मध्य प्रदेश में बीजेपी नेताओं का अहंकार…अफसरों से बदसलूकी के मामलों पर उठे गंभीर सवाल..मोहन सरकार के लिए मुसीबत बनते ये ‘अहंकारी’
मध्य प्रदेश में सत्ताधारी दल के नेताओं द्वारा वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ बदसलूकी और अभद्र व्यवहार के मामलों ने अब एक चिंताजनक ट्रेंड का रूप ले लिया है। BJP के नेताओं और जनप्रतिनिधियों द्वारा सरकारी अधिकारियों को हड़काने, धमकाने या उनके साथ दुर्व्यवहार करने की घटनाएं मोहन यादव सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई हैं।
दिसंबर 2023 में मोहन यादव के नेतृत्व में बनी सरकार के कार्यकाल में अब तक ऐसे एक दर्जन से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। इनमें मंत्री, सांसद, विधायक और उनके परिजन तक शामिल रहे हैं। हर बार घटनाक्रम लगभग एक जैसा ही रहा—नेता या उनके करीबी द्वारा अधिकारी का अपमान, फिर पार्टी मुख्यालय में बुलाकर समझाइश, और अंत में ‘भावनाओं में बहकर’ कहे गए शब्दों के लिए माफी।
कर्नल पर आपत्तिजनक टिप्पणी, फिर माफी से मामला खत्म
पिछले साल मई में कैबिनेट मंत्री कुंवर विजय शाह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान प्रेस ब्रीफिंग में शामिल रहीं कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक और सांप्रदायिक टिप्पणी की थी। उन्होंने कर्नल को ‘आतंकियों की बहन’ तक कह दिया था।
मामले ने तूल पकड़ा तो सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच के लिए एसआईटी गठित की, वहीं हाईकोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। हालांकि, मंत्री ने बाद में माफी मांग ली और कहा कि “सोफिया जी मेरी बहन जैसी हैं।” इसके बावजूद वह अपने पद पर बने हुए हैं और पार्टी ने भी कोई कठोर कार्रवाई नहीं की।
विधायक लोधी का धमकी भरा वीडियो और बेटे का विवाद
हाल ही में चंबल क्षेत्र के विधायक प्रीतम लोधी ने शिवपुरी जिले के करेरा एसडीओपी को धमकी देते हुए वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा कि वह 10 हजार लोगों के साथ अधिकारी के घर का घेराव करेंगे और उसमें गोबर भर देंगे। दरअसल, एक दिन पहले विधायक के बेटे ने अपनी थार गाड़ी से चार लोगों को कुचलकर घायल कर दिया था। इस पर कार्रवाई के दौरान पुलिस अधिकारी ने गाड़ी पर अवैध टिंटेड ग्लास और हूटर लगाने पर चालान कर दिया, जिससे विधायक नाराज हो गए। बाद में वही पुरानी प्रक्रिया दोहराई गई—पार्टी मुख्यालय में बुलाकर समझाइश, और फिर विधायक ने इसे ‘भावनात्मक प्रतिक्रिया’ बताते हुए माफी मांग ली।
सार्वजनिक मंच पर थप्पड़ और गाली-गलौज
सतना से सांसद गणेश सिंह ने एक क्रेन ऑपरेटर को सार्वजनिक रूप से थप्पड़ मार दिया और गाली दी। वहीं भिंड के विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाहा ने जिला कलेक्टर के घर में घुसकर उन्हें ‘चोर’ कहा और हाथ उठाने की कोशिश की।
हाईकोर्ट जज को फोन, फिर बिना शर्त माफी
कटनी के विधायक संजय पाठक ने खनन मामले की सुनवाई कर रहे हाईकोर्ट जज को फोन कर दिया। जब अदालत ने इसे गंभीरता से लिया, तो विधायक ने कोर्ट में पेश होकर बिना शर्त माफी मांग ली। बावजूद इसके पार्टी स्तर पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
महिला अधिकारी को दी जान से मारने की धमकी
22 अप्रैल को अलीराजपुर में कैबिनेट मंत्री नागर सिंह चौहान के भाई ने जनपद पंचायत की महिला सीईओ को उनके दफ्तर में धमकाया। उन्होंने कहा कि “दांत तोड़ दूंगा, जिंदा गाड़ दूंगा” और यह भी दावा किया कि दफ्तर में वही होगा जो वह चाहेंगे। यह विवाद ‘कन्या विवाह योजना’ की सूची से कुछ नाम हटाए जाने को लेकर हुआ था।
क्या बन गया है ‘माफी’ ही समाधान?
इन सभी घटनाओं में एक बात समान है—किसी भी मामले में ठोस दंडात्मक कार्रवाई का अभाव। पार्टी की ओर से केवल ‘समझाइश’ और नेता की ‘माफी’ के बाद मामला खत्म मान लिया जाता है। माना जा रहा है कि अगर इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो यह प्रवृत्ति प्रशासनिक व्यवस्था और कानून के शासन के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।
मध्य प्रदेश में सामने आ रहे ये घटनाक्रम यह सवाल खड़ा करते हैं कि क्या सत्ता में बैठे लोगों के लिए जवाबदेही सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई है? जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ‘माफी’ का यह सिलसिला शायद यूं ही चलता रहेगा।





