मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव की भोजशाला यात्रा: धार को मिलेगी ‘सरस्वती लोक’ की ऐतिहासिक सौगात
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज धार पहुंचकर ऐतिहासिक भोजशाला में मां वाग्देवी यानी मां सरस्वती के दर्शन और पूजा-अर्चना करेंगे। हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद मुख्यमंत्री की यह पहली भोजशाला यात्रा मानी जा रही है। जिसे प्रदेश में सांस्कृतिक चेतना और विरासत संरक्षण के बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
भोजशाला में सरस्वती लोक निर्माण की तैयारी
हाईकोर्ट फैसले के बाद पहली बार धार पहुंचेंगे CM
मां वाग्देवी के दर्शन-पूजन के बाद बड़ी घोषणा संभव
सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में बड़ा कदम
जल गंगा अभियान में भी करेंगे श्रमदान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में भोजशाला को “सरस्वती लोक” के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा ऐलान होने की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि पूजा-अर्चना के बाद मुख्यमंत्री भोजशाला परिसर के विकास, संरक्षण और सांस्कृतिक पुनरुत्थान को लेकर महत्वपूर्ण घोषणाएं कर सकते हैं। बता दें हाल ही में हाईकोर्ट ने भोजशाला को मां वाग्देवी का मंदिर मानते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। इस फैसले के बाद सबसे पहले मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने खुशी जताई थी और इसे भारतीय संस्कृति तथा आस्था की जीत बताया था। उन्होंने कहा था कि भोजशाला केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने मां वाग्देवी की प्राचीन प्रतिमा को ब्रिटेन से वापस लाने के प्रयासों में भी राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग देने की बात कही थी। इस मुद्दे को लेकर प्रदेश सरकार लगातार सक्रिय दिखाई दे रही है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री की यह यात्रा उसी सांस्कृतिक अभियान का हिस्सा है, जिसके जरिए मध्यप्रदेश को देश की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में स्थापित करने की कोशिश की जा रही है।
भोजशाला का इतिहास भी बेहद गौरवशाली रहा है। माना जाता है कि इसका निर्माण राजा भोज के शासनकाल में हुआ था। राजा भोज द्वारा स्थापित यह स्थान संस्कृत शिक्षा, कला, साहित्य और विज्ञान का प्रमुख केंद्र माना जाता था। वर्षों से यह स्थल इतिहास, आस्था और विवाद — तीनों का केंद्र बना रहा है। अब सरकार इसे “सरस्वती लोक” के रूप में विकसित कर नई पहचान देने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री की यात्रा केवल धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगी। भोजशाला दर्शन के बाद वे “जल गंगा संवर्धन अभियान” में भी हिस्सा लेंगे और श्रमदान करेंगे। इसे पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्धन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है। प्रदेश सरकार इन दिनों जल संरक्षण को लेकर विशेष अभियान चला रही है और मुख्यमंत्री खुद इसमें सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं।
इसके बाद मुख्यमंत्री जनसभा को भी संबोधित करेंगे। उनके भाषण में विकास कार्यों, सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और जनकल्याणकारी योजनाओं पर फोकस रहने की संभावना है। भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों में मुख्यमंत्री की इस यात्रा को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। धार शहर को सजाया गया है और सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव लगातार सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दे रहे हैं। उज्जैन महाकाल लोक के बाद अब भोजशाला को “सरस्वती लोक” के रूप में विकसित करने की योजना प्रदेश की सांस्कृतिक राजनीति में बड़ा कदम मानी जा रही है।
मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव अक्सर कहते हैं कि “हम अपनी जड़ों को मजबूत करेंगे। आस्था का सम्मान करेंगे और विकास की नई ऊंचाइयों को छुएंगे।” उनकी भोजशाला यात्रा को इसी सोच का विस्तार माना जा रहा है। धारवासियों और प्रदेशभर के लोगों को अब मुख्यमंत्री की घोषणाओं का इंतजार है, जो आने वाले समय में भोजशाला की नई पहचान तय कर सकती हैं।




