Narendra Modi द्वारा हाल ही में की गई ईंधन बचत और अनावश्यक खर्च घटाने की अपील का असर अब देशभर की राजनीति और प्रशासन में साफ दिखाई देने लगा है। कई राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री अपने काफिले में वाहनों की संख्या घटाने लगे हैं।
PM मोदी ने खुद घटाया काफिला
प्रधानमंत्री ने न केवल अपील की बल्कि खुद उदाहरण पेश करते हुए अपने काफिले में करीब 50% तक कटौती की है। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों को शामिल करने पर भी जोर दिया गया है, जिससे सरकारी परिवहन अधिक पर्यावरण-अनुकूल बन सके।
अमित शाह का भी फोकस फ्यूल सेविंग पर
केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने भी काफिले में वाहनों की संख्या कम करने की दिशा में कदम उठाए हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर कटौती का प्रतिशत घोषित नहीं किया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि बड़ा बदलाव जल्द दिख सकता है।
उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ा बदलाव
Yogi Adityanath ने अपने काफिले में लगभग 50% वाहनों की कटौती का आदेश दिया है। साथ ही उन्होंने सरकारी बैठकों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट करने और “नो व्हीकल डे” जैसे विकल्पों पर भी विचार शुरू किया है।
अन्य राज्यों में भी असर
- Bhajan Lal Sharma ने काफिला छोटा किया
- Bhupendra Patel ने भी वाहनों की संख्या घटाई
- Devendra Fadnavis ने विदेश यात्राओं और काफिले दोनों पर नियंत्रण बढ़ाया
- Mohan Yadav ने भी अनावश्यक वाहन उपयोग पर सख्ती की
दिल्ली में मंत्री मेट्रो से पहुंचे दफ्तर
Rekha Gupta की सरकार के कई मंत्रियों ने भी बदलाव दिखाया है। कुछ मंत्री मेट्रो से ऑफिस पहुंचे तो कुछ ने इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल शुरू किया है, जिससे सरकारी वाहनों पर निर्भरता कम हो रही है।
बिहार में भी फ्यूल सेविंग मॉडल लागू
बिहार में भी CM Samrat Choudhary ने भी सरकारी काफिलों में कटौती और वर्चुअल मीटिंग्स को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं।
“कम गाड़ी, ज्यादा डिजिटल”
सरकारी बैठकों, सेमिनार और वर्कशॉप को अब वर्चुअल मोड में शिफ्ट करने पर जोर दिया जा रहा है। कई राज्यों में सार्वजनिक परिवहन और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की नीति तेजी से लागू हो रही है। PM मोदी की अपील अब सिर्फ बयान नहीं, बल्कि एक प्रशासनिक अभियान में बदलती दिख रही है। हालांकि यह बदलाव मुख्य रूप से भाजपा शासित राज्यों में दिखाई दे रहा है, लेकिन आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि अन्य राजनीतिक दल इस पहल को कितना अपनाते हैं। (प्रकाश कुमार पाण्डेय)





