मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर खतरे के चलते वैश्विक तेल सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया है। इसी बीच अफ्रीका का देश नाइजीरिया तेजी से एक नए ऊर्जा केंद्र के रूप में उभर रहा है। लागोस में बनी विशाल रिफाइनरी अब न सिर्फ देश की जरूरतें पूरी कर रही है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी ईंधन निर्यात कर रही है। इस बदलाव के पीछे चीन की औद्योगिक ताकत और भारत की इंजीनियरिंग विशेषज्ञता का बड़ा योगदान माना जा रहा है।
650,000 बैरल प्रतिदिन क्षमता वाली रिफाइनरी ने नाइजीरिया को आयातक से निर्यातक बनाया
अफ्रीका के सबसे अमीर उद्योगपति Aliko Dangote के स्वामित्व वाली यह रिफाइनरी अब पूरी क्षमता यानी 6.5 लाख बैरल प्रतिदिन पर काम कर रही है। इसने नाइजीरिया को पहली बार परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों का शुद्ध निर्यातक बना दिया है, जिससे देश की दशकों पुरानी आयात निर्भरता खत्म होती नजर आ रही है।
अफ्रीका से यूरोप और एशिया तक फैल रहा ईंधन सप्लाई का नेटवर्क
इस रिफाइनरी से तैयार ईंधन अब सेनेगल से लेकर मोजाम्बिक तक पहुंच रहा है। इसके अलावा यूरोप के देशों—नीदरलैंड और यूनाइटेड किंगडम—और एशिया के कुछ हिस्सों में भी इसकी सप्लाई शुरू हो चुकी है। यह विस्तार दिखाता है कि नाइजीरिया अब वैश्विक ऊर्जा बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बना रहा है।
चीन की औद्योगिक ताकत और भारत की इंजीनियरिंग ने मिलकर खड़ी की मेगा परियोजना
इस रिफाइनरी के निर्माण में 8 से अधिक चीनी कंपनियों ने हिस्सा लिया, जिन्होंने बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया। वहीं भारत की भूमिका इंजीनियरिंग मैनेजमेंट और प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने में अहम रही। Engineers India Limited को 35 करोड़ डॉलर के कॉन्ट्रैक्ट के तहत इस प्रोजेक्ट के विस्तार और प्रबंधन की जिम्मेदारी दी गई है।
30,000 से ज्यादा स्थानीय और हजारों विदेशी विशेषज्ञों ने मिलकर बनाया यह प्रोजेक्ट
निर्माण के दौरान इस परियोजना में 30,000 से अधिक नाइजीरियाई श्रमिकों के साथ 6,400 भारतीय और 3,250 चीनी कर्मचारी जुड़े रहे। इसके अलावा करीब 11,000 प्रशिक्षित भारतीय तकनीशियनों की भागीदारी ने इस प्रोजेक्ट की जटिल तकनीकी जरूरतों को पूरा करने में मदद की।
भारत में ट्रेनिंग लेकर तैयार हुई स्थानीय तकनीकी टीम, जामनगर से मिला अनुभव
रिफाइनरी शुरू होने से पहले नाइजीरिया ने अपने करीब 800 युवाओं को भारत भेजा, जहां उन्हें Bharat Petroleum Corporation Limited में ट्रेनिंग दी गई। इन युवाओं को 24 महीनों तक बैचों में प्रशिक्षण मिला, जिससे उन्हें बड़े पैमाने की रिफाइनिंग प्रणाली को समझने का अनुभव मिला। इस दौरान उन्हें दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स जामनगर की कार्यप्रणाली से भी परिचित कराया गया।
भारतीय इंजीनियरिंग लीडरशिप ने तकनीकी विकास में निभाई अहम भूमिका
इस प्रोजेक्ट में भारतीय इंजीनियर Devakumar VG Edwin ने तेल और गैस विभाग के उपाध्यक्ष के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में रिफाइनरी का तकनीकी विकास और संचालन सफलतापूर्वक शुरू किया गया, जिससे यह प्रोजेक्ट समय पर पूरा हो सका।





