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Home धर्म

मकान की नींव में सर्प और कलश क्यों गाड़ा जाता है?…जानें मान्यताओं से जुड़ी सदियों पुरानी परंपरा

DigitalDesk by DigitalDesk
May 8, 2026
in धर्म, मुख्य समाचार
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snakes and urns buried in the foundation
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आस्था, वास्तु और पौराणिक मान्यताओं से जुड़ी सदियों पुरानी परंपरा

भारत की सनातन परंपराओं में घर बनाना केवल ईंट, पत्थर और सीमेंट का काम नहीं माना गया, बल्कि इसे एक आध्यात्मिक और धार्मिक प्रक्रिया के रूप में देखा गया है। यही कारण है कि नए मकान की शुरुआत भूमि पूजन और नींव पूजन से की जाती है। कई जगहों पर आज भी मकान की नींव में चांदी का नाग, तांबे का कलश, सिक्के या धार्मिक प्रतीक दबाने की परंपरा निभाई जाती है। आधुनिक समय में भले ही इसे अंधविश्वास कहकर नजरअंदाज किया जाए, लेकिन भारतीय संस्कृति और पौराणिक मान्यताओं में इसका गहरा आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक आधार बताया गया है।

शेषनाग और पृथ्वी धारण करने की मान्यता

सनातन धर्म के ग्रंथों में शेषनाग का विशेष महत्व बताया गया है। Shrimad Bhagavatam के पांचवें स्कंध में वर्णन मिलता है कि पृथ्वी के नीचे पाताल लोक स्थित है, जिसके स्वामी शेषनाग हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पृथ्वी शेषनाग के फण पर टिकी हुई है।

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Mahabharata के भीष्म पर्व में उल्लेख मिलता है—

“शेष चाकल्पयद्देवमनन्तं विश्वरूपिणम् ।
यो धारयति भूतानि धरां चेमां सपर्वताम् ॥”

अर्थात परमदेव ने अनंत स्वरूप शेषनाग को उत्पन्न किया, जो पर्वतों सहित पूरी पृथ्वी को धारण किए हुए हैं। इसी विश्वास के आधार पर माना जाता है कि जिस प्रकार शेषनाग संपूर्ण पृथ्वी को स्थिरता प्रदान करते हैं, उसी प्रकार मकान की नींव में स्थापित नाग भवन को मजबूती और सुरक्षा प्रदान करता है।

पाताल लोक और नागों का रहस्य

पौराणिक कथाओं में पाताल लोक को केवल अंधकारमय संसार नहीं, बल्कि ऐश्वर्य और वैभव से भरपूर बताया गया है। अतल, वितल, सतल, तलातल, महातल, रसातल और पाताल—इन सात लोकों को नागों और दैत्यों का निवास स्थान माना गया है।

कथाओं के अनुसार यहां वासुकी जैसे महान नाग निवास करते हैं। सूर्य और चंद्रमा के अभाव में वहां दिन-रात का भेद नहीं होता और नागों के मस्तक की मणियां प्रकाश प्रदान करती हैं। भारतीय समाज में नागों को केवल सर्प नहीं, बल्कि ऊर्जा, संरक्षण और स्थिरता का प्रतीक माना गया। यही कारण है कि भवन निर्माण जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में नाग पूजा को शुभ माना गया।

नींव पूजन में कलश का महत्व

घर की नींव में केवल नाग ही नहीं, बल्कि कलश स्थापित करने की परंपरा भी है। हिंदू धर्म में कलश को भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है। पूजन के समय कलश में जल, दूध, दही, घी, पुष्प और सिक्के डाले जाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि शेषनाग क्षीरसागर में निवास करते हैं, इसलिए दूध और दही अर्पित कर उन्हें आमंत्रित किया जाता है कि वे भवन की रक्षा करें। कलश में रखा सिक्का समृद्धि और धन का प्रतीक माना जाता है। वास्तुशास्त्र के अनुसार कलश सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है और नकारात्मक शक्तियों को दूर रखता है। इसीलिए नींव पूजन में कलश की स्थापना को शुभ माना गया।

भगवान शिव और नाग का संबंध

सनातन धर्म में नागों का संबंध केवल शेषनाग तक सीमित नहीं है। भगवान Shiva स्वयं नागों को अपने आभूषण के रूप में धारण करते हैं। वहीं भगवान Krishna ने Bhagavad Gita में कहा—

“अनन्तश्चास्मि नागानाम्”

अर्थात नागों में मैं स्वयं शेषनाग हूं।

मान्यता है कि भगवान विष्णु के अवतार लक्ष्मण और बलराम भी शेषनाग के अवतार माने जाते हैं। इसलिए नाग केवल भय का प्रतीक नहीं, बल्कि शक्ति, भक्ति और संरक्षण के प्रतीक माने गए हैं।

वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण

हालांकि आधुनिक विज्ञान नींव में नाग या कलश दबाने को सीधे तौर पर भवन की मजबूती से नहीं जोड़ता, लेकिन मनोवैज्ञानिक रूप से इसका गहरा प्रभाव माना जाता है।  धर्म ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि जब कोई जातक संपूर्ण विधि-विधान और आस्था मन में धारण कर घर बनाता है, तो उस जातक के मन में सुरक्षा ही नहीं विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का भाव भी उत्पन्न होता है। धर्म ग्रंथ कहते हैं कि जातक में यही भाव उसके परिवार को मानसिक संतुलन और आत्मविश्वास प्रदान करता है।

पुराने समय में लोग प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए भी ऐसी परंपराएं निभाते थे। सर्पों को धरती का रक्षक माना जाता था, इसलिए उनकी पूजा कर भूमि से अनुमति लेने की प्रतीकात्मक परंपरा विकसित हुई।

बदलते समय में परंपराओं का स्वरूप

आज शहरी जीवन और आधुनिक तकनीक के दौर में कई लोग इन परंपराओं को केवल धार्मिक कर्मकांड मानते हैं, जबकि कुछ लोग अब भी पूरी श्रद्धा से नींव पूजन कराते हैं। कई परिवार चांदी का नाग, तांबे का कलश या पंचधातु के प्रतीक स्थापित करते हैं। धर्माचार्यों का कहना है कि इन परंपराओं का मूल उद्देश्य भय पैदा करना नहीं, बल्कि घर निर्माण को एक पवित्र कार्य मानना है। आस्था और संस्कृति के माध्यम से परिवार में सकारात्मकता और एकता बनी रहती है।

आस्था और विश्वास का संगम

मकान की नींव में सर्प और कलश गाड़ने की परंपरा भारतीय संस्कृति में आस्था, वास्तु और पौराणिक विश्वासों का अनूठा संगम है। यह केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि उस सोच का प्रतीक है जिसमें धरती, प्रकृति और दिव्य शक्तियों के प्रति सम्मान का भाव छिपा हुआ है। भले ही आधुनिक युग में लोग इसे अलग-अलग नजरिए से देखें, लेकिन सदियों पुरानी यह परंपरा आज भी भारतीय समाज में जीवित है और लोगों के विश्वास का हिस्सा बनी हुई है।

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Tags: #serpent and urn #foundation of the house #Why are snakes and urns buried? #centuries old tradition#snakes and urns buried in the foundation
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