देश में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार और तेल कंपनियां विपक्ष के निशाने पर आ गई हैं। सरकारी तेल कंपनियों के रिकॉर्ड मुनाफे के बावजूद ईंधन की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी पर कांग्रेस नेताओं ने सरकार से जवाब मांगा है। विपक्ष का आरोप है कि कंपनियां भारी कमाई कर रही हैं, लेकिन उसका बोझ आम जनता पर डाला जा रहा है।
- तेल कंपनियों के मुनाफे पर विपक्ष के सवाल
- मनीष तिवारी ने हरदीप पुरी को घेरा
- ₹77 हजार करोड़ मुनाफे का दावा
- कांग्रेस बोली- जनता से हो रही वसूली
- पेट्रोल-डीजल कीमतों पर सियासी संग्राम तेज
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने पेट्रोलियम मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि जब सरकारी तेल कंपनियां रिकॉर्ड मुनाफा कमा रही हैं, तो फिर पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार क्यों बढ़ाए जा रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आंकड़ों के साथ सरकार को घेरते हुए सवाल उठाए। मनीष तिवारी ने दावा किया कि देश की तीन सरकारी तेल कंपनियों ने वित्त वर्ष 2025-26 में कुल ₹77,280.65 करोड़ का मुनाफा कमाया है। उनके अनुसार यह मुनाफा पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 130 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने यह भी कहा कि जनवरी से मार्च 2026 के बीच, जब वैश्विक स्तर पर इस्राइल-अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बना हुआ था, तब भी इन कंपनियों ने करीब ₹19,470 करोड़ का लाभ दर्ज किया, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 40 प्रतिशत ज्यादा है।
कांग्रेस सांसद ने सवाल उठाया कि यदि कंपनियां इतने फायदे में हैं, तो फिर आम लोगों पर लगातार महंगे ईंधन का बोझ क्यों डाला जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि तेल कंपनियां धीरे-धीरे दाम बढ़ाकर जनता से अतिरिक्त पैसा वसूल रही हैं।
विपक्ष का हमला केवल मनीष तिवारी तक सीमित नहीं रहा। कांग्रेस सांसद Manickam Tagore ने भी सरकार और तेल कंपनियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कंपनियों के घाटे की बात पूरी तरह गलत साबित हो चुकी है। उनके मुताबिक, साल 2024 में भी तेल कंपनियों ने करीब ₹81,000 करोड़ का रिकॉर्ड मुनाफा कमाया था, लेकिन इसके बावजूद देश की जनता ₹100 से ज्यादा कीमत पर पेट्रोल खरीदने को मजबूर रही।
मणिकम टैगोर ने आरोप लगाया कि सरकार और तेल कंपनियां जनता को राहत देने की बजाय मुनाफा कमाने पर ध्यान दे रही हैं। उन्होंने कहा कि फायदा कंपनियों को हो रहा है, जबकि महंगाई का असर आम लोगों को झेलना पड़ रहा है। दरअसल, हाल के दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है। तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव के कारण कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता का असर वैश्विक तेल बाजार पर दिखाई दे रहा है।
हालांकि विपक्ष का तर्क है कि जब कंपनियां रिकॉर्ड मुनाफा कमा रही हैं, तो सरकार को टैक्स में कटौती कर आम जनता को राहत देनी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवहन लागत बढ़ने से खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की चीजों की कीमतें भी बढ़ जाती हैं।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकती हैं। महंगाई पहले से ही आम जनता की चिंता का विषय बनी हुई है और ऐसे में लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों ने विपक्ष को सरकार पर हमला करने का नया मुद्दा दे दिया है। अब सभी की नजर केंद्र सरकार और तेल कंपनियों के अगले फैसले पर टिकी हुई है





