पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz में अस्थिरता के बीच भारत में ऊर्जा संकट और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी तनाव का असर अब भारतीय राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की ईंधन बचत अपील के बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार पर सर्वदलीय बैठक बुलाने का दबाव तेज कर दिया है।
Sharad Pawar समेत कई विपक्षी नेताओं ने कहा है कि प्रधानमंत्री की अपील का असर आम नागरिकों, उद्योगों और निवेशकों पर पड़ सकता है, इसलिए सरकार को सभी राजनीतिक दलों को विश्वास में लेना चाहिए। विपक्ष का आरोप है कि मौजूदा हालात सरकार की तैयारी की कमी को उजागर करते हैं और इस मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए।
सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार विपक्ष को भरोसे में लेने के लिए जल्द कोई बड़ा कदम उठा सकती है। माना जा रहा है कि सरकार एक विस्तृत मीडिया ब्रीफिंग या ऑल पार्टी मीटिंग बुलाने पर विचार कर रही है। सोमवार को रक्षा मंत्री Rajnath Singh की अध्यक्षता में मंत्रियों के समूह की बैठक में स्थिति की समीक्षा की गई। बैठक में ऊर्जा संकट से निपटने के लिए टास्क फोर्स बनाने और प्रधानमंत्री की अपील को तेजी से लागू करने पर चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और कार-पूलिंग को बढ़ावा देने, वर्क फ्रॉम होम अपनाने, अनावश्यक विदेश यात्राएं टालने और सोने की गैर-जरूरी खरीदारी रोकने की अपील की थी। सरकार का उद्देश्य विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करना और संभावित तेल संकट के असर को सीमित रखना है।
मंगलवार को हुई अंतर-मंत्रालयी मीडिया ब्रीफिंग में पेट्रोलियम, विदेश और शिपिंग मंत्रालय के अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि देश के पास लगभग 60 दिनों का कच्चे तेल का भंडार उपलब्ध है। हालांकि उन्होंने संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने लोगों से सार्वजनिक परिवहन, इलेक्ट्रिक वाहनों और कार-पूलिंग को अपनाने की अपील की।
इस बीच केंद्रीय जल शक्ति मंत्री C. R. Patil ने प्रधानमंत्री की अपील पर सबसे पहले अमल करते हुए अपनी सुरक्षा में लगी अतिरिक्त गाड़ियों और एस्कॉर्ट वाहनों का उपयोग बंद करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात में ईंधन बचाना हर जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि नेतृत्व खुद उदाहरण पेश करेगा तो जनता में भी सकारात्मक संदेश जाएगा।
सरकार की चिंता केवल ऊर्जा संकट तक सीमित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 से 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी हैं। इससे भारत में महंगाई बढ़ने और रुपये पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। मंगलवार को शेयर बाजार में भी इसका असर देखने को मिला और सेंसेक्स गिरावट के साथ बंद हुआ।
लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi समेत कई नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि तेल संकट लंबा खिंचा तो आम जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ सकता है। विपक्ष सरकार से मांग कर रहा है कि वह अपनी रणनीति सार्वजनिक करे और विपक्षी दलों के साथ चर्चा करे।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि विदेश, रक्षा और पेट्रोलियम मंत्रालय लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही, समुद्री बीमा और कूटनीतिक प्रयासों पर तेजी से काम किया जा रहा है। पीएमओ भी पूरे घटनाक्रम की निगरानी कर रहा है और मंत्रालयों को राष्ट्रीय एकता तथा आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल सरकार की कोशिश है कि ऊर्जा संकट और बढ़ती महंगाई के बीच विपक्ष को राजनीतिक मुद्दा बनाने का मौका न मिले, जबकि दूसरी ओर जनता में घबराहट भी न फैले। आने वाले दिनों में केंद्र सरकार की अगली रणनीति पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।





