भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में अब केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने आधिकारिक तौर पर जांच अपने हाथ में ले ली है। राजधानी भोपाल के कटारा हिल्स थाने में पहले से दर्ज मामले को सीबीआई ने दोबारा रीरजिस्टर किया है। मामले की संवेदनशीलता और लगातार उठ रहे सवालों को देखते हुए एजेंसी ने जांच तेज कर दी है। इस हाई-प्रोफाइल केस में डीएसपी निशु कुशवाहा को जांच अधिकारी (IO) नियुक्त किया गया है, जो अब पूरे घटनाक्रम की तह तक पहुंचने का प्रयास करेंगी।
ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के बाद से ही यह मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। परिवार की ओर से लगाए गए दहेज प्रताड़ना, मानसिक उत्पीड़न और घरेलू हिंसा के आरोपों के बीच अब एफआईआर में शादी के दिन अतिरिक्त 2 लाख रुपये की मांग का जिक्र सामने आने से केस और गंभीर हो गया है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुट गई हैं कि क्या दहेज की मांग और पारिवारिक विवाद ही मौत की बड़ी वजह बने।
सीबीआई ने दोबारा दर्ज किया केस
सीबीआई ने 25 मई 2026 की रात इस मामले में नई एफआईआर दर्ज की। एजेंसी ने केस नंबर RC0522026S0004 के तहत मामला रजिस्टर किया है। इसके साथ ही राज्य पुलिस द्वारा अब तक जुटाए गए दस्तावेज, मेडिकल रिपोर्ट, कॉल रिकॉर्ड और अन्य सबूत अपने कब्जे में लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
सूत्रों के अनुसार सीबीआई की टीम भोपाल पहुंचकर घटनास्थल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भी दोबारा जांच करेगी। एजेंसी उन परिस्थितियों को समझने की कोशिश कर रही है जिनमें ट्विशा शर्मा की मौत हुई।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
सीबीआई ने इस केस में भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धारा 80(2), 85 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है। इसके अलावा दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 भी जोड़ी गई हैं।
धारा 80(2) को विवाहिता की असामान्य परिस्थितियों में मृत्यु से जुड़ा गंभीर प्रावधान माना जा रहा है, जबकि धारा 85 पति या ससुराल पक्ष द्वारा क्रूरता और प्रताड़ना से संबंधित है। वहीं धारा 3(5) सामूहिक आपराधिक जिम्मेदारी से जुड़ी बताई जा रही है। दहेज निषेध अधिनियम की धाराओं के जुड़ने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि जांच एजेंसी दहेज उत्पीड़न के एंगल को बेहद गंभीरता से देख रही है।
शादी के दिन ‘अतिरिक्त 2 लाख’ की मांग का दावा
एफआईआर में सामने आया सबसे अहम तथ्य शादी के दिन अतिरिक्त 2 लाख रुपये की मांग का है। शिकायत के अनुसार शादी के दौरान तय दहेज के अलावा अतिरिक्त रकम मांगी गई थी। आरोप है कि इस मांग को लेकर लगातार तनाव बना हुआ था और शादी के बाद भी ट्विशा को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता रहा।
परिवार का दावा है कि आर्थिक लेन-देन को लेकर कई बार विवाद हुआ और ट्विशा पर दबाव बनाया जाता था। अब सीबीआई बैंक ट्रांजेक्शन, परिवार के बयान, चैट और कॉल रिकॉर्ड के जरिए यह जांच करेगी कि दहेज मांग के आरोप कितने सही हैं।
सीबीआई की जांच में कई बड़े सवाल
अब जांच एजेंसी के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं। क्या ट्विशा की मौत आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई साजिश थी? शरीर पर मिले चोटों के निशान कैसे आए? उसकी मौत से पहले आखिर गिरिबाला के घर में ऐसा क्या हो गया था? ? क्या परिवार के भीतर लंबे समय से तनाव चल रहा था? और क्या किसी ने जांच को प्रभावित करने की कोशिश की? सीबीआई इन सभी पहलुओं की गहराई से जांच करेगी। सूत्रों के मुताबिक एजेंसी डिजिटल साक्ष्यों के साथ मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट का भी दोबारा विश्लेषण करा सकती है।
हाई-प्रोफाइल केस पर पूरे प्रदेश की नजर
मामले में पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और उनके परिवार का नाम सामने आने के बाद यह केस राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया से लेकर अदालत तक इस मामले को लेकर लगातार बहस चल रही है। अब सीबीआई की एंट्री के बाद उम्मीद की जा रही है कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ेगी और ट्विशा शर्मा की मौत की असली वजह सामने आ सकेगी। पूरे प्रदेश की नजर अब एजेंसी की अगली कार्रवाई और संभावित गिरफ्तारी पर टिकी हुई है।
अब खुलेंगे मौत के रहस्य के सात बड़े सवाल
भोपाल की बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में अब केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने जांच की कमान संभाल ली है। 12 मई को कटारा हिल्स स्थित ससुराल में संदिग्ध हालात में फंदे से लटकी मिली 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा की मौत ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी थी। शुरुआती जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिवार के आरोपों के बाद मामला लगातार तूल पकड़ता गया। अब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी और बढ़ते दबाव के बीच CBI ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एजेंसी की स्पेशल क्राइम यूनिट भोपाल पहुंच चुकी है और मामले से जुड़े दस्तावेज, मेडिकल रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है।
CBI ने राज्य पुलिस द्वारा दर्ज केस को दोबारा पंजीबद्ध करते हुए ट्विशा के पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह को आरोपी बनाया है। एजेंसी ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 80(2), 85, 3(5) के साथ दहेज प्रतिषेध कानून की धाराओं को भी शामिल किया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ट्विशा ने आत्महत्या की थी या इसके पीछे कोई गहरी साजिश थी?
मौत से पहले की आखिरी बातचीत बनी अहम सुराग
मामले में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी ट्विशा की अपनी मां से हुई आखिरी फोन कॉल मानी जा रही है। एफआईआर के मुताबिक 12 मई की रात 9 बजकर 41 मिनट पर ट्विशा ने अपनी मां से फोन पर बात की थी। बातचीत के दौरान फोन के पीछे से पति समर्थ सिंह के चिल्लाने की आवाजें सुनाई दे रही थीं। इसके कुछ ही क्षण बाद कॉल अचानक कट गई।
परिवार का दावा है कि जब उन्होंने दोबारा संपर्क करने की कोशिश की तो फोन सास गिरिबाला सिंह ने उठाया और केवल इतना कहा कि “अब वह इस दुनिया में नहीं रही।” इसके बाद फोन काट दिया गया। अब CBI इस आखिरी बातचीत की कॉल डिटेल, मोबाइल लोकेशन और ऑडियो एंगल से भी जांच करेगी। माना जा रहा है कि यही बातचीत केस की दिशा तय कर सकती है।
शरीर पर चोटों ने बढ़ाए हत्या के शक
ट्विशा केस में सबसे बड़ा मोड़ पोस्टमार्टम रिपोर्ट से आया। शुरुआती मेडिकल रिपोर्ट में मौत का कारण फंदे से लटकना बताया गया, लेकिन साथ ही शरीर के कई हिस्सों पर चोट के निशान मिलने की पुष्टि भी हुई। रिपोर्ट के अनुसार ये चोटें मौत से पहले लगी थीं और किसी भारी या भोथरी वस्तु से प्रहार के कारण हो सकती हैं।
यही वजह है कि अब आत्महत्या की थ्योरी पर सवाल उठने लगे हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश करेंगी कि चोटें घरेलू हिंसा के दौरान लगीं या फिर मौत से पहले मारपीट हुई थी। CBI मेडिकल बोर्ड से दूसरी राय लेने के साथ फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद भी ले सकती है।
परिवार ने लगाए दहेज प्रताड़ना के आरोप
ट्विशा के मायके पक्ष ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि शादी के बाद से ही उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। परिवार के अनुसार 9 दिसंबर 2025 को शादी के बाद ससुराल पक्ष दहेज से संतुष्ट नहीं था और पैसों के लेन-देन को लेकर लगातार विवाद होता था।
परिजनों का कहना है कि ट्विशा को मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान किया जाता था। उनका दावा है कि कई बार ट्विशा ने अपनी तकलीफ साझा की थी, लेकिन सामाजिक दबाव और रिश्ते बचाने की कोशिश में वह सब सहती रहीं। अब CBI बैंक ट्रांजेक्शन, चैट रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और परिवार के बयानों के जरिए यह जांच करेगी कि दहेज और पैसों के विवाद में कितनी सच्चाई है।
सास पर जांच को प्रभावित करने का आरोप
इस हाई-प्रोफाइल मामले में पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की भूमिका भी जांच के केंद्र में आ गई है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि गिरिबाला सिंह अपने प्रभाव और संपर्कों का इस्तेमाल कर जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रही थीं। एफआईआर दर्ज होने के बाद से उन्होंने कई टीवी चैनलों को इंटरव्यू दिए, जिनमें ट्विशा की मानसिक स्थिति और इलाज को लेकर बयान दिए गए। पीड़ित पक्ष का कहना है कि ये बयान जांच को दूसरी दिशा में मोड़ने की कोशिश हैं। अब CBI यह भी जांच करेगी कि क्या किसी स्तर पर सबूतों को प्रभावित करने या दबाव बनाने की कोशिश हुई थी।
FIR दर्ज करने में देरी पर भी उठे सवाल
घटना वाली रात करीब 10 बजकर 20 मिनट पर समर्थ सिंह ट्विशा को
लेकर भोपाल के AIIMS में पहुंचा था। एम्स के चिकित्सकों ने ट्विशा को तेरह मई 2026 की रात करीब 12 बजकर 5 मिनट पर मृत घोषित कर दिया था। चिकित्सकों ने पुलिस को स्पष्ट तौर पर यह बताया था कि ट्विशा को मृत अवस्था में अस्पताल लेकर आए थे।
इसके बावजूद पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने में लगभग दो दिन का समय लिया और मामला 15 मई को दर्ज किया गया। अब यह देरी भी जांच के घेरे में है। CBI यह पता लगाएगी कि आखिर केस दर्ज करने में इतनी देर क्यों हुई और क्या किसी दबाव में कार्रवाई धीमी की गई थी।
CBI जिन सात सवालों के जवाब तलाश रही
अब पूरा मामला सात महत्वपूर्ण सवालों के इर्द-गिर्द घूम रहा है। पहला, ट्विशा की मौत वास्तव में कैसे हुई? दूसरा, शरीर पर मिले चोटों के निशान किसने और क्यों पहुंचाए? तीसरा, मौत से पहले घर में क्या हुआ था? चौथा, क्या गिरिबाला सिंह जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रही थीं? पांचवां, क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल हैं? छठा, परिवार में विवाद की असली वजह क्या थी? और सातवां, दहेज और पैसों के लेन-देन के आरोपों में कितनी सच्चाई है? इन सवालों के जवाब ही यह तय करेंगे कि मामला आत्महत्या का है या फिर सुनियोजित अपराध का।





