विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की लगातार बड़ी जीत और पश्चिम बंगाल में पहली बार दो-तिहाई बहुमत के साथ सरकार बनाने के बाद अब अगले राष्ट्रपति चुनाव में भी पार्टी की स्थिति बेहद मजबूत मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा चुनाव 2024 में बहुमत घटने के बावजूद राज्यों में बढ़ती ताकत ने बीजेपी को फिर निर्णायक स्थिति में पहुंचा दिया है।
- राष्ट्रपति चुनाव 2027 में बीजेपी की बढ़ी ताकत, राज्यों की जीत से बदले समीकरण
- बंगाल फतह के बाद राष्ट्रपति चुनाव में बीजेपी की राह हुई आसान
- लोकसभा में झटका, लेकिन विधानसभा जीतों ने बीजेपी को फिर बनाया मजबूत
- उत्तर प्रदेश से बंगाल तक… राष्ट्रपति चुनाव में निर्णायक बन सकता है बीजेपी का नेटवर्क
- सहयोगियों के सहारे वाली सरकार से निर्णायक ताकत तक, बीजेपी ने कैसे बदली तस्वीर
- राष्ट्रपति चुनाव में बड़े राज्यों की भूमिका अहम, बीजेपी को मिल रहा सीधा फायदा
- महाराष्ट्र, बिहार और बंगाल की जीत ने बढ़ाया बीजेपी का राजनीतिक दबदबा
राष्ट्रपति चुनाव में सांसदों और विधायकों के वोट मिलाकर निर्वाचक मंडल तैयार होता है। इसमें संसद और विधानसभाओं की वोट हिस्सेदारी बराबर होती है, लेकिन हर विधायक के वोट का मूल्य राज्य की जनसंख्या के आधार पर अलग-अलग तय किया जाता है। इसी वजह से बड़े राज्यों की विधानसभाएं राष्ट्रपति चुनाव में बेहद अहम भूमिका निभाती हैं।
खासकर उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों का प्रभाव सबसे अधिक माना जाता है। बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के एक विधायक के वोट का मूल्य 208 है, जो देश में सबसे अधिक है। इसके मुकाबले सिक्किम के एक विधायक के वोट का मूल्य केवल 7 है। राष्ट्रपति चुनाव में उत्तर प्रदेश के विधायकों का कुल वोट मूल्य 83 हजार 800 से अधिक बैठता है, इसलिए यह राज्य सबसे निर्णायक माना जा रहा है।
लोकसभा चुनाव 2024 में बीजेपी की सीटें 303 से घटकर 240 पर आने से निर्वाचक मंडल में पार्टी के वोट मूल्य में करीब 44 हजार 100 की कमी आई थी। उस समय विपक्ष ने दावा किया था कि पार्टी अब सहयोगियों पर निर्भर हो गई है और उसका राजनीतिक प्रभुत्व कमजोर पड़ सकता है। लेकिन पिछले दो वर्षों में राजनीतिक तस्वीर तेजी से बदली है। हरियाणा में जीत, महाराष्ट्र विधानसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की संख्या 237 तक पहुंचना और बिहार में गठबंधन की मजबूत स्थिति ने बीजेपी को फिर बढ़त दिलाई है। सबसे बड़ा बदलाव पश्चिम बंगाल में देखने को मिला, जहां बीजेपी के विधायकों की संख्या 77 से बढ़कर 207 तक पहुंच गई। इससे राष्ट्रपति चुनाव के निर्वाचक मंडल में पार्टी की ताकत काफी बढ़ गई है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अब बीजेपी और उसके सहयोगी दल राष्ट्रपति चुनाव में अपनी पसंद का उम्मीदवार तय करने की स्थिति में दिखाई दे रहे हैं। साथ ही राज्यसभा में बढ़ती संख्या भी पार्टी की रणनीतिक मजबूती मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार अगर अगले वर्ष तक राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव नहीं हुआ तो राष्ट्रपति चुनाव 2027 में बीजेपी का प्रभाव पहले से कहीं अधिक मजबूत दिखाई दे सकता है।





