मध्यप्रदेश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतें अब आम लोगों के साथ-साथ सरकार के लिए भी बड़ी चिंता बनती जा रही हैं। ऑयल कंपनियों ने 15 मई से ईंधन के दाम में 3 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर दी है, लेकिन मध्यप्रदेश में इसका असर और ज्यादा दिखाई दे रहा है। यहां पेट्रोल 111 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच चुका है, जबकि डीजल भी 96 रुपए के करीब बिक रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर मध्यप्रदेश में पेट्रोल-डीजल पड़ोसी राज्यों की तुलना में इतना महंगा क्यों है? जब उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में ईंधन सस्ता मिल रहा है, तो मध्यप्रदेश के लोगों को ज्यादा कीमत क्यों चुकानी पड़ रही है? इस सवाल का जवाब टैक्स व्यवस्था और राज्य सरकार की वैट नीति में छिपा हुआ है।
मध्यप्रदेश में पेट्रोल-डीजल सबसे महंगा क्यों? यूपी से 14 रुपए तक ज्यादा दाम, सीमावर्ती जिलों में सूने पड़ रहे पेट्रोल पंप
सीमावर्ती जिलों में दिख रहा बड़ा अंतर
मध्यप्रदेश से लगे पांच राज्यों की तुलना में यहां पेट्रोल-डीजल 2 से 14 रुपए तक महंगा बिक रहा है। सबसे ज्यादा अंतर उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे जिलों में देखने को मिल रहा है। उदाहरण के तौर पर सागर जिले में पेट्रोल 110.34 रुपए और डीजल 95.47 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। जबकि यूपी के झांसी जिले में पेट्रोल 97.71 रुपए और डीजल 90.97 रुपए प्रति लीटर मिल रहा है। यानी सिर्फ सीमा पार करते ही पेट्रोल करीब 14 रुपए सस्ता हो जाता है। यही वजह है कि सीमावर्ती इलाकों के किसान, ट्रांसपोर्टर और आम लोग यूपी से ईंधन खरीदना ज्यादा फायदेमंद समझ रहे हैं।
पांढुर्णा, मंडला और अलीराजपुर में सबसे ज्यादा असर
प्रदेश के कई जिलों में पेट्रोल 110 रुपए के पार पहुंच चुका है। पांढुर्णा और मंडला में पेट्रोल की कीमत 111.29 रुपए प्रति लीटर तक दर्ज की गई है। वहीं मैहर, अलीराजपुर और अनूपपुर में डीजल 96.50 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गया है। राजधानी Bhopal और Indore जैसे बड़े शहरों में भी पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम लोगों की जेब पर भारी पड़ रहे हैं। लगातार बढ़ती कीमतों का असर केवल वाहन चालकों पर नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जरूरतों पर भी पड़ रहा है। परिवहन महंगा होने से सब्जियां, दूध, राशन और अन्य जरूरी सामान भी महंगे होने लगे हैं।
आखिर इतना महंगा क्यों है ईंधन?
मध्यप्रदेश पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह के मुताबिक इसकी सबसे बड़ी वजह राज्य में ज्यादा वैट टैक्स होना है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में पेट्रोल पर करीब 30 प्रतिशत और डीजल पर 19 प्रतिशत तक वैट वसूला जा रहा है। जबकि उत्तर प्रदेश में पेट्रोल पर लगभग 22 प्रतिशत और डीजल पर 12 प्रतिशत टैक्स ही लिया जाता है। यानी दोनों राज्यों के बीच टैक्स में करीब 10 से 11 प्रतिशत का अंतर है। यही वजह है कि यूपी, गुजरात, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में ईंधन सस्ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब टैक्स ज्यादा होगा तो उसका सीधा असर आम उपभोक्ता की जेब पर पड़ेगा।
सूने पड़ रहे पेट्रोल पंप
ईंधन की कीमतों में अंतर का असर अब मध्यप्रदेश के सीमावर्ती जिलों में साफ दिखाई देने लगा है। सागर, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, रीवा, सतना, मऊगंज, सिंगरौली और अशोकनगर जैसे जिलों के लोग पड़ोसी राज्यों से पेट्रोल-डीजल भरवाने लगे हैं। इस वजह से कई पेट्रोल पंपों पर बिक्री कम हो गई है। पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि ट्रांसपोर्ट कारोबारी और किसान खासतौर पर यूपी और गुजरात से डीजल खरीदना पसंद कर रहे हैं। इससे राज्य सरकार को राजस्व का नुकसान भी हो रहा है, क्योंकि ईंधन की बिक्री घटने से टैक्स कलेक्शन प्रभावित हो रहा है।
महंगाई की मार और बढ़ी
ईंधन के दाम बढ़ने का असर अब हर क्षेत्र में दिखाई देने लगा है। परिवहन लागत बढ़ने से बाजार में सामान महंगा पहुंच रहा है। कमर्शियल गैस सिलेंडर पहले ही महंगा हो चुका है। होटल और रेस्टोरेंट में खाने की कीमतें बढ़ रही हैं। दूध और अन्य जरूरी वस्तुओं के दाम भी बढ़ने लगे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री Kamal Nath ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश की जनता देश में सबसे ज्यादा महंगा पेट्रोल-डीजल खरीद रही है। उन्होंने सरकार से वैट और एक्साइज ड्यूटी कम करने की मांग की है ताकि लोगों को राहत मिल सके।
क्या सरकार टैक्स कम करेगी?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मध्यप्रदेश सरकार ईंधन पर लगने वाला वैट टैक्स कम करेगी? यदि राज्य सरकार टैक्स में कुछ कटौती करती है तो पेट्रोल-डीजल के दाम तुरंत कम हो सकते हैं। इससे आम लोगों को राहत मिलेगी और सीमावर्ती जिलों से दूसरे राज्यों में जा रही ईंधन खरीदारी भी कम हो सकती है। हालांकि सरकार के सामने चुनौती यह भी है कि पेट्रोल-डीजल से मिलने वाला टैक्स राज्य की आय का बड़ा स्रोत है। ऐसे में टैक्स घटाने का फैसला आसान नहीं माना जा रहा।
आम आदमी पर सबसे ज्यादा असर
पेट्रोल-डीजल की कीमतें केवल वाहन चलाने वालों का मुद्दा नहीं रह गई हैं। इसका असर खेती, व्यापार, परिवहन और घरेलू बजट तक पहुंच चुका है। प्रदेश में पहले ही भीषण गर्मी, महंगी गैस और बढ़ती महंगाई से लोग परेशान हैं। ऐसे में ईंधन के बढ़ते दाम आम आदमी की मुश्किलें और बढ़ा रहे हैं। अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार महंगाई से राहत देने के लिए कोई बड़ा फैसला लेती है या फिर मध्यप्रदेश में पेट्रोल-डीजल देश के सबसे महंगे ईंधन में शामिल बना रहेगा।





