चिकन नेक तक अंडरवॉटर टनल: पूर्वोत्तर कनेक्टिविटी में बड़ा गेमचेंजर
भारत सरकार देश के सबसे रणनीतिक इलाकों में से एक सिलीगुड़ी कॉरिडोर (जिसे “चिकन नेक” कहा जाता है) में एक महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनने वाली यह ट्विन ट्यूब टनल न सिर्फ यात्रा को आसान बनाएगी, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद अहम साबित होगी।
क्या है पूरा प्रोजेक्ट?
यह टनल असम में गोहपुर को नुमालीगढ़ से जोड़ेगी।
- कुल लंबाई: 33.7 किमी
- पानी के अंदर हिस्सा: 15.79 किमी
- टनल का प्रकार: ट्विन ट्यूब (दो समानांतर सुरंगें)
हर टनल में सड़क लेन होगी, और एक में रेल लाइन भी प्रस्तावित है—यानी यह मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी का बड़ा उदाहरण बनेगा।
कुल लागत और प्रति किमी खर्च
- कुल अनुमानित लागत: ₹18,662 करोड़
- प्रति किलोमीटर लागत: ₹550–600 करोड़
तुलना करें तो यह लागत सामान्य सड़क निर्माण से 3–4 गुना ज्यादा है।
इतना महंगा क्यों?
इस प्रोजेक्ट की लागत ज्यादा होने के पीछे कई बड़े कारण हैं:
- नदी के नीचे 32–57 मीटर गहराई पर निर्माण
- अत्याधुनिक Tunnel Boring Machine (TBM) तकनीक का इस्तेमाल
- हाई-ग्रेड वॉटरप्रूफिंग और प्रेशर-रेसिस्टेंट डिजाइन
- हर 500 मीटर पर इमरजेंसी एग्जिट
- सड़क + रेल दोनों का इंफ्रास्ट्रक्चर
ये सभी फैक्टर इसे एक हाई-टेक और महंगा प्रोजेक्ट बनाते हैं।
यात्रा में कितना बदलाव?
इस टनल के बन जाने के बाद:
- मौजूदा यात्रा समय: लगभग 6 घंटे
- टनल के बाद: सिर्फ 20 मिनट
यानी समय की भारी बचत और लॉजिस्टिक्स में बड़ा सुधार।
रणनीतिक महत्व
चिकन नेक कॉरिडोर भारत के लिए बेहद संवेदनशील इलाका है, जो पूरे पूर्वोत्तर को मुख्य भारत से जोड़ता है।
इस टनल के फायदे:
- सेना और रक्षा लॉजिस्टिक्स को तेज़ी
- ऑल-वेदर कनेक्टिविटी
- व्यापार और सप्लाई चेन में मजबूती
- आम लोगों की आवाजाही आसान
फंडिंग मॉडल
इस प्रोजेक्ट में लागत का बंटवारा:
- 80% – सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय
- 20% – रक्षा मंत्रालय
ब्रह्मपुत्र के नीचे बनने वाली यह टनल सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि रणनीतिक, आर्थिक और सामाजिक बदलाव का बड़ा कदम है।
जहां एक ओर यह यात्रा को आसान बनाएगी, वहीं दूसरी ओर देश की सुरक्षा और पूर्वोत्तर के विकास को नई रफ्तार देगी।





