आज के समय में ज्यादातर घरों में बच्चों की पढ़ाई का मतलब केवल अच्छे अंक लाना बन गया है। परीक्षा में अच्छे नंबर आने पर तारीफ होती है, लेकिन कम अंक आने पर बच्चों पर दबाव बढ़ जाता है। धीरे-धीरे बच्चे यह मानने लगते हैं कि उनकी काबिलियत सिर्फ मार्कशीट से तय होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी सोच बच्चों में डर और तनाव बढ़ाती है, जबकि सही परवरिश उन्हें जिज्ञासु और आत्मविश्वासी बनाती है।
अंकों से आगे बढ़कर सीखने की परवरिश
- बच्चों में जिज्ञासा बढ़ाने वाली 4 आदतें
- सिर्फ मार्क्स नहीं, सीखने पर दें जोर
ऐसे माता-पिता जो बच्चों की सीखने की क्षमता को महत्व देते हैं, वे सिर्फ रिजल्ट पर नहीं बल्कि समझ, आत्मविश्वास और सोचने की क्षमता पर ध्यान देते हैं। सबसे पहली अच्छी आदत यह है कि वे बच्चों से “आज क्या सीखा?” पूछते हैं, न कि “कितने नंबर आए?”। इससे बच्चे पढ़ाई को बोझ नहीं बल्कि नई चीजें जानने का जरिया मानते हैं।
दूसरी आदत है मेहनत और निरंतर सुधार की तारीफ करना। केवल “तुम बहुत होशियार हो” कहने के बजाय अगर माता-पिता बच्चों की कोशिशों की सराहना करें, तो बच्चे चुनौतियों से डरते नहीं हैं।
तीसरी अहम बात यह है कि बच्चों के शौक को प्रतियोगिता न बनाया जाए। जब हर हॉबी को उपलब्धि की दौड़ बना दिया जाता है, तो बच्चे उसका आनंद लेना छोड़ देते हैं।
चौथी और सबसे जरूरी आदत है तुलना से बचना। दूसरे बच्चों से तुलना करने से आत्मविश्वास कमजोर होता है। जो माता-पिता बच्चों की व्यक्तिगत प्रगति पर ध्यान देते हैं, उनके बच्चे ज्यादा स्वतंत्र सोच वाले और आत्मविश्वासी बनते हैं।





