72 घंटे में पाकिस्तान पर भारी पड़ा भारत, अमेरिकी डिफेंस एक्सपर्ट ने बताया ऑपरेशन सिंदूर का पूरा गणित
हवाई श्रेष्ठता से टूटी पाकिस्तान की कमर, भारतीय रणनीति ने बदल दिया युद्ध का समीकरण
अमेरिकी सैन्य विशेषज्ञ जॉन स्पेंसर ने ऑपरेशन सिंदूर को आधुनिक युद्ध का बड़ा उदाहरण बताते हुए कहा है कि भारत ने महज 72 घंटे के भीतर पाकिस्तान पर ऐसी रणनीतिक बढ़त बना ली, जिससे उसकी हवाई क्षमता लगभग निष्क्रिय हो गई। स्पेंसर के मुताबिक यह जीत किसी एक बड़े हमले का नतीजा नहीं थी, बल्कि कई दिनों तक चली सुनियोजित सैन्य रणनीति, एयर डिफेंस नेटवर्क पर लगातार दबाव और तकनीकी श्रेष्ठता का परिणाम थी।
ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर स्पेंसर ने विस्तार से बताया कि 10 मई 2025 तक भारत ने पाकिस्तान के ऊपर प्रभावी हवाई श्रेष्ठता स्थापित कर ली थी। इसके बाद पाकिस्तान एयर फोर्स के लिए सुरक्षित तरीके से ऑपरेशन जारी रखना बेहद मुश्किल हो गया था। आखिरकार पाकिस्तान को युद्धविराम की मांग करनी पड़ी।
आतंकवादी ठिकानों पर हमले से शुरू हुआ ऑपरेशन
मई 2025 में 6 और 7 मई की रात भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकवादी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे। भारतीय सेना का उद्देश्य सीमापार आतंकी ढांचे को नष्ट करना और भविष्य के हमलों की क्षमता को कमजोर करना था।
भारत की इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान ने जवाबी हमला करते हुए भारतीय शहरों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की। इसके जवाब में भारत ने और अधिक आक्रामक रणनीति अपनाई और पाकिस्तानी एयरबेस, एयर डिफेंस सिस्टम तथा सैन्य ठिकानों पर लगातार प्रहार किए। चार दिन तक चले इस संघर्ष का अंत 10 मई को युद्धविराम के साथ हुआ, लेकिन तब तक पाकिस्तान को भारी सैन्य और रणनीतिक नुकसान झेलना पड़ चुका था।
भारतीय रणनीति का केंद्र था एयर डिफेंस सिस्टम को खत्म करना
अमेरिकी सेना के पूर्व मेजर और वर्तमान में मैडिसन पॉलिसी फोरम में वॉर स्टडीज चेयर जॉन स्पेंसर ने बताया कि भारत की सबसे बड़ी सफलता पाकिस्तान की एयर डिफेंस क्षमता को कमजोर करने में रही। स्पेंसर के अनुसार 8 मई को भारतीय सेना ने पाकिस्तान के चूनियां और पासरूर क्षेत्रों में स्थित एयर डिफेंस ठिकानों पर बड़े हमले किए। इन हमलों में अर्ली वार्निंग रडार सिस्टम और HQ-9 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल बैटरियों को निशाना बनाया गया। 9 मई को भी इसी तरह के हमले जारी रहे।
इन हमलों के लिए भारत ने लॉइटरिंग मुनिशन का व्यापक इस्तेमाल किया। ये ऐसे हथियार होते हैं जो लक्ष्य क्षेत्र में लंबे समय तक मंडराते रहते हैं और सही समय मिलने पर हमला करते हैं। इससे पाकिस्तान के रडार सिस्टम और मिसाइल नेटवर्क लगातार दबाव में रहे।
स्पेंसर ने कहा कि इन हमलों ने पाकिस्तान की देखने, समन्वय बनाने और जवाबी कार्रवाई करने की क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया। आधुनिक हवाई युद्ध में यह सबसे निर्णायक कारकों में से एक माना जाता है।
S-400 ने बदल दिया पूरे युद्ध का समीकरण
स्पेंसर ने भारत के S-400 एयर डिफेंस सिस्टम को ऑपरेशन सिंदूर का “गेम चेंजर” बताया। उनके अनुसार भारत ने लगभग 300 किलोमीटर दूर मौजूद पाकिस्तान के एक हाई वैल्यू एयरबोर्न प्लेटफॉर्म को निशाना बनाया। इस घटना के बाद पाकिस्तान एयर फोर्स को अपने विमानों की उड़ान और तैनाती को लेकर बेहद सतर्क होना पड़ा। पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों का ऑपरेशन क्षेत्र सीमित हो गया और उनकी रणनीतिक स्वतंत्रता लगभग खत्म हो गई। विशेषज्ञों के मुताबिक जब किसी देश की एयर फोर्स खुलकर ऑपरेशन नहीं कर पाती, तो उसकी आक्रामक क्षमता तेजी से कमजोर पड़ जाती है। ऑपरेशन सिंदूर में यही स्थिति पाकिस्तान के साथ देखने को मिली।
शुरुआती सफलता के बावजूद पाकिस्तान टिक नहीं पाया
जॉन स्पेंसर ने माना कि संघर्ष के शुरुआती घंटों में पाकिस्तान ने कुछ भारतीय विमानों को नुकसान पहुंचाया था। पाकिस्तान ने इसे प्रचार के रूप में भी इस्तेमाल किया, लेकिन स्पेंसर का कहना है कि किसी युद्ध का परिणाम शुरुआती घटनाओं से तय नहीं होता। उन्होंने कहा कि भारत ने शुरुआती झटकों के बावजूद अपनी सैन्य गति और दबाव को बनाए रखा। धीरे-धीरे पाकिस्तान की रक्षा प्रणाली कमजोर पड़ती गई और उसकी जवाबी क्षमता सीमित होती चली गई।
भारत की स्वदेशी तकनीक बनी सबसे बड़ी ताकत
संघर्ष के दौरान पाकिस्तान ने सैकड़ों ड्रोन, CM-400AKG मिसाइलें, फतेह और हत्फ रॉकेट दागे, लेकिन भारत की एकीकृत एयर डिफेंस प्रणाली ने इन अधिकांश हमलों को विफल कर दिया। भारत ने अपनी स्वदेशी आईएसीसीसीएस यानी Integrated Air Command, Control and Communication System और आकाशतीर नेटवर्क का इस्तेमाल किया। इन प्रणालियों ने रियल टाइम में खतरों की पहचान कर उन्हें निष्क्रिय करने में बड़ी भूमिका निभाई। स्पेंसर के अनुसार भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका बेहतर नेटवर्क इंटीग्रेशन और कमांड सिस्टम था। भारतीय सेना ने अलग-अलग रक्षा प्रणालियों को एकीकृत तरीके से इस्तेमाल किया, जिससे युद्ध के दौरान तेजी से फैसले लिए जा सके।
आधुनिक युद्ध में सिर्फ लड़ाकू विमान नहीं लड़ते
जॉन स्पेंसर ने कहा कि आधुनिक युद्ध केवल फाइटर जेट्स की लड़ाई नहीं रह गया है। अब युद्ध में इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, एयर डिफेंस नेटवर्क, कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम, ड्रोन टेक्नोलॉजी और रियल टाइम डेटा शेयरिंग बेहद महत्वपूर्ण हो चुके हैं। उनके मुताबिक भारत ने इन सभी क्षेत्रों में बेहतर तालमेल और तकनीकी क्षमता दिखाई। वहीं पाकिस्तान मुख्य रूप से चीन से मिले हथियारों और सिस्टम पर निर्भर रहा। शुरुआती दौर में उन्हें कुछ सफलता जरूर मिली, लेकिन जैसे-जैसे भारत ने पाकिस्तान के महत्वपूर्ण सैन्य नोड्स को निशाना बनाया, उसकी युद्ध क्षमता कमजोर होती चली गई।
रणनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा ऑपरेशन सिंदूर
ऑपरेशन सिंदूर को अब भारत की बड़ी रणनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। जॉन स्पेंसर जैसे अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने साबित किया कि मजबूत योजना, स्वदेशी तकनीक, एयर डिफेंस नेटवर्क और लगातार सैन्य दबाव के जरिए किसी भी शुरुआती चुनौती को निर्णायक जीत में बदला जा सकता है। यह संघर्ष भविष्य के युद्धों की दिशा भी दिखाता है, जहां सिर्फ हथियारों की संख्या नहीं, बल्कि सिस्टम की मजबूती, नेटवर्क इंटीग्रेशन और तकनीकी श्रेष्ठता जीत तय करेगी।





