बंगाल चुनाव का असर! यूपी चुनाव से पहले सपा ने I-PAC से तोड़ा रिश्ता
चुनावी रणनीति में बड़ा बदलाव
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने बड़ा रणनीतिक फैसला लेते हुए चुनावी रणनीतिकार संस्था I-PAC के साथ अपना करार समाप्त कर दिया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने करीब ढाई महीने पहले चुनाव प्रबंधन और सोशल मीडिया अभियान की जिम्मेदारी I-PAC और शो टाइम नाम की दो कंपनियों को सौंपी थी। अब जानकारी सामने आई है कि I-PAC पार्टी के लिए आगे काम नहीं करेगी, जबकि शो टाइम अपना कार्य जारी रखेगी।
करीबी मुकाबले वाली सीटों पर कर रही थी काम
सूत्रों के अनुसार I-PAC की टीम विशेष रूप से उन विधानसभा सीटों पर फोकस कर रही थी, जहां पिछली बार समाजवादी पार्टी बेहद कम अंतर से चुनाव हार गई थी। कंपनी की अधिकांश टीम उत्तर प्रदेश के बाहर से काम कर रही थी और बूथ मैनेजमेंट से लेकर सोशल मीडिया नैरेटिव तैयार करने तक की जिम्मेदारी संभाल रही थी।
बंगाल विवाद के बाद बढ़ी मुश्किलें
बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल से जुड़े विवादों के बाद यह समझौता कमजोर पड़ने लगा था। हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने I-PAC के निदेशक विनेश चंदेल को कथित बंगाल कोयला तस्करी मामले में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में गिरफ्तार किया था। इसके बाद कंपनी की कार्यप्रणाली और राजनीतिक साझेदारियों पर सवाल उठने लगे।
छापों और जांच से बढ़ी अनिश्चितता
सूत्रों का कहना है कि चुनाव आयोग की कार्रवाई और कार्यालयों पर छापों के बाद सपा नेतृत्व ने दूरी बनाना शुरू कर दिया था। पार्टी नहीं चाहती थी कि किसी विवाद का असर सीधे चुनावी तैयारियों पर पड़े। इसी वजह से अखिलेश यादव ने समय रहते चुनावी रणनीति में बदलाव का फैसला लिया।
यूपी चुनाव पर क्या पड़ेगा असर?
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि I-PAC से अलग होने के बाद समाजवादी पार्टी अब अपनी पारंपरिक संगठनात्मक ताकत और स्थानीय नेताओं पर ज्यादा भरोसा करेगी। हालांकि शो टाइम के जरिए डिजिटल और सोशल मीडिया कैंपेन जारी रहेगा। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सपा नई रणनीति के साथ भाजपा को कितनी चुनौती दे पाती है।





