बिहार की राजनीति में कैबिनेट विस्तार से ठीक पहले हलचल तेज हो गई है। नई सरकार के गठन के बाद अब मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी को लेकर खींचतान खुलकर सामने आ रही है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने साफ संकेत दे दिए हैं कि वह सरकार में मजबूत भागीदारी चाहती है, जिससे NDA के भीतर समीकरणों पर सबकी नजरें टिक गई हैं।
कैबिनेट विस्तार से पहले JDU की बड़ी मांग ने NDA के भीतर बढ़ाया सियासी तापमान
मंत्रिमंडल विस्तार से एक दिन पहले JDU की ओर से 16 मंत्री पदों की मांग ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने सार्वजनिक रूप से यह दावा रखते हुए संकेत दिया कि JDU सरकार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के मूड में है। इस बयान के बाद गठबंधन के अंदर नई बहस छिड़ गई है।
शपथ ग्रहण की तैयारियां पूरी, लेकिन सीटों के बंटवारे पर अब भी बना हुआ है सस्पेंस
राजधानी पटना के गांधी मैदान में भव्य शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। मंच, पंडाल और बैठने की व्यवस्था तैयार है। इस बड़े आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन असली चर्चा मंत्रियों की संख्या और दलों के बीच बंटवारे को लेकर है।
बीजेपी का पुराना फॉर्मूला लागू होने के संकेत, JDU की मांग पर संशय बरकरार
सूत्रों के अनुसार बीजेपी नेतृत्व पहले से तय फार्मूले पर ही आगे बढ़ना चाहता है। पार्टी के अंदरूनी संकेत यह बताते हैं कि JDU की 16 पदों की मांग को पूरी तरह स्वीकार करना मुश्किल है। माना जा रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व पहले से तय संतुलन के आधार पर ही अंतिम फैसला करेगा।
नीतीश कुमार के बाद बदले समीकरण, डिप्टी सीएम के पास पहले से अहम जिम्मेदारियां
राज्य में हाल ही में नेतृत्व परिवर्तन हुआ है, जिसमें नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बने हैं। JDU के पास पहले से दो उपमुख्यमंत्री—विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव—मौजूद हैं, जिनके पास कई महत्वपूर्ण विभाग हैं। ऐसे में पार्टी अब और अधिक मंत्री पद हासिल कर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।
243 सीटों वाले बिहार में मंत्रियों की सीमा तय, JDU की मांग से बढ़ी गणितीय चुनौती
बिहार विधानसभा में कुल 243 सीटें हैं, जिसके आधार पर संविधान के अनुसार अधिकतम 30 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इस सीमित संख्या के बीच JDU की 16 सीटों की मांग ने राजनीतिक गणित को जटिल बना दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि गठबंधन के अन्य दलों के बीच सीटों का संतुलन कैसे बैठाया जाता है।
निशांत कुमार की एंट्री पर अटकलें तेज, लेकिन फिलहाल संगठन पर फोकस
इस बीच निशांत कुमार को मंत्री बनाए जाने की चर्चा भी जोरों पर है। हालांकि, पार्टी की ओर से संकेत दिया गया है कि फिलहाल वह संगठन को मजबूत करने और जनता के बीच सक्रिय रहने पर ध्यान दे रहे हैं। उनकी सक्रियता को भविष्य की राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।





