कृषि कर्मयोगी’ मिशन पर एमपी सरकार: किसानों की आय बढ़ाने के लिए टेक्नोलॉजी और योजनाओं का बड़ा दांव
भोपाल से किसानों के लिए नई पहल का ऐलान
मध्यप्रदेश में किसानों के सशक्तिकरण को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘कृषि कर्मयोगी’ मिशन के तहत एक व्यापक अभियान की शुरुआत की। राजधानी भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित कार्यशाला में उन्होंने साफ कहा—“किसानों के हित में काम करना सिर्फ जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समर्पण का विषय है।” इस मौके पर सरकार ने डिजिटल और संस्थागत स्तर पर तीन बड़ी पहलें शुरू कीं—मुख्यमंत्री किसान कल्याण डैशबोर्ड, पैक्स सदस्यता महाअभियान और सीएम किसान हेल्पलाइन।
155253 हेल्पलाइन: किसानों के लिए सीधा समाधान
सरकार ने किसानों को त्वरित सहायता देने के लिए टोल-फ्री ‘सीएम किसान हेल्पलाइन’ (155253) शुरू की है। मुख्यमंत्री ने खुद इस हेल्पलाइन से जुड़कर इसकी कार्यप्रणाली का परीक्षण किया।
इस पहल का उद्देश्य है:
- किसानों को तुरंत कृषि सलाह
- फसल, मौसम और बाजार से जुड़ी जानकारी
- समस्याओं का त्वरित समाधान
यह हेल्पलाइन ग्रामीण किसानों के लिए “सरकार तक सीधी पहुंच” का माध्यम बनने जा रही है।
16 विभागों का ‘कृषक कल्याण मॉडल’
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाते हुए 16 विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। इसमें कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी, मत्स्य पालन और सहकारिता जैसे विभाग शामिल हैं। नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह समन्वित मॉडल किसानों की आय बढ़ाने और खेती को लाभकारी बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।
‘कृषि कर्मयोगी’ कार्यशाला: सोच और सिस्टम में बदलाव
इस उन्मुखीकरण कार्यशाला में प्रदेशभर से 1600 से ज्यादा अधिकारियों और कर्मचारियों को जोड़ा गया। उद्देश्य साफ था—सरकारी अमले की सोच को “किसान केंद्रित” बनाना।
मुख्यमंत्री ने कहा कृषि कर्मयोगी नई तकनीक और नवाचार अपनाएं, ताकि किसानों को बेहतर सेवाएं मिल सकें।
खेती में बदलाव: अब 3 फसलें लेने लगे किसान
मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र में आए बदलावों को रेखांकित करते हुए कहा कि
- सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से खेती अब बारिश पर निर्भर नहीं
- नहर और बिजली पहुंचने से उत्पादन बढ़ा
- किसान अब साल में 2 की जगह 3 फसलें ले रहे हैं
यह बदलाव राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहा है।
दूध उत्पादन में उछाल, किसानों को बेहतर दाम
नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के सहयोग से पशुपालन क्षेत्र में भी बड़ा सुधार देखने को मिला है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक:
- दुग्ध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई
- किसानों को प्रति लीटर दूध पर 7–8 रुपये ज्यादा मिल रहे हैं
इसे राज्य में “दुग्ध क्रांति” की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
MSP और खरीद नीति पर सरकार का फोकस
सरकार किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने के लिए भी सक्रिय है:
- गेहूं की खरीद ₹2625 प्रति क्विंटल
- उड़द की फसल पर भी समर्थन मूल्य का लाभ
यह कदम किसानों की आय स्थिर करने में मददगार माना जा रहा है।
एग्री वेस्ट से अतिरिक्त कमाई का रास्ता
मुख्यमंत्री ने ‘एग्री वेस्ट मैनेजमेंट’ को किसानों की अतिरिक्त आय का जरिया बताया।
अब किसान:
- नरवाई से भूसा बना रहे हैं
- फसल अवशेषों से कमाई कर रहे हैं
इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ आय बढ़ाने का डबल फायदा मिल रहा है।
युवाओं को खेती से जोड़ने पर जोर
मुख्यमंत्री ने युवाओं को खेती की ओर आकर्षित करने की जरूरत बताई। उन्होंने इज़राइल का उदाहरण देते हुए कहा कि सीमित संसाधनों में भी तकनीक के जरिए खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है।
नदी जोड़ो परियोजनाओं से बदलेगी तस्वीर
सरकार ने सिंचाई के बड़े प्रोजेक्ट्स पर भी जोर दिया है:
- केन-बेतवा लिंक परियोजना
- पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) परियोजना
इन परियोजनाओं से मध्यप्रदेश और राजस्थान के कई जिलों को फायदा होगा और खेती के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ेगी।
टेक्नोलॉजी + समन्वय = किसान सशक्तिकरण
मध्यप्रदेश सरकार की यह पहल साफ संकेत देती है कि अब खेती को पारंपरिक नहीं, बल्कि तकनीक आधारित और बहु-आयामी व्यवसाय बनाने पर फोकस है। ‘कृषि कर्मयोगी’ मिशन, डिजिटल डैशबोर्ड, हेल्पलाइन और बड़े सिंचाई प्रोजेक्ट—ये सभी मिलकर किसानों के लिए एक नए इकोसिस्टम की नींव रख रहे हैं। अब असली चुनौती यही होगी कि ये योजनाएं जमीनी स्तर पर कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से लागू होती हैं—क्योंकि किसानों की समृद्धि का असली पैमाना खेत में दिखेगा, न कि सिर्फ घोषणाओं में। (प्रकाश कुमार पांडेय)





