फलोदी सट्टा बाजार का बड़ा दावा: बंगाल में बीजेपी आगे, दक्षिण में बदलेगा समीकरण?
एग्जिट पोल से अलग तस्वीर—बंगाल, असम, तमिलनाडु और केरल को लेकर सट्टा बाजार के अनुमान ने बढ़ाई सियासी हलचल
देश के कई राज्यों में चुनावी प्रक्रिया पूरी होने के बाद जहां एग्जिट पोल चर्चा में हैं, वहीं अब फलोदी सट्टा बाजार के आंकड़ों ने भी सियासी माहौल को गरमा दिया है। खासतौर पर West Bengal को लेकर सट्टा बाजार के अनुमान चौंकाने वाले माने जा रहे हैं, जो कुछ हद तक एग्जिट पोल से अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं।
बंगाल में बीजेपी को बढ़त का दावा
फलोदी सट्टा बाजार के अनुसार पश्चिम बंगाल में चुनावी हवा बदलती दिख रही है। जहां शुरुआती दौर में Trinamool Congress को बढ़त मिलती दिख रही थी, वहीं दूसरे चरण की वोटिंग के बाद समीकरण बदले हैं। अब सट्टा बाजार Bharatiya Janata Party को 150 से 152 सीटों तक पहुंचता दिखा रहा है, जबकि टीएमसी 137 से 140 सीटों के बीच सिमट सकती है।
दिलचस्प बात यह है कि पहले बीजेपी को करीब 100 सीटों तक सीमित माना जा रहा था, लेकिन मतदान के बाद उसके आंकड़ों में अचानक उछाल देखा गया है।
भवानीपुर सीट पर भी बदला माहौल
भवानीपुर सीट, जो Mamata Banerjee का गढ़ मानी जाती है, वहां भी सट्टा बाजार ने संकेत बदले हैं। यहां उनके भाव 20-25 पैसे से बढ़कर 50 पैसे तक पहुंच गए हैं। सट्टा बाजार की भाषा में ज्यादा “भाव” का मतलब स्थिति कमजोर होना माना जाता है, जिससे इस सीट पर मुकाबला कड़ा होने के संकेत मिल रहे हैं।
असम में NDA मजबूत
Assam में सट्टा बाजार बीजेपी और उसके सहयोगी दलों को स्पष्ट बढ़त देता नजर आ रहा है। अनुमान के मुताबिक एनडीए 98 से 100 सीटें जीत सकता है, जबकि कांग्रेस 24 से 26 सीटों तक सीमित रह सकती है। इससे संकेत मिलते हैं कि असम में सत्ता वापसी की राह बीजेपी के लिए आसान हो सकती है।
तमिलनाडु में INDIA गठबंधन आगे
Tamil Nadu में सट्टा बाजार के आंकड़े अलग तस्वीर दिखा रहे हैं। यहां एनडीए को करीब 100 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि INDIA गठबंधन को 140 सीटों तक बढ़त दी जा रही है। इससे संकेत मिलता है कि दक्षिण भारत में सत्ता का समीकरण उत्तर से अलग हो सकता है।
केरल में UDF की मजबूती
Kerala में सट्टा बाजार United Democratic Front को बढ़त देता दिख रहा है। अनुमान के अनुसार UDF को करीब 80 सीटें मिल सकती हैं, जबकि Left Democratic Front 60 सीटों के आसपास रह सकता है। यह संकेत सत्ता परिवर्तन की ओर इशारा करते हैं।
कितने भरोसेमंद हैं ये आंकड़े?
फलोदी सट्टा बाजार के आंकड़े अक्सर चर्चा में रहते हैं और कई बार ये नतीजों के करीब भी माने जाते हैं। हालांकि ये आधिकारिक सर्वे नहीं होते और इनका आधार पूरी तरह बाजार की धारणा और सट्टेबाजी पर टिका होता है। ऐसे में इन्हें अंतिम परिणाम नहीं माना जा सकता।





