
यदि यह स्थिति जारी रहती है, तो घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के टिकट महंगे हो सकते हैं। इससे यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और हवाई यात्रा की मांग पर भी असर पड़ सकता है।
खेती-किसानी पर बढ़ेगा दबाव
भारत में खेती बड़े पैमाने पर डीजल आधारित मशीनों पर निर्भर है। ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, सिंचाई पंप और ग्रामीण परिवहन सभी में डीजल का उपयोग होता है।
डीजल महंगा होने से किसानों की लागत बढ़ेगी। खेती, सिंचाई और फसल को मंडियों तक पहुंचाने में ज्यादा खर्च आएगा। इसका असर आगे चलकर खाद्यान्न कीमतों पर भी पड़ सकता है।
आम आदमी की जेब पर सीधा असर
बीते 12 दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 7 से 8 रुपये तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। लगातार बढ़ते ईंधन दाम अब केवल वाहन चलाने वालों की समस्या नहीं रह गए हैं।
इसका असर रसोई गैस से लेकर सब्जियों, दूध, किराना, ऑनलाइन डिलीवरी, टैक्सी किराए और हवाई यात्रा तक दिखाई देने लगा है। अगर आने वाले दिनों में तेल और गैस की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आम आदमी के लिए घर का बजट संभालना और मुश्किल हो सकता है।





