दक्षिण चीन सागर में चीन (ड्रैगन) की बढ़ती दादागिरी के बीच भारत एक और बड़ा रणनीतिक कदम उठाने जा रहा है। फिलीपींस के बाद अब वियतनाम दूसरा ऐसा दक्षिण-पूर्व एशियाई देश बनने की कगार पर है, जो भारत से घातक ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल खरीदने जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आज से शुरू हो रहे वियतनाम और दक्षिण कोरिया के पांच दिवसीय दौरे के दौरान इस ऐतिहासिक रक्षा सौदे पर मुहर लग सकती है।
फिलीपींस के बाद अब वियतनाम की बारी: चीन को सीधी चुनौती
दक्षिण चीन सागर (South China Sea) में बीजिंग के साथ वियतनाम का पुराना समुद्री सीमा विवाद रहा है। अपनी संप्रभुता और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए वियतनाम भारत की ब्रह्मोस मिसाइल में गहरी दिलचस्पी दिखा रहा है।
- फिलीपींस का उदाहरण: साल 2022 में भारत ने फिलीपींस के साथ 375 मिलियन डॉलर (करीब 3500 करोड़ रुपये) का ब्रह्मोस (एंटी-शिप संस्करण) सौदा किया था, जिसे चीन के खिलाफ एक मजबूत रक्षा कवच माना गया था।
- रणनीतिक महत्व: यदि यह डील फाइनल होती है, तो यह चीन की नाक के नीचे भारत की सबसे बड़ी डिफेंस डील होगी, जिससे बीजिंग के रणनीतिक प्रभुत्व को बड़ा झटका लगेगा।
$500 मिलियन की क्रेडिट लाइन और MRO ऑफर
इस महीने की शुरुआत में वियतनाम के राष्ट्रपति टो लैम के भारत दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग की नींव मजबूत की गई थी। इस दौरान भारत ने वियतनाम को 500 मिलियन डॉलर (करीब 5000 करोड़ रुपये) की क्रेडिट लाइन देने की घोषणा की थी।
इस फंड और सहयोग के तहत निम्नलिखित कदम उठाए जा रहे हैं:
- नौसैनिक ताकत: वियतनाम के लिए 3 से 4 ऑफशोर पेट्रोल वैसल (OPV जहाज) और एक दर्जन से अधिक हाई-स्पीड पेट्रोल बोट्स का निर्माण।
- MRO (प्रबंधन और मरम्मत) ऑफर: भारत ने वियतनाम के सुखोई फाइटर जेट और किलो क्लास सबमरीन के मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉलिंग (MRO) का प्रस्ताव दिया है। गौरतलब है कि भारत और वियतनाम दोनों ही रूसी मूल के सुखोई विमानों और किलो क्लास पनडुब्बियों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे भारत के पास इसकी विशेषज्ञता है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के दौरे का पूरा शेड्यूल
रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, रक्षा मंत्री का यह दौरा दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) के 10 साल पूरे होने के अवसर पर हो रहा है।
| तारीख | देश | मुख्य एजेंडा / कार्यक्रम |
| 18-19 मई, 2026 | वियतनाम | रक्षा मंत्री जनरल फान वेन जियांग से द्विपक्षीय वार्ता, ब्रह्मोस डील पर चर्चा और पूर्व राष्ट्रपति हो चिन मिन्ह के स्मारक पर श्रद्धांजलि। |
| 19-21 मई, 2026 | दक्षिण कोरिया | रक्षा मंत्री अह्न ग्यू बैक से क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर चर्चा, इंडो-कोरिया बिजनेस राउंडटेबल की अध्यक्षता और सियोल में भारतीय शहीदों के वॉर-मेमोरियल का उद्घाटन। |
दौरे पर रवाना होने से पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर लिखा: हमारा ध्यान रणनीतिक सैन्य सहयोग को और अधिक गहरा करने के साथ ही रक्षा औद्योगिक साझेदारी को मजबूत बनाने के साथ ही समुद्री सहयोग को अधिक बढ़ावा देने पर ही रहेगा। जिससे हिंद-प्रशांत यानी Indo-Pacific क्षेत्र में शांति बनी रहेगी और स्थिरता को बढ़ावा भी मिलेगा। इस दौरे से न केवल भारत के रक्षा निर्यात (Defense Export) को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में मदद मिलेगी, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन को संतुलित करने के लिए भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति को और मजबूती मिलेगी। क्या आप इस समाचार को किसी विशेष शब्द सीमा (जैसे 500 या 800 शब्द) में विस्तृत करवाना चाहते हैं, या इसके किसी विशिष्ट पहलू (जैसे ब्रह्मोस मिसाइल की क्षमताएं या भारत-दक्षिण कोरिया संबंध) पर और जानकारी चाहते हैं?





